मुंबई में बिहार भवन पर सियासी घमासान, अशोक चौधरी बोले: किसी के बाप का नहीं…

बिहार भवन

मुंबई में प्रस्तावित बिहार भवन को लेकर अचानक राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

मुंबई में प्रस्तावित बिहार भवन को लेकर अचानक राजनीतिक माहौल गरमा गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के तीखे विरोध के बाद यह मुद्दा महाराष्ट्र से लेकर बिहार तक सियासी बहस का केंद्र बन गया है। जहां एक ओर महाराष्ट्र की क्षेत्रीय पार्टियां इसे “मुंबई की जमीन पर नजर” बता रही हैं, वहीं दूसरी ओर बिहार सरकार और उसके सहयोगी दल इसे जरूरतमंदों के लिए अहम परियोजना करार दे रहे हैं।

बिहार भवन के विरोध से शुरू हुआ विवाद

बिहार सरकार ने मुंबई में बिहार भवन के निर्माण का फैसला लिया है, जिसे कैबिनेट से 314.20 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी भी मिल चुकी है। जैसे ही यह फैसला सार्वजनिक हुआ, मनसे और शिवसेना (यूबीटी) ने इसका खुलकर विरोध करना शुरू कर दिया। मनसे प्रमुख राज ठाकरे के पार्टी नेताओं ने ऐलान किया कि वे मुंबई में बिहार भवन नहीं बनने देंगे। शिवसेना (यूबीटी) ने भी इसे क्षेत्रीय अस्मिता से जोड़ते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।

शिवसेना नेता विनायक राउत ने तंज कसते हुए कहा कि मुंबई की जमीन को धीरे-धीरे बाहरी राज्यों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है और भविष्य में बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में गुजरात भवन बनाने की मांग भी उठ सकती है। उनके मुताबिक यह फैसला क्षेत्रीय राजनीति से प्रेरित है।

बिहार सरकार और सहयोगी दलों की तीखी प्रतिक्रिया

मनसे और शिवसेना के विरोध के जवाब में बिहार में सत्तारूढ़ दल आक्रामक नजर आए। बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने कड़े शब्दों में कहा कि हुल्लड़बाजी छोड़कर शांत रहें, क्योंकि बिहार भवन हर हाल में बनेगा। उन्होंने यहां तक कहा कि “किसी के बाप में दम नहीं है जो बिहार भवन के निर्माण को रोक सके।”

अशोक चौधरी ने मनसे प्रमुख राज ठाकरे पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वे फालतू बयान दे रहे हैं और सवाल उठाया कि क्या मुंबई किसी की जागीर है या यहां राजतंत्र चलता है। उनके इस बयान से विवाद और भड़क गया।

शिवसेना के दोनों गुटों की अलग-अलग राय

इस मुद्दे पर शिवसेना के दोनों गुटों की राय भी अलग नजर आई। शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने कहा कि बीएमसी में सत्ता में आने वाली शिवसेना की जिम्मेदारी होगी कि वह इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख रखे।

वहीं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट से जुड़े नेता संजय निरुपम ने मनसे और उद्धव गुट के विरोध को गलत ठहराया। उन्होंने कहा कि बिहार भवन सिर्फ एक सरकारी इमारत नहीं, बल्कि कैंसर मरीजों और उनके परिजनों के लिए राहत केंद्र के रूप में काम करेगा। ऐसे में इसका विरोध अमानवीय है।

बिहार भवन की जरूरत और उद्देश्य

बिहार फाउंडेशन (मुंबई) के अध्यक्ष कैसर खालिद के अनुसार, बिहार भवन के जरिए मुंबई से बिहार में उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने की रणनीति तैयार की जाएगी। यह भवन न केवल प्रशासनिक और अतिथि उपयोग के लिए होगा, बल्कि बिहार से इलाज के लिए मुंबई आने वाले लोगों के लिए भी बड़ी सुविधा बनेगा।

भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि ने स्पष्ट किया है कि यह इमारत पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल होगी और आधुनिक तकनीक से लैस होगी।

30 मंजिला आधुनिक भवन की पूरी रूपरेखा

प्रस्तावित बिहार भवन दक्षिण मुंबई के एल्फिंस्टन इस्टेट में मुंबई पोर्ट ट्रस्ट की जमीन पर बनाया जाएगा। बेसमेंट सहित यह इमारत 30 मंजिला होगी, जिसकी ऊंचाई करीब 69 मीटर होगी। इसमें कुल 178 कमरे होंगे, जिनका उपयोग अधिकारी, अतिथि और जरूरतमंद नागरिक करेंगे।

इसके अलावा भवन में 240 बेड की क्षमता वाला विशेष छात्रावास भी बनाया जाएगा। यहां इलाज के लिए मुंबई आने वाले बिहार के मरीज और उनके परिजन ठहर सकेंगे। खासतौर पर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान यह सुविधा उनके लिए बड़ी राहत साबित होगी।

पहले से मौजूद हैं कई राज्यों के भवन

गौरतलब है कि नवी मुंबई और आसपास के इलाकों में उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, असम, केरल, उत्तराखंड समेत कई राज्यों के भवन पहले से मौजूद हैं। इन भवनों का मकसद भी संबंधित राज्यों से आने वाले लोगों को ठहरने और सहायता की सुविधा देना है।

इसी वजह से जानकारों का मानना है कि बिहार भवन को लेकर हो रहा विरोध ज्यादा राजनीतिक है, व्यावहारिक कम। अगर अन्य राज्यों के भवन मुंबई क्षेत्र में चल सकते हैं, तो बिहार भवन पर आपत्ति करना दोहरे मापदंड जैसा लगता है।

मुंबई में बिहार भवन का मुद्दा अब सिर्फ एक निर्माण परियोजना नहीं रह गया है, बल्कि यह क्षेत्रीय राजनीति, पहचान और मानवीय जरूरतों से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सियासी विरोध के बीच यह परियोजना किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या जरूरतमंदों को इसका लाभ मिल पाता है या नहीं।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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