पटना में शराबबंदी पर सियासी संग्राम तेज: विधानसभा में ‘शराब डिलीवरी’ दावे से गरमाई राजनीति, सरकार ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी

शराबबंदी

बिहार में शराबबंदी को लेकर सियासत एक बार फिर उबाल पर है। राज्य में लागू पूर्ण शराबबंदी कानून पर विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने आ गए हैं। ताजा विवाद तब शुरू हुआ जब सुनील सिंह ने बिहार विधानसभा में कथित तौर पर ‘शराब की डिलीवरी’ करवा देने का दावा किया।

पटना, बिहार। बिहार में शराबबंदी को लेकर सियासत एक बार फिर उबाल पर है। राज्य में लागू पूर्ण शराबबंदी कानून पर विपक्ष और सत्ता पक्ष आमने-सामने आ गए हैं। ताजा विवाद तब शुरू हुआ जब सुनील सिंह ने बिहार विधानसभा में कथित तौर पर ‘शराब की डिलीवरी’ करवा देने का दावा किया। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। इसके जवाब में नीतीश सरकार में मंत्री और बीजेपी नेता दिलीप जायसवाल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रतिबंधित और अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, चाहे वे ऑनलाइन माध्यम का ही इस्तेमाल क्यों न कर रहे हों।

विधानसभा में शराब डिलीवरी का दावा, सरकार पर सवाल

राजद एमएलसी सुनील सिंह ने राज्य की शराबबंदी नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि उनसे कहा जाए तो वे बिहार विधानसभा परिसर के भीतर भी शराब की डिलीवरी करवा सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 2016 में लागू पूर्ण शराबबंदी कानून के बाद शराब की खपत कम होने के बजाय कई गुना बढ़ गई है। उनका कहना था कि प्रतिबंध के बावजूद राज्य में अवैध शराब की उपलब्धता बनी हुई है, जिससे सरकार की नीति पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।

सुनील सिंह ने यह भी दावा किया कि शराबबंदी के कारण अब ‘सूखा नशा’ यानी ड्रग्स का प्रचलन तेजी से बढ़ा है। उनके अनुसार, युवा वर्ग में नशीले पदार्थों की लत बढ़ना शराबबंदी का अप्रत्यक्ष परिणाम है। उन्होंने कहा कि सरकार को जमीनी हकीकत स्वीकार करते हुए नीति की समीक्षा करनी चाहिए।

दिलीप जायसवाल का पलटवार

सुनील सिंह के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री दिलीप जायसवाल ने तंज कसते हुए कहा, “हो सकता है कि वे ऑनलाइन सिस्टम से अधिक प्रभावित हों।” उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी व्यक्ति अवैध और प्रतिबंधित कार्यों को ऑनलाइन या अन्य किसी माध्यम से संचालित करने की कोशिश करेगा, उसे चिन्हित कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जायसवाल ने कहा कि सरकार शराबबंदी कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि प्रशासन तकनीकी माध्यमों का उपयोग कर ऐसे नेटवर्क पर नजर रख रहा है, जो अवैध रूप से शराब या अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की आपूर्ति करते हैं।

सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास पर जोर

इस दौरान दिलीप जायसवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बिहार दौरे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अमित शाह ने नेपाल और बांग्लादेश से सटे सीमावर्ती इलाकों के विकास पर विशेष ध्यान देने की बात कही है। इन क्षेत्रों में आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास के साथ-साथ स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

उन्होंने यह भी दोहराया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जायसवाल के अनुसार, राज्य और केंद्र सरकार मिलकर सीमाओं की सुरक्षा और विकास दोनों पर समान रूप से काम कर रही हैं।

पीएम मोदी की वैश्विक लोकप्रियता पर गर्व

दिलीप जायसवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक लोकप्रियता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स होना भारत के लिए गौरव की बात है। उनके अनुसार, यह दर्शाता है कि विश्व स्तर पर भारत की छवि और नेतृत्व को किस तरह सराहा जा रहा है।

जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि पीएम मोदी को 25 से अधिक अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं, जो उनकी वैश्विक स्वीकार्यता और प्रभाव को दर्शाते हैं।

शराबबंदी पर जारी रहेगा सियासी घमासान

बिहार में शराबबंदी लंबे समय से राजनीतिक बहस का मुद्दा रही है। जहां सरकार इसे सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम बताती है, वहीं विपक्ष इसके क्रियान्वयन और प्रभावशीलता पर सवाल उठाता रहा है। विधानसभा में ‘शराब डिलीवरी’ के दावे ने इस बहस को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक गरमा सकता है, खासकर तब जब विपक्ष शराबबंदी की समीक्षा की मांग तेज करे। फिलहाल, सरकार अपने रुख पर कायम है और अवैध गतिविधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात दोहरा रही है।

बिहार की राजनीति में शराबबंदी का मुद्दा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। आने वाले दिनों में इस पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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