पटना के गर्ल्स हॉस्टलों में संदिग्ध मौतें: नीतीश सरकार के ‘सुशासन’ पर सवाल, सियासत हुई गर्म
पटना के गर्ल्स हॉस्टलों में संदिग्ध मौतें: नीतीश सरकार के ‘सुशासन’ पर सवाल, सियासत हुई गर्म
बिहार की राजधानी पटना एक बार फिर कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवालों के घेरे में है। शहर के गर्ल्स हॉस्टलों में छात्राओं की संदिग्ध मौतों और सुरक्षा में भारी चूक के मामलों ने न सिर्फ अभिभावकों और छात्रों को डरा दिया है, बल्कि राज्य की राजनीति में भी भूचाल ला दिया है। चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र के शंभू पैलेस गर्ल्स हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की मौत का मामला अभी सुलझा भी नहीं था कि ‘परफेक्ट गर्ल्स हॉस्टल’ (PG) से एक नाबालिग छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर सामने आ गई।

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘सुशासन’ के दावों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। खासकर राजधानी पटना में छात्राओं की सुरक्षा पर उठे सवालों ने सरकार की कार्यप्रणाली और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
शंभू पैलेस हॉस्टल केस: पोस्टमार्टम रिपोर्ट से बढ़ी चिंता
शंभू पैलेस गर्ल्स हॉस्टल में हुई नीट छात्रा की मौत को लेकर जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई, तो मामले ने और गंभीर रूप ले लिया। रिपोर्ट में यौन हिंसा की पुष्टि के बाद यह स्पष्ट हो गया कि यह सिर्फ एक सामान्य मौत का मामला नहीं है। इस खुलासे के बाद अभिभावकों और छात्राओं में डर और आक्रोश दोनों बढ़ गए।

इस बीच, जब लोग शंभू हॉस्टल केस की जांच और कार्रवाई का इंतजार कर रहे थे, तभी परफेक्ट गर्ल्स हॉस्टल में एक और नाबालिग छात्रा की मौत की खबर ने राजधानी को झकझोर कर रख दिया।
परफेक्ट गर्ल्स हॉस्टल की घटना से फैली सनसनी
परफेक्ट गर्ल्स हॉस्टल (PG) में नाबालिग छात्रा की संदिग्ध मौत ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर पटना के निजी हॉस्टलों में सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं? छात्राएं जिन जगहों को सुरक्षित ठिकाना मानकर पढ़ाई के लिए आती हैं, वहीं अगर उनकी जान जोखिम में पड़ जाए, तो यह पूरे सिस्टम की विफलता को दर्शाता है।
इन घटनाओं के बाद अभिभावकों में डर का माहौल है। कई माता-पिता अपने बच्चों को हॉस्टलों से वापस बुलाने पर विचार कर रहे हैं। वहीं छात्राएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं।
रोहिणी आचार्य का नीतीश सरकार पर तीखा हमला
इस संवेदनशील मुद्दे पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने नीतीश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चल रही ‘समृद्धि यात्रा’ पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब राजधानी में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, तो ऐसी यात्रा का क्या औचित्य है।

रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर कड़ा बयान जारी करते हुए लिखा,
“मुख्यमंत्री जी! अपनी आंखें खोलिए और देखिए कि आपके शासन में बिहार की अस्मिता कैसे दागदार हो रही है।”
उन्होंने कहा कि जिस व्यवस्था में बेटियां डर के साये में जीने को मजबूर हों, उस शासन को सुशासन कहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। रोहिणी ने बिहार को माता जानकी की जन्मभूमि बताते हुए तीखा सवाल किया कि क्या अब यह प्रदेश मां-बहन और बेटियों के रहने लायक भी नहीं बचा है?
विपक्ष का आरोप: अपराधियों में पुलिस का खौफ नहीं
रोहिणी आचार्य ने आरोप लगाया कि पटना के हॉस्टलों में दरिंदगी और हैवानियत की घटनाएं बार-बार हो रही हैं, लेकिन अपराधियों में पुलिस और प्रशासन का कोई खौफ नजर नहीं आता। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार केवल जांच कमेटी और एसआईटी बनाकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।
राजद समेत अन्य विपक्षी दल लगातार यह सवाल उठा रहे हैं कि जब राजधानी में ही छात्राएं सुरक्षित नहीं हैं, तो राज्य के अन्य जिलों की स्थिति क्या होगी?
SIT का गठन, लेकिन गुस्सा बरकरार
सरकार ने दोनों मामलों की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) के गठन का ऐलान किया है। पुलिस प्रशासन का दावा है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, जनता का गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ है।
लोगों का कहना है कि हर बड़े मामले के बाद जांच और आश्वासन तो मिलते हैं, लेकिन ठोस सुधार और सख्त कार्रवाई कम ही देखने को मिलती है।
निजी हॉस्टलों पर सख्त नियमों की मांग

इन घटनाओं के बाद एक बार फिर पटना और बिहार के अन्य शहरों में चल रहे निजी गर्ल्स हॉस्टलों की निगरानी और रेगुलेशन का मुद्दा जोर पकड़ने लगा है। सामाजिक संगठनों और छात्र संगठनों ने मांग की है कि:
- सभी निजी हॉस्टलों का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन हो
- सीसीटीवी, सुरक्षा गार्ड और महिला वार्डन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए
- समय-समय पर प्रशासनिक जांच हो
राजनीति से आगे सुरक्षा का सवाल
पटना के गर्ल्स हॉस्टलों में हुई ये घटनाएं केवल राजनीतिक बहस का विषय नहीं हैं, बल्कि यह बिहार में महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल है। सुशासन के दावों के बीच सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह भरोसा कैसे लौटाए और यह कैसे सुनिश्चित करे कि राजधानी में पढ़ने आई बेटियां खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।
अब देखना यह है कि जांच और बयानों से आगे बढ़कर सरकार जमीन पर क्या ठोस कदम उठाती है, या फिर यह मामला भी कुछ दिनों बाद सियासी शोर में दबकर रह जाएगा।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
