उपेंद्र कुशवाहा की मांग से गरमाई राजनीति, क्या पटना फिर बनेगा पाटलिपुत्र?
बिहार की राजधानी पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र किए जाने की मांग ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस छेड़ दी है। देशभर में शहरों और राज्यों के नाम बदलने की परंपरा के बीच अब यह मुद्दा बिहार की राजनीति के केंद्र में आ गया है।
बिहार की राजधानी पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र किए जाने की मांग ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस छेड़ दी है। देशभर में शहरों और राज्यों के नाम बदलने की परंपरा के बीच अब यह मुद्दा बिहार की राजनीति के केंद्र में आ गया है। हाल ही में केरल सरकार द्वारा राज्य का आधिकारिक नाम ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद नाम परिवर्तन की चर्चाएं और तेज हो गई हैं। इसी क्रम में पटना को उसके प्राचीन नाम पाटलिपुत्र से जोड़ने की मांग उठी है।
राज्यसभा में उठी मांग
राज्यसभा सदस्य और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र करने की मांग रखी। उन्होंने इसे बिहार के गौरवशाली अतीत से जुड़ने का प्रतीक बताया। उनके अनुसार, जब यह शहर पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता था, तब मौर्य और गुप्त साम्राज्य की राजधानी होने के कारण इसकी पहचान विश्व स्तर पर थी।

कुशवाहा का तर्क है कि राजधानी का नाम पाटलिपुत्र होने से नई पीढ़ी अपने इतिहास के प्रति जागरूक होगी और बिहार के स्वर्णिम काल को समझने की कोशिश करेगी। उनके अनुसार यह केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि ऐतिहासिक चेतना को पुनर्जीवित करने का प्रयास है।
पाटलिपुत्र: प्राचीन वैभव का प्रतीक
करीब 2000 से 2500 वर्ष पूर्व पाटलिपुत्र मौर्य और गुप्त वंश की राजधानी था। चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में मौर्य साम्राज्य बंगाल की खाड़ी से लेकर आधुनिक अफगानिस्तान तक फैला हुआ था। बाद में सम्राट अशोक के समय यह साम्राज्य और भी सुदृढ़ हुआ। गुप्त काल में भी यह शहर सत्ता और संस्कृति का केंद्र बना रहा।

विदेशी यात्री फाहियान और यूनानी इतिहासकार मेगास्थनीज ने अपने लेखों में पाटलिपुत्र की समृद्धि का उल्लेख किया है। यही कारण है कि समर्थक इस नाम को केवल ऐतिहासिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान का आधार मानते हैं।
पटन से पटना तक की यात्रा
इतिहासकारों के अनुसार शेरशाह सूरी के शासनकाल (1540-1545) में पाटलिपुत्र को ‘पटन’ कहा जाने लगा। मुगल काल में औरंगजेब ने 1704 में अपने पोते मोहम्मद अजीम के अनुरोध पर इसका नाम अजीमाबाद रखा। हालांकि यह नाम स्थायी नहीं रह सका। ब्रिटिश शासन के दौरान ‘पटन’ का रूपांतर ‘पटना’ में हो गया और स्वतंत्रता के बाद यही नाम आधिकारिक रूप से प्रचलित रहा।
राजनीति का नया अध्याय?
पटना से पाटलिपुत्र नाम परिवर्तन की मांग को केवल ऐतिहासिक दृष्टि से नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे वर्तमान राजनीतिक समीकरणों से भी जोड़ा जा रहा है। पिछले कुछ दशकों में बिहार की राजनीति में ऐतिहासिक नायकों को जातीय पहचान से जोड़ने की प्रवृत्ति देखी गई है।

चंद्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक को मौर्य/कुशवाहा समुदाय से जोड़कर राजनीतिक लामबंदी की कोशिशें होती रही हैं। चुनावी मौसम में इन सम्राटों की प्रतिमाओं का अनावरण, जयंती समारोह और स्मारक निर्माण की मांगें तेज हो जाती हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाटलिपुत्र नाम की मांग भी इसी सामाजिक-राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़ी हो सकती है।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ‘लव-कुश’ समीकरण का जनक माना जाता है, जिसने राज्य की सामाजिक राजनीति में अहम भूमिका निभाई। वहीं राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की सामाजिक न्याय की राजनीति भी लंबे समय तक प्रभावी रही है। ऐसे में पाटलिपुत्र नाम की बहस को राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
देश में नाम परिवर्तन की परंपरा
भारत में शहरों और राज्यों के नाम बदलने का सिलसिला नया नहीं है। कलकत्ता का नाम कोलकाता, उड़ीसा का ओडिशा और बंबई का मुंबई किया जा चुका है। इन परिवर्तनों के पीछे सांस्कृतिक पहचान, भाषाई शुद्धता और औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति जैसे तर्क दिए गए।
पटना का नाम पाटलिपुत्र करने की मांग भी इसी श्रेणी में रखी जा रही है। समर्थकों का कहना है कि यह कदम बिहार की ऐतिहासिक पहचान को पुनर्स्थापित करेगा, जबकि विरोधियों का मानना है कि इससे विकास से जुड़े मूल मुद्दों से ध्यान भटक सकता है।
आगे क्या?
फिलहाल यह मांग राजनीतिक स्तर पर उठी है, लेकिन इसे लागू करने के लिए राज्य सरकार की सिफारिश और केंद्र की मंजूरी आवश्यक होगी। आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में कितना प्रभाव डालता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
एक बात स्पष्ट है—पटना बनाम पाटलिपुत्र की यह बहस केवल नाम की नहीं, बल्कि इतिहास, पहचान और राजनीति के त्रिकोण में उलझी एक बड़ी चर्चा बन चुकी है।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
