जहानाबाद नीट छात्रा की संदिग्ध मौत: सीबीआई ने तेज की जांच, सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल डेटा की गहन पड़ताल
बिहार के जहानाबाद जिले में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब केंद्रीय जांच एजेंसी की प्राथमिकता सूची में शामिल है।
नीट मामले में सीसीटीवी फुटेज और डीवीआर की फोरेंसिक जांच
पटना/जहानाबाद: बिहार के जहानाबाद जिले में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब केंद्रीय जांच एजेंसी की प्राथमिकता सूची में शामिल है। इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने तकनीकी और फोरेंसिक विश्लेषण की प्रक्रिया को पूरी गति से आगे बढ़ा दिया है। सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी ने विशेष जांच दल (SIT) द्वारा जब्त किए गए सीसीटीवी फुटेज और संबंधित डीवीआर की फोरेंसिक रिपोर्ट का अध्ययन शुरू कर दिया है।
सीसीटीवी फुटेज के हर फ्रेम की जांच
जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सीबीआई की तकनीकी टीम फुटेज के हर फ्रेम का बारीकी से विश्लेषण कर रही है। उद्देश्य यह है कि घटना के समय-क्रम को स्पष्ट किया जा सके और यह समझा जा सके कि छात्रा की मौत से पहले और बाद में किन-किन गतिविधियों का रिकॉर्ड मौजूद है। फुटेज के माध्यम से संदिग्ध गतिविधियों, आने-जाने वाले लोगों और समय की सटीकता को स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।

फोरेंसिक विशेषज्ञ डीवीआर से डेटा रिकवर कर उसकी प्रामाणिकता भी जांच रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि रिकॉर्डिंग से किसी प्रकार की छेड़छाड़ तो नहीं की गई। डिजिटल साक्ष्यों की यह परत-दर-परत जांच मामले की सच्चाई तक पहुंचने में अहम भूमिका निभा सकती है।
भाई के मोबाइल की तकनीकी पड़ताल
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू मृत छात्रा के भाई से बरामद मोबाइल फोन है, जिसे मखदुमपुर इलाके से जब्त किया गया था। सीबीआई इस मोबाइल के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), चैट हिस्ट्री, लोकेशन डेटा और अन्य डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही है। विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि घटना से पहले या बाद में कोई संदिग्ध बातचीत या लोकेशन मूवमेंट तो नहीं हुआ।
डिजिटल फोरेंसिक जांच के जरिए यह भी देखा जा रहा है कि मोबाइल में कोई डिलीटेड डेटा तो नहीं है, जिसे रिकवर कर केस की कड़ियों को जोड़ा जा सके। आधुनिक जांच में डिजिटल साक्ष्य को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, खासकर तब जब घटनाक्रम को लेकर कई सवाल अनुत्तरित हों।
परिजनों को धमकी भरे पर्चे, सुरक्षा पर सवाल
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब छात्रा की मौत के बाद परिजनों को लगातार धमकी भरे पर्चे मिलने लगे। पुलिस के अनुसार 13 और 17 फरवरी को अज्ञात लोगों ने घर के किचन की खिड़की से धमकी भरे पर्चे फेंके। खिड़की में केवल ग्रिल लगी होने के कारण बाहर से आसानी से कागज फेंका जा सकता था।
इस घटना के बाद स्थानीय पुलिस और जिला फॉरेंसिक टीम सक्रिय हो गई। शकूराबाद थाने की पुलिस और जिला एफएसएल टीम ने पीड़िता के गांव पहुंचकर मौके का निरीक्षण किया। एफएसएल अधिकारी मनीषा रानी और शकूराबाद थानाध्यक्ष राहुल कुमार ने किचन और खिड़की के आसपास से कई नमूने एकत्र किए, जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।
परिवार में दहशत का माहौल
छात्रा के पिता ने बताया कि धमकी भरे पर्चों के बाद परिवार खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि पहले से ही परिवार सदमे में है और अब लगातार मिल रही धमकियों से भय का माहौल बना हुआ है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के तौर पर एक सब-इंस्पेक्टर, दो पुलिसकर्मी और एक चौकीदार की तैनाती की गई है, लेकिन इसके बावजूद पर्चा फेंके जाने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आधिकारिक चुप्पी, लेकिन जांच तेज
सीबीआई अधिकारी फिलहाल मामले में आधिकारिक तौर पर कुछ भी बताने से बच रहे हैं। एजेंसी की नीति के अनुसार जांच पूरी होने या ठोस निष्कर्ष सामने आने से पहले कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया जाता। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि जांच कई स्तरों पर समानांतर रूप से चल रही है—डिजिटल साक्ष्य, फोरेंसिक विश्लेषण, गवाहों के बयान और संभावित संदिग्धों की गतिविधियों की पड़ताल।
क्या कहता है कानून?
संदिग्ध मौत के मामलों में यदि किसी प्रकार की साजिश, दबाव या आपराधिक कृत्य के संकेत मिलते हैं, तो संबंधित धाराओं के तहत कठोर कार्रवाई संभव है। धमकी भरे पर्चों की घटना भी अलग से आपराधिक मामला बन सकती है, जिसकी जांच स्थानीय पुलिस कर रही है। यदि इन धमकियों का संबंध मूल मामले से जुड़ा पाया जाता है, तो जांच का दायरा और व्यापक हो सकता है।
जहानाबाद नीट छात्रा की संदिग्ध मौत का यह मामला अब राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है। परिवार न्याय की मांग कर रहा है, जबकि जांच एजेंसियां तकनीकी और वैज्ञानिक आधार पर सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश में जुटी हैं। आने वाले दिनों में फोरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल विश्लेषण के निष्कर्ष इस केस की दिशा तय कर सकते हैं।
फिलहाल, पूरे मामले पर सभी की नजर सीबीआई की अगली कार्रवाई और संभावित खुलासों पर टिकी है।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
