पटना गर्ल्स हॉस्टल विवाद: छात्रा की मौत के बाद कथित सेक्स रैकेट पर सियासी तूफान, जांच के घेरे में रसूखदार नाम

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पटना गर्ल्स हॉस्टल विवाद

पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली एक छात्रा की संदिग्ध मौत के बाद राजधानी बिहार में हड़कंप मच गया है। इस मामले को लेकर पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने गंभीर आरोप लगाते हुए इसे एक बड़े कथित सेक्स रैकेट से जोड़ा है। उन्होंने हॉस्टल संचालक मनीष रंजन पर रसूखदार नेताओं और अधिकारियों को लड़कियां “सप्लाई” करने का आरोप लगाया और पुलिस-प्रशासन पर संरक्षण देने का दावा किया। सांसद के बयान के बाद पटना के गर्ल्स हॉस्टल और कोचिंग संस्थानों से जुड़े कथित रैकेट की चर्चा तेज हो गई है।

पप्पू यादव का आरोप: हॉस्टल की आड़ में अवैध धंधा

पप्पू यादव का कहना है कि शंभू गर्ल्स हॉस्टल की आड़ में लंबे समय से कथित सेक्स रैकेट चल रहा था, जिसे पुलिस का संरक्षण प्राप्त था। उन्होंने दावा किया कि प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता के कारण कार्रवाई से बचने की कोशिशें हो रही हैं। सांसद के अनुसार, जांच का दायरा बढ़ने पर कई रसूखदार नाम सामने आ सकते हैं, जिसके चलते मामले को दबाने का दबाव भी बढ़ रहा है।

“सूत्रधार कौन?”—जांच के केंद्र में नेटवर्क

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, पटना में कुछ गर्ल्स हॉस्टल और कोचिंग संस्थानों के आसपास दलालों का नेटवर्क सक्रिय है। आरोप है कि बाहर से पढ़ाई के लिए आने वाली छात्राओं को पहले अपने प्रभाव में लिया जाता है और फिर कथित तौर पर अवैध गतिविधियों में धकेला जाता है। यह भी कहा जा रहा है कि नाबालिग उम्र की लड़कियों को पैसे, फैशन और सुविधाओं का लालच देकर फंसाया जाता है।

एक प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान में पढ़ने वाली छात्रा ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लाइब्रेरी में पढ़ाई के दौरान कुछ सीनियर छात्राओं ने उससे बातचीत शुरू की, तारीफ की और बाद में कई युवकों की तस्वीरें दिखाकर “रेटिंग” मांगी। छात्रा के मुताबिक, बाद में उसे कुछ समय “खुलकर बिताने” के बदले 25 से 40 हजार रुपये का ऑफर दिया गया। इंकार करने पर कथित तौर पर मानसिक दबाव बनाया गया, जिसके बाद उसने कोचिंग जाना ही छोड़ दिया।

हॉस्टल से कैसे चलता है कथित नेटवर्क

गर्ल्स हॉस्टल से जुड़े कुछ लोगों का आरोप है कि वार्डन की मिलीभगत से छात्राएं देर रात तक बाहर आती-जाती हैं। शुरुआत में आवाजाही पर सख्ती नहीं होती, लेकिन बाद में प्रतिदिन के हिसाब से 1000 से 1500 रुपये तक की कथित वसूली की जाती है। सूत्रों का दावा है कि हॉस्टल से बाहर निकलने, युवकों से मिलवाने और होटल-गेस्ट हाउस तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था इसी नेटवर्क के जरिए होती है।

दानापुर और बैरिया के होटल चर्चा में

हॉस्टल कारोबार से जुड़े सौरभ (बदला हुआ नाम) ने बताया कि बदनामी और विवादों के डर से उन्होंने अपना गर्ल्स हॉस्टल बंद कर दिया। उनका दावा है कि मखनिया कुंआ सहित कुछ इलाकों के हॉस्टलों को लेकर अक्सर मारपीट और हंगामे की घटनाएं होती रहती हैं। रात के समय कई हॉस्टलों के बाहर महंगी गाड़ियां खड़ी दिखती हैं, जिनकी आवाजाही सीसीटीवी में कैद हो सकती है, लेकिन कथित मोटी कमाई के चलते जांच नहीं होती।
सूत्रों के अनुसार, छात्राओं को दानापुर और बैरिया बस स्टैंड के आसपास बने गेस्ट हाउस और होटलों में ले जाया जाता है।

पुलिस-प्रशासन का रुख

मामले में पुलिस का कहना है कि छात्रा की मौत की जांच सभी पहलुओं से की जा रही है और किसी भी आरोप की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यदि किसी भी स्तर पर अवैध गतिविधि या मिलीभगत पाई जाती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने से जांच प्रभावित हो सकती है।

आगे क्या?

इस पूरे प्रकरण ने राजधानी में छात्राओं की सुरक्षा, हॉस्टल प्रबंधन की जवाबदेही और कोचिंग संस्थानों की निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि निष्पक्ष जांच, पीड़ितों की पहचान गोपनीय रखते हुए बयान दर्ज करना, और हॉस्टल-कोचिंग की नियमित ऑडिट बेहद जरूरी है।
फिलहाल, पप्पू यादव के आरोपों के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल है और सभी की नजरें पुलिस जांच पर टिकी हैं—क्या सच सामने आएगा या मामला सियासी आरोप-प्रत्यारोप में उलझकर रह जाएगा?

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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