पटना NEET छात्रा मौत मामला: SIT गठन के बाद भी सवालों के घेरे में नीतीश सरकार और होम मिनिस्टर सम्राट चौधरी
NEET छात्रा
पटना। बिहार की राजधानी पटना में एक NEET छात्रा की संदिग्ध मौत ने राज्य की कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआत में पुलिस द्वारा इसे आत्महत्या बताए जाने के बाद अब, परिवार के विरोध, जनआक्रोश और मीडिया दबाव के चलते मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है। हालांकि, सवाल यह उठ रहा है कि सरकार और प्रशासन ने इतनी गंभीर घटना पर कार्रवाई करने में देरी क्यों की?

क्या है पूरा मामला?
यह मामला पटना के शंभु गर्ल्स हॉस्टल से जुड़ा है, जहां जहानाबाद की रहने वाली एक NEET की तैयारी कर रही छात्रा की 12 जनवरी 2026 को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पुलिस ने शुरुआती जांच में दावा किया कि छात्रा ने ओवरडोज लेकर आत्महत्या की है और वेब हिस्ट्री में कथित तौर पर सुसाइड से जुड़े सर्च मिले हैं।
लेकिन मृतका के परिवार ने शुरू से ही इस थ्योरी को खारिज करते हुए दुराचार और हत्या का आरोप लगाया। परिवार का कहना है कि छात्रा के शरीर पर चोटों के निशान थे और उसकी मौत सामान्य परिस्थितियों में नहीं हुई।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने बढ़ाई गंभीरता
मामले में उस समय नया मोड़ आया जब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में संघर्ष के संकेत और सेक्सुअल असॉल्ट की संभावना की बात सामने आई। डॉक्टरों ने यह स्वीकार किया कि पेनिट्रेटिव असॉल्ट को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता। हालांकि, पुलिस अधिकारियों के बयानों में इसे लेकर विरोधाभास देखने को मिला।
परिवार का आरोप है कि पोस्टमॉर्टम में जानबूझकर देरी की गई, CCTV फुटेज और मोबाइल डेटा को छिपाने की कोशिश हुई और मामले को दबाने के लिए उन पर दबाव बनाया गया।
पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने शव को सड़क पर रखकर विरोध प्रदर्शन किया। आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। सोशल मीडिया पर मामला तूल पकड़ने के बाद आखिरकार सरकार हरकत में आई।

अब DGP के निर्देश पर SIT का गठन किया गया है, जिसकी निगरानी पटना रेंज के IG करेंगे। SIT में महिला अधिकारी भी शामिल की गई हैं। इसके साथ ही ASP सदर और संबंधित थाना प्रभारी (SHO) को हटा दिया गया।
लेकिन कार्रवाई में देरी क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मामला 12 जनवरी को सामने आया, तो 16 जनवरी को जाकर SIT क्यों बनाई गई? इस देरी को लेकर बिहार सरकार और विशेष रूप से गृह मंत्री व डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं।
राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का कहना है कि अगर समय रहते निष्पक्ष जांच शुरू होती, तो सरकार को इतनी आलोचना का सामना नहीं करना पड़ता।
महिलाओं की सुरक्षा पर फिर बहस
यह मामला सिर्फ एक छात्रा की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार में महिला सुरक्षा की वास्तविक स्थिति को उजागर करता है। पटना जैसे शहर में गर्ल्स हॉस्टल्स की सुरक्षा, उनके संचालन और निगरानी को लेकर कोई ठोस व्यवस्था न होने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
राज्य सरकार भले ही विकास और सुशासन के दावे करती रही हो, लेकिन इस घटना ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या छात्राएं और महिलाएं वास्तव में सुरक्षित हैं?
राजनीतिक प्रतिक्रिया और जनआक्रोश
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर #JusticeForNEETStudent ट्रेंड कर रहा है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने दोषियों की गिरफ्तारी, पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
परिवार का कहना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
आगे क्या?
फिलहाल SIT जांच कर रही है और हॉस्टल मालिक की गिरफ्तारी हो चुकी है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या जांच निष्पक्ष होगी और क्या दोषियों को सजा मिलेगी?
यह मामला अब नीतीश सरकार और गृह मंत्री सम्राट चौधरी के लिए विश्वसनीयता की परीक्षा बन चुका है। आने वाले दिनों में SIT की रिपोर्ट और सरकार की आगे की कार्रवाई यह तय करेगी कि यह मामला न्याय तक पहुंचेगा या फिर एक और फाइल बनकर रह जाएगा।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
