बिहार में लाइब्रेरियन बहाली में देरी पर सड़क पर उतरे अभ्यर्थी, पटना में आक्रोश मार्च, परीक्षा तिथि जल्द घोषित करने की मांग
बिहार में लाइब्रेरियन बहाली प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी के खिलाफ अभ्यर्थियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। मंगलवार को ऑल बिहार ट्रेंड लाइब्रेरियन एसोसिएशन के बैनर तले सैकड़ों कैंडिडेट्स ने राजधानी पटना में आक्रोश मार्च निकाला और सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
पटना। बिहार में लाइब्रेरियन बहाली प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी के खिलाफ अभ्यर्थियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। मंगलवार को ऑल बिहार ट्रेंड लाइब्रेरियन एसोसिएशन के बैनर तले सैकड़ों कैंडिडेट्स ने राजधानी पटना में आक्रोश मार्च निकाला और सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों ने मांग की कि लाइब्रेरी पात्रता परीक्षा (Library Eligibility Test) की तिथि अविलंब घोषित की जाए, अन्यथा आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
पटना विश्वविद्यालय से करगिल चौक तक मार्च
आक्रोश मार्च की शुरुआत पटना विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी से हुई। वहां से प्रदर्शनकारी करगिल चौक तक पैदल मार्च करते हुए पहुंचे। करगिल चौक पर अभ्यर्थियों ने पहले सड़क पर बैठकर विरोध जताया और फिर तकिया लगाकर वहीं लेट गए। यह प्रतीकात्मक प्रदर्शन सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करने के लिए किया गया।

प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने शंखनाद कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। “शिक्षा मंत्री हाय-हाय” और “परीक्षा तिथि घोषित करो” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने करगिल चौक पर बैरिकेडिंग कर दी और एहतियातन पुलिस बल के साथ वाटर कैनन भी तैनात किया गया, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
परीक्षा तिथि घोषित नहीं, अभ्यर्थियों में नाराजगी
एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार ने लाइब्रेरियन बहाली के लिए नियमावली तो जारी कर दी है, लेकिन अब तक पात्रता परीक्षा की तिथि घोषित नहीं की गई है। इस कारण हजारों अभ्यर्थी अनिश्चितता की स्थिति में हैं।
पटना जिला अध्यक्ष हर्षित राज ने कहा कि यह मार्च सरकार तक अभ्यर्थियों की आवाज पहुंचाने का प्रयास है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द परीक्षा की तारीख घोषित नहीं की गई तो आंदोलन को राज्यव्यापी रूप दिया जाएगा। उनका कहना है कि सरकार की ढिलाई से युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है।
10 हजार से अधिक पद खाली
बिहार में लाइब्रेरियन के करीब 10 हजार पद खाली बताए जा रहे हैं। इनमें प्लस टू स्कूलों, डिग्री कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के पद शामिल हैं। पद रिक्त रहने के कारण शैक्षणिक संस्थानों की लाइब्रेरी व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

कई स्कूलों और कॉलेजों में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी लाइब्रेरी का काम संभाल रहे हैं, जिससे न तो विद्यार्थियों को समुचित सुविधा मिल पा रही है और न ही पुस्तकालयों का प्रभावी संचालन हो पा रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार यदि समय पर बहाली प्रक्रिया शुरू करे तो शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
2020 की नई नियमावली, फिर भी ठप प्रक्रिया
राज्य सरकार ने वर्ष 2020 में लाइब्रेरियन नियुक्ति के लिए नई नियमावली लागू की थी। इस नियमावली के तहत लाइब्रेरियन पद पर नियुक्ति के लिए पात्रता परीक्षा अनिवार्य की गई। न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता लाइब्रेरी साइंस में स्नातक (बी.लिब) निर्धारित की गई है।
हालांकि नियमावली लागू हुए चार वर्ष से अधिक समय बीत चुके हैं, लेकिन अब तक परीक्षा आयोजित नहीं की गई है। इससे अभ्यर्थियों में गहरा असंतोष है। उनका कहना है कि सरकार ने नियम तो बना दिए, लेकिन अमल करने में गंभीरता नहीं दिखाई।
17 साल से नहीं हुई नई नियुक्ति
बिहार में अंतिम बार वर्ष 2008 में लाइब्रेरियन पदों पर नियुक्ति हुई थी। उस समय बिना पात्रता परीक्षा के बहाली की गई थी। इसके बाद से 17 वर्षों से कोई नई नियुक्ति नहीं हुई है। इतने लंबे अंतराल के कारण बड़ी संख्या में पद खाली हो गए हैं।

अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे इंतजार के कारण कई उम्मीदवारों की आयु सीमा समाप्त हो चुकी है। कुछ अभ्यर्थी रोजगार की तलाश में दूसरे क्षेत्रों में चले गए हैं, जबकि कई अब भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार जल्द प्रक्रिया शुरू करेगी।
शिक्षा व्यवस्था पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि लाइब्रेरी किसी भी शैक्षणिक संस्थान का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। यदि प्रशिक्षित लाइब्रेरियन उपलब्ध नहीं होंगे तो विद्यार्थियों को शोध और अध्ययन के लिए उचित मार्गदर्शन नहीं मिल पाएगा। डिजिटल लाइब्रेरी और ई-रिसोर्स के दौर में प्रशिक्षित पेशेवरों की भूमिका और भी अहम हो गई है।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार की सुस्ती के कारण न केवल युवाओं का करियर प्रभावित हो रहा है, बल्कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था भी कमजोर हो रही है।
सरकार की ओर टिकी निगाहें
फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि राज्य सरकार कब तक लाइब्रेरी पात्रता परीक्षा की तिथि घोषित करती है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
बिहार में लाइब्रेरियन बहाली का मुद्दा अब सिर्फ नियुक्ति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की मजबूती से भी जुड़ गया है। आने वाले दिनों में सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
