वैभव सूर्यवंशी का ऐतिहासिक तूफान, भारत ने इंग्लैंड को 100 रन से हराकर छठा अंडर-19 विश्व कप जीता
महज 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने अंडर-19 विश्व कप 2026 के फाइनल में ऐसा विस्फोटक शतक जड़ा, जिसे इस टूर्नामेंट के इतिहास की सबसे यादगार पारियों में गिना जाएगा।
भारतीय क्रिकेट को एक नया सुपरस्टार मिल गया है। महज 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने अंडर-19 विश्व कप 2026 के फाइनल में ऐसा विस्फोटक शतक जड़ा, जिसे इस टूर्नामेंट के इतिहास की सबसे यादगार पारियों में गिना जाएगा। सूर्यवंशी की रिकॉर्डतोड़ पारी की बदौलत भारत ने इंग्लैंड को 100 रन से हराकर छठी बार अंडर-19 विश्व कप का खिताब अपने नाम किया।
शुक्रवार (6 फरवरी 2026) को हरारे में खेले गए फाइनल मुकाबले में इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया, लेकिन यह निर्णय जल्द ही भारी पड़ गया। भारतीय टीम ने निर्धारित ओवरों में 9 विकेट पर 411 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया, जो अंडर-19 विश्व कप फाइनल का अब तक का सबसे बड़ा टीम टोटल है।
वैभव सूर्यवंशी की पारी बनी इतिहास

मैच के असली हीरो रहे ओपनर वैभव सूर्यवंशी, जिन्होंने सिर्फ 80 गेंदों में 175 रन की तूफानी पारी खेली। उनकी इस पारी में 15 छक्के और 15 चौके शामिल रहे। यानी 175 में से 150 रन सिर्फ बाउंड्री से आए। उन्होंने इंग्लैंड के गेंदबाजों को पूरी तरह बेबस कर दिया और हरारे स्पोर्ट्स क्लब को मानो अपना निजी मैदान बना लिया।
सूर्यवंशी ने सिर्फ 32 गेंदों में अर्धशतक, फिर 55 गेंदों में शतक पूरा कर लिया और टूर्नामेंट के इतिहास में दूसरे सबसे तेज शतकवीर बने। इसके बाद भी उनका कहर थमा नहीं—अगले 23 गेंदों में उन्होंने दूसरा अर्धशतक पूरा कर दिया।
कई रिकॉर्ड एक साथ ध्वस्त
वैभव सूर्यवंशी की यह पारी रिकॉर्ड्स से भरी रही।
- यह U-19 वर्ल्ड कप फाइनल में सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर है।
- उन्होंने 71 गेंदों में 150 रन पूरे कर अंडर-19 क्रिकेट का सबसे तेज 150 बनाया।
- एक यूथ ODI पारी में सबसे ज्यादा छक्कों (15) का रिकॉर्ड भी उनके नाम हो गया।
- पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने 22 छक्के जड़े, जो किसी एक संस्करण में सर्वाधिक हैं।
- वह U-19 विश्व कप के इतिहास के सबसे युवा शतकवीर भी बन गए।
बिहार के समस्तीपुर से आने वाले इस युवा बल्लेबाज ने साबित कर दिया कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य बेहद सुरक्षित हाथों में है।
कप्तान आयुष म्हात्रे के साथ अहम साझेदारी
सूर्यवंशी ने कप्तान आयुष म्हात्रे के साथ 19 ओवरों में 142 रनों की साझेदारी की। म्हात्रे ने 51 गेंदों में 53 रन की अहम पारी खेली। एक समय भारत का रन रेट 10 से ऊपर चल रहा था और स्कोर 500 के पार जाता दिख रहा था।

हालांकि 26वें ओवर में सूर्यवंशी, मानी लम्सडन की गेंद पर विकेटकीपर को कैच देकर आउट हुए। उनके आउट होते ही इंग्लैंड के खिलाड़ी भी राहत की सांस लेते नजर आए और कई खिलाड़ियों ने आगे बढ़कर उन्हें इस ऐतिहासिक पारी के लिए बधाई दी।
मध्यक्रम का उपयोगी योगदान
सूर्यवंशी के आउट होने के बाद भी भारतीय बल्लेबाजों ने रन गति बनाए रखी।
- अभिज्ञान कुंडू ने 31 गेंदों में 40 रन,
- वेदांत त्रिवेदी ने 36 गेंदों में 32 रन,
- विहान मल्होत्रा ने 36 गेंदों में 30 रन,
- कनिष्क चौहान ने 20 गेंदों में 37 रन की तेज पारी खेली।
इन योगदानों के चलते भारत 400 के पार पहुंचने में सफल रहा।
इंग्लैंड की लड़खड़ाती गेंदबाजी
इंग्लैंड के लिए गेंदबाजी पूरी तरह बिखरी नजर आई।
- मानी लम्सडन ने 8 ओवर में 81 रन लुटाए,
- सेबेस्टियन मॉर्गन ने 9 ओवर में 74 रन दिए।
स्पिनरों राल्फी अल्बर्ट और फरहाद अहमद को भी सूर्यवंशी ने बुरी तरह निशाना बनाया।
लक्ष्य का पीछा करते हुए इंग्लैंड की कोशिश

412 रन के विशाल लक्ष्य के जवाब में इंग्लैंड की टीम 40.2 ओवर में 311 रन पर सिमट गई। कालेब फाल्कनर ने 67 गेंदों में 115 रन की शानदार पारी खेली और हार का अंतर कम किया, लेकिन जीत भारत से बहुत दूर थी।
भारतीय गेंदबाजों ने सामूहिक प्रदर्शन करते हुए इंग्लैंड को लगातार दबाव में रखा और मैच को पूरी तरह अपने नियंत्रण में रखा।
भारत की निरंतर U-19 बादशाहत
इस जीत के साथ भारत ने एक बार फिर साबित किया कि उसका घरेलू ढांचा, प्रतिभा भंडार और युवा क्रिकेट प्रणाली दुनिया में सबसे मजबूत है। भारत ने इससे पहले 2022 में खिताब जीता था और अब 2026 में छठी बार चैंपियन बनकर अपनी बादशाहत कायम रखी।
निष्कर्ष
वैभव सूर्यवंशी की यह पारी सिर्फ एक मैच-विनिंग प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य की झलक है। जिस तरह कभी विराट कोहली और रोहित शर्मा ने U-19 मंच से खुद को दुनिया के सामने पेश किया था, उसी तरह अब वैभव सूर्यवंशी ने अपनी दस्तक दे दी है। यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि एक नए युग की शुरुआत का संकेत है।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
