NEET परीक्षा रद्द होने पर सियासी संग्राम तेज, छात्रों के भविष्य पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने

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बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने NEET परीक्षा रद्द होने पर केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला है।

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET 2026 रद्द होने के बाद देशभर में लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता और असमंजस का माहौल है। पेपर लीक के आरोपों और परीक्षा रद्द होने के फैसले ने न केवल शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। बिहार से लेकर दिल्ली तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। विपक्ष सरकार को छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने का जिम्मेदार बता रहा है, जबकि भाजपा इसे परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने की दिशा में उठाया गया कठोर लेकिन जरूरी कदम बता रही है।

तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने NEET परीक्षा रद्द होने पर केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए कहा कि पेपर लीक की वजह से परीक्षा रद्द होना देश के 23 लाख छात्रों के भविष्य के साथ बड़ा अन्याय है। उनके मुताबिक बिहार समेत कई राज्यों में लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं, लेकिन सरकार इन्हें रोकने में विफल साबित हो रही है।

तेजस्वी यादव ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या भाजपा सरकारों के पास इतनी भी प्रशासनिक क्षमता और इच्छाशक्ति नहीं बची है कि एक सामान्य प्रतियोगी परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित कराया जा सके। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कहीं यह भी “संयोग और प्रयोग” की राजनीति का हिस्सा तो नहीं, जिसमें जनता परेशान हो और सत्ता को फायदा मिलता रहे।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हर बार जांच के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जाती है, लेकिन असली दोषियों तक कार्रवाई नहीं पहुंचती। तेजस्वी ने सरकार से आत्मनिरीक्षण करने की मांग करते हुए पूछा कि क्या वह सच में देश के युवाओं के साथ न्याय कर रही है।

पुनर्परीक्षा से बढ़ेगी छात्रों की परेशानी

नेता प्रतिपक्ष ने परीक्षा रद्द होने के बाद होने वाली पुनर्परीक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अब लाखों छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ेगी, जिसके लिए उन्हें फिर से अलग-अलग शहरों में स्थित परीक्षा केंद्रों तक यात्रा करनी होगी। इससे छात्रों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

तेजस्वी यादव के अनुसार लाखों लीटर पेट्रोल-डीजल की अतिरिक्त खपत होगी, वहीं छात्रों को मानसिक तनाव और शारीरिक परेशानी भी झेलनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अधिकांश छात्र मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों से आते हैं, जिनके लिए बार-बार यात्रा और रहने का खर्च उठाना आसान नहीं होता।

उन्होंने प्रधानमंत्री पर भी निशाना साधते हुए कहा कि केवल भाषणों और बड़े-बड़े दावों से देश नहीं चलता, बल्कि शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी पड़ती है।

भाजपा का पलटवार, राजद शासनकाल पर उठाए सवाल

तेजस्वी यादव के बयान के बाद भाजपा ने भी जोरदार पलटवार किया। भाजपा प्रवक्ता Prabhakar Mishra ने कहा कि तेजस्वी यादव को छात्रों की चिंता कम और राजनीति की चिंता ज्यादा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस दौर में बिहार जंगलराज और भ्रष्टाचार की पहचान बन चुका था, आज उसी शासन से जुड़े लोग नैतिकता का पाठ पढ़ा रहे हैं।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि वर्तमान NDA सरकार पेपर लीक मामलों में लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने दावा किया कि परीक्षा रद्द करने का फैसला छात्रों के हित में लिया गया है ताकि निष्पक्ष परीक्षा सुनिश्चित की जा सके।

प्रभाकर मिश्रा ने राजद शासनकाल पर हमला बोलते हुए कहा कि उस समय भर्ती माफियाओं और पेपर लीक गिरोहों को राजनीतिक संरक्षण मिलता था, जबकि वर्तमान सरकार ऐसे लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज रही है। उन्होंने तेजस्वी यादव से सवाल पूछा कि उनके माता-पिता के शासनकाल में कितने युवाओं को बिना घूस और बिना सिफारिश के नौकरी मिली थी।

कांग्रेस ने भी सरकार को घेरा

NEET परीक्षा रद्द होने के मुद्दे पर कांग्रेस ने भी केंद्र सरकार को घेरा है। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने कहा कि 22 लाख से ज्यादा छात्रों की मेहनत और सपनों को भ्रष्ट व्यवस्था ने कुचल दिया है। उन्होंने कहा कि लाखों परिवारों ने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज लिया, गहने बेचे और वर्षों तक संघर्ष किया, लेकिन बदले में उन्हें पेपर लीक और सरकारी लापरवाही मिली।

राहुल गांधी ने इसे केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ अपराध बताया। उन्होंने कहा कि हर बार पेपर माफिया बच निकलते हैं और ईमानदार छात्र सजा भुगतते हैं। अब लाखों छात्रों को फिर से वही मानसिक तनाव, आर्थिक बोझ और अनिश्चितता झेलनी पड़ेगी।

उन्होंने कहा कि यदि देश में छात्रों की किस्मत मेहनत की बजाय पैसे और पहुंच से तय होने लगे, तो शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के “अमृतकाल” वाले नारे पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यह दौर देश के युवाओं के लिए “विषकाल” बनता जा रहा है।

शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे बड़े सवाल

NEET परीक्षा रद्द होने के बाद पूरे देश में शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते परीक्षा प्रणाली में तकनीकी और प्रशासनिक सुधार नहीं किए गए, तो युवाओं का विश्वास पूरी तरह टूट सकता है।

वहीं दूसरी ओर छात्र संगठनों ने मांग की है कि सरकार केवल जांच और बयानबाजी तक सीमित न रहे, बल्कि पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ तेज और निर्णायक कार्रवाई करे। साथ ही परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।

NEET 2026 परीक्षा रद्द होने का मामला अब सिर्फ शिक्षा का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक और सामाजिक बहस का बड़ा विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक और ज्यादा गर्माने की संभावना है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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