पटना में NEET छात्रा केस पर विरोध प्रदर्शन, CBI दफ्तर घेरने की कोशिश
बिहार की राजधानी पटना में NEET छात्रा रेप और मौत मामले ने अब बड़ा जनआंदोलन का रूप ले लिया है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और इनकम टैक्स चौराहे से केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कार्यालय तक मार्च निकालने की कोशिश की। पुलिस ने पहले से ही बैरिकेडिंग कर रखी थी, जिसके कारण प्रदर्शनकारियों को वहीं रोक दिया गया। इस दौरान कुछ जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और झड़प की भी खबरें सामने आईं।
प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि चार महीने बीत जाने के बाद भी जांच एजेंसियां किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी हैं, जो कि बेहद चिंताजनक है। लोगों ने नारेबाजी करते हुए जल्द से जल्द दोषियों की गिरफ्तारी और सख्त सजा की मांग की।
बाहर से भी पहुंचे लोग, महिलाओं की बड़ी भागीदारी
इस विरोध प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें सिर्फ पटना ही नहीं, बल्कि जहानाबाद और आसपास के जिलों से भी लोग शामिल होने पहुंचे। सूत्रों के मुताबिक, सैकड़ों लोग बसों के जरिए पटना पहुंचे थे। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया।

प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर “बेटी को न्याय दो”, “CBI जवाब दो” और “दोषियों को फांसी दो” जैसे नारे लिखे हुए थे। यह साफ संकेत था कि जनता अब इस मामले में देरी और कथित लापरवाही को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
परिजनों का दर्द: “CBI पर भरोसा नहीं”
मृतक छात्रा की मां ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें अब CBI जांच पर भरोसा नहीं रह गया है। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनकी बेटी के साथ दरिंदगी हुई और उसे इंसाफ दिलाने के लिए वे हर संभव लड़ाई लड़ेंगी। उन्होंने दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग करते हुए कहा कि जांच एजेंसी को जल्द से जल्द कार्रवाई करनी चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए एक पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को CBI अधिकारियों से मुलाकात के लिए भेजा, ताकि प्रदर्शनकारियों की मांग सीधे जांच एजेंसी तक पहुंच सके।
4 महीने बाद भी जांच अधर में, कई अहम सवाल बाकी
यह मामला 11 जनवरी 2026 का है, जब पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। शुरुआती जांच में मामला संदिग्ध लगा और बाद में फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट में रेप के संकेत भी मिले। लेकिन इतने गंभीर मामले में भी अब तक कई अहम सवालों के जवाब नहीं मिल पाए हैं:
- छात्रा के साथ रेप किसने किया?
- हत्या किसने की?
- कपड़ों पर मिले स्पर्म का मालिक कौन है?
- घटना के समय हॉस्टल में कौन-कौन मौजूद था?
करीब 4 महीने बीत जाने के बावजूद न तो चार्जशीट दाखिल हुई है और न ही किसी आरोपी की स्पष्ट पहचान हो सकी है। इससे लोगों का गुस्सा और बढ़ता जा रहा है।
जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल
इस केस की जांच पहले पटना पुलिस ने की, फिर स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई और बाद में मामला CBI को सौंप दिया गया। लेकिन तीनों स्तरों पर जांच को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।

कोर्ट की टिप्पणियों और वकीलों के आरोपों के अनुसार, CBI जांच में कई बड़ी खामियां सामने आई हैं:
- शुरुआत में POCSO एक्ट की धाराएं नहीं जोड़ी गईं
- मुख्य संदिग्धों से पूछताछ नहीं की गई
- कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और लोकेशन ट्रैकिंग की अनदेखी
- डिजिटल साक्ष्यों का सही तरीके से विश्लेषण नहीं हुआ
- फॉरेंसिक और मेडिकल रिपोर्ट को प्राथमिकता नहीं दी गई
- SIT की पुरानी थ्योरी के आधार पर ही जांच आगे बढ़ाई गई
इन खामियों के चलते कोर्ट ने भी नाराजगी जताई, जिसके बाद जांच को CBI की दिल्ली टीम को ट्रांसफर कर दिया गया है।
पप्पू यादव का बयान: “समाज भी जिम्मेदार”
इस प्रदर्शन में सांसद Pappu Yadav भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि समाज और सिस्टम दोनों की विफलता का उदाहरण है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में लीपापोती की जा रही है और असली दोषियों को बचाने की कोशिश हो रही है।

उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे को कई बार संसद में उठा चुके हैं, लेकिन फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना था कि जब तक दोषियों को सजा नहीं मिलती, वे इस लड़ाई को जारी रखेंगे।
परिवार का आरोप: जांच का दबाव हम पर ही
पीड़ित परिवार और उनके वकील का आरोप है कि जांच एजेंसियां असली आरोपियों की बजाय परिवार के लोगों पर ही दबाव बना रही हैं। बार-बार परिवार के सदस्यों से पूछताछ की जा रही है, जबकि मुख्य संदिग्धों से उतनी सख्ती नहीं दिखाई जा रही।
परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि जांच को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की जा रही है, जबकि फॉरेंसिक रिपोर्ट कुछ और ही संकेत देती है।
न्याय की लड़ाई जारी, उम्मीदें दिल्ली CBI से
NEET छात्रा रेप और मौत का यह मामला अब सिर्फ एक आपराधिक केस नहीं रह गया है, बल्कि यह बिहार की कानून-व्यवस्था और जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता की परीक्षा बन गया है। जनता सड़कों पर है, परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है और कोर्ट भी सख्त रुख अपनाए हुए है।
अब सारी निगाहें CBI की दिल्ली टीम पर टिकी हैं, जिससे उम्मीद की जा रही है कि वह निष्पक्ष और तेज जांच कर इस केस की सच्चाई सामने लाएगी। सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या पीड़ित छात्रा को इंसाफ मिल पाएगा या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
