महाशिवरात्रि 2026: देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा भगवान शिव का पावन पर्व
भगवान शिव को समर्पित पवित्र पर्व महाशिवरात्रि आज देशभर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। “महाशिवरात्रि” अर्थात् भगवान शिव की महान रात्रि, हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है।
भगवान शिव को समर्पित पवित्र पर्व महाशिवरात्रि आज देशभर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। “महाशिवरात्रि” अर्थात् भगवान शिव की महान रात्रि, हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस दिन शिवभक्त उपवास रखकर, रात्रि जागरण कर और विशेष पूजा-अर्चना करके भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
महाशिवरात्रि फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ था। कुछ धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस रात्रि भगवान शिव ने सृष्टि के कल्याण हेतु तांडव नृत्य किया था, जो सृजन, पालन और संहार का प्रतीक है।
महाशिवरात्रि का धार्मिक महत्व
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात्रि अत्यंत शुभ और शक्तिशाली मानी जाती है। कहा जाता है कि इस दिन विधि-विधान से शिवलिंग की पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-शांति एवं समृद्धि आती है। श्रद्धालु “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप कर भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

आध्यात्मिक दृष्टि से भी यह पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। माना जाता है कि इस रात ग्रहों की स्थिति विशेष ऊर्जा उत्पन्न करती है, जिससे ध्यान और साधना का विशेष लाभ मिलता है। योग और ध्यान करने वाले साधक इस रात को आत्मचिंतन और आंतरिक जागरण के लिए सर्वोत्तम मानते हैं।
देशभर में भव्य आयोजन
महाशिवरात्रि के अवसर पर देश के प्रमुख शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर में सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिलीं। श्रद्धालु गंगाजल, दूध, शहद और बेलपत्र अर्पित कर भगवान शिव का अभिषेक कर रहे हैं।
उत्तराखंड के हरिद्वार में भी गंगा तट पर श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान कर मंदिरों में पूजा-अर्चना की। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में विशेष भस्म आरती का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों भक्त शामिल हुए।

इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडित समुदाय इस पर्व को “हेरथ” के नाम से मनाता है, जो क्षेत्रीय परंपराओं की विविधता को दर्शाता है।
व्रत और पूजा-विधि
महाशिवरात्रि के दिन भक्त निर्जला या फलाहार व्रत रखते हैं। रात्रि भर जागरण कर शिव स्तुति, भजन-कीर्तन और मंत्र जाप किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, रात्रि के चार प्रहरों में शिवलिंग का विशेष अभिषेक किया जाता है। दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और बेलपत्र से भगवान शिव की पूजा की जाती है।

धार्मिक विद्वानों का कहना है कि महाशिवरात्रि केवल बाहरी अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, सकारात्मकता और आत्मशुद्धि का संदेश भी देती है।
प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा
महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रमुख मंदिरों और तीर्थ स्थलों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती, सीसीटीवी निगरानी और यातायात प्रबंधन की विशेष व्यवस्था की गई है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
दिल्ली, मुंबई और अन्य महानगरों में भी मंदिरों में विशेष सजावट की गई है। कई स्थानों पर भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सामाजिक संगठनों द्वारा जरूरतमंदों के लिए भोजन वितरण और सेवा कार्य भी किए जा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उत्सव
महाशिवरात्रि का पर्व केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में बसे भारतीय समुदाय द्वारा भी धूमधाम से मनाया जाता है। नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर में इस अवसर पर विशेष आयोजन होते हैं, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
डिजिटल युग में कई मंदिरों ने पूजा और आरती का लाइव प्रसारण भी शुरू किया है, जिससे दूर बैठे भक्त भी ऑनलाइन माध्यम से जुड़कर इस पावन पर्व में भाग ले सकें।
आध्यात्मिक जागरण का संदेश
महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर है। “हर हर महादेव” के जयकारों के बीच यह पर्व हमें संयम, श्रद्धा और सकारात्मक परिवर्तन का संदेश देता है।
महाशिवरात्रि 2026 एक बार फिर देश की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को उजागर कर रही है, साथ ही यह याद दिलाती है कि भगवान शिव की कृपा से जीवन में नई ऊर्जा और नई दिशा प्राप्त की जा सकती है।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
