बिहार नवनिर्माण यात्रा: दूसरे दिन बेतिया पहुंचे प्रशांत किशोर, सरकार पर साधा तीखा निशाना
जन सुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) अपनी “बिहार नवनिर्माण यात्रा” के दूसरे दिन पश्चिम चंपारण के बेतिया पहुंचे। यहां उन्होंने आम लोगों से सीधा संवाद करते हुए बिहार की मौजूदा राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्थिति पर कड़ा प्रहार किया।
बेतिया, पश्चिम चंपारण।
जन सुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) अपनी “बिहार नवनिर्माण यात्रा” के दूसरे दिन पश्चिम चंपारण के बेतिया पहुंचे। यहां उन्होंने आम लोगों से सीधा संवाद करते हुए बिहार की मौजूदा राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्थिति पर कड़ा प्रहार किया। प्रशांत किशोर ने साफ शब्दों में कहा कि बिहार की जनता को अब यह समझने की जरूरत है कि चुनाव के समय किए गए लोक-लुभावन वादों और आज की हकीकत के बीच कितना बड़ा फर्क है।

बेतिया में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए PK ने कहा कि अभी विधानसभा चुनाव को महज दो महीने ही बीते हैं, लेकिन राज्य में अपराध और भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुंच चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता से वोट लेने के लिए बड़े-बड़े वादे किए गए, लेकिन सरकार बनते ही वे वादे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं।
दो महीने में ही वादों की पोल खुल गई: प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर ने कहा, “बिहार की जनता को यह देखना और समझना चाहिए कि जिन वादों के आधार पर उनसे वोट मांगा गया था, वे कितने खोखले हैं। अभी सरकार बने सिर्फ दो महीने हुए हैं और हालात यह हैं कि अपराध बढ़ रहा है, भ्रष्टाचार बेलगाम है और आम आदमी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।”
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार की मंशा सही होती, तो सत्ता में आते ही कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों पर काम शुरू हो जाता। लेकिन इसके उलट हालात और बदतर होते जा रहे हैं।
सत्ता बचाने में व्यस्त है सरकार: जन सुराज का आरोप
जन सुराज अभियान की भूमिका स्पष्ट करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि मौजूदा सरकार की प्राथमिकता जनता की समस्याओं का समाधान नहीं, बल्कि किसी भी कीमत पर सत्ता में बने रहना है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दे पूरी तरह हाशिये पर चले गए हैं।

PK ने कहा कि “बिहार नवनिर्माण यात्रा” का उद्देश्य केवल राजनीतिक आलोचना करना नहीं है, बल्कि जनता को सच्चाई से रूबरू कराना और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि जब तक जनता खुद सवाल नहीं पूछेगी, तब तक व्यवस्था नहीं बदलेगी।
बिहार नवनिर्माण यात्रा के जरिए जनता तक पहुंचेगा जन सुराज
प्रशांत किशोर ने बताया कि यह यात्रा बिहार के हर जिले और हर पंचायत तक पहुंचेगी। इस दौरान जन सुराज की टीम जनता से सीधे संवाद करेगी और यह समझने की कोशिश करेगी कि आम लोग किन समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बदलाव ऊपर से नहीं, बल्कि नीचे से शुरू होता है और यही जन सुराज की सोच है।
उन्होंने यह भी कहा कि बिहार की राजनीति को जाति और धर्म से ऊपर उठकर शिक्षा, रोजगार और सुशासन के मुद्दों पर केंद्रित होना चाहिए। जब तक जनता इन मुद्दों पर वोट नहीं करेगी, तब तक हालात नहीं बदलेंगे।
राहुल गांधी को लेकर प्रशांत किशोर का बड़ा बयान
राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े सवाल पर प्रशांत किशोर ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के समर्थन में खुलकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी देश के प्रमुख विपक्षी नेता हैं और लोकतंत्र में उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है।
PK ने कहा, “अगर विपक्ष के नेता को संसद में बोलने का मौका नहीं दिया जाएगा, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। ऐसे में कांग्रेस द्वारा इसका विरोध किया जाना स्वाभाविक है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को अपनी बात रखने का समान अवसर मिले। संसद में संवाद रुकने से देश का नुकसान होता है।

लोकतंत्र में विरोध की भूमिका जरूरी: PK
प्रशांत किशोर ने कहा कि लोकतंत्र सिर्फ चुनाव जीतने का नाम नहीं है, बल्कि यह जनता की आवाज को सुनने और उस पर चर्चा करने की प्रक्रिया है। यदि विपक्ष की आवाज को दबाया जाएगा, तो लोकतंत्र कमजोर होगा।
उन्होंने कहा कि चाहे वह बिहार की राजनीति हो या राष्ट्रीय राजनीति, हर स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। जनता को यह समझना होगा कि लोकतंत्र में उनका रोल सिर्फ वोट डालने तक सीमित नहीं है।
बेतिया से दिया सशक्त राजनीतिक संदेश
बेतिया की धरती से प्रशांत किशोर ने साफ संकेत दिया कि आने वाले दिनों में जन सुराज अभियान और आक्रामक होगा। उन्होंने जनता से अपील की कि वे भावनाओं और झूठे वादों में न फंसें, बल्कि सवाल पूछें और जवाब मांगें।
बिहार नवनिर्माण यात्रा के दूसरे दिन प्रशांत किशोर का यह दौरा न केवल राज्य सरकार के लिए चेतावनी भरा रहा, बल्कि आने वाले समय में बिहार की राजनीति में एक नई बहस की शुरुआत भी करता दिखा।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
