पश्चिम एशिया संकट के बीच एलपीजी आपूर्ति को सुरक्षित रखने के निर्देश, राज्यों से सुरक्षा बढ़ाने को कहा
केंद्र सरकार ने देश में Liquefied Petroleum Gas (एलपीजी) की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए राज्यों को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश में Liquefied Petroleum Gas (एलपीजी) की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए राज्यों को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। बुधवार (11 मार्च 2026) को Govind Mohan ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों (DGP) से एलपीजी सप्लाई चेन से जुड़े बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ाने को कहा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, राज्यों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे एलपीजी की कमी से जुड़ी झूठी अफवाहों और भ्रामक खबरों पर कड़ी निगरानी रखें और ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई करें। केंद्र का मानना है कि अफवाहों के कारण आम जनता में घबराहट फैल सकती है और आवश्यक वस्तुओं की कृत्रिम कमी पैदा हो सकती है।
एलपीजी सप्लाई चेन की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि एलपीजी वितरण प्रणाली देश के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति तंत्र है। इसलिए राज्यों को गैस बॉटलिंग प्लांट, गोदाम, परिवहन नेटवर्क और वितरण केंद्रों की सुरक्षा मजबूत करने को कहा गया है।

Ministry of Home Affairs ने राज्यों को सलाह दी है कि वे इन स्थानों पर पुलिस की मौजूदगी बढ़ाएं और किसी भी प्रकार की अवांछित गतिविधि या बाधा को रोकने के लिए निगरानी प्रणाली को मजबूत करें।
इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैलने वाली अफवाहों को रोकने के लिए साइबर मॉनिटरिंग बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
एलपीजी उत्पादन में 25% की वृद्धि
इसी बीच, Sujata Sharma, जो Ministry of Petroleum and Natural Gas में संयुक्त सचिव हैं, ने बताया कि सरकार द्वारा 8 मार्च को लागू किए गए सप्लाई मेंटेनेंस ऑर्डर के बाद देश में एलपीजी उत्पादन में लगभग 25% की वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ आयात के वैकल्पिक स्रोतों पर भी ध्यान दिया है ताकि ऊर्जा आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा न आए।

कच्चे तेल के आयात में विविधता
सरकार के अनुसार, भारत ने कच्चे तेल की आपूर्ति के स्रोतों में भी विविधता लाने की दिशा में कदम उठाए हैं। पहले जहां भारत के लगभग 55% आयात Strait of Hormuz के मार्ग से आते थे, वहीं अब यह घटकर लगभग 30% रह गया है और करीब 70% आयात अन्य समुद्री मार्गों से हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।

पश्चिम एशिया संकट का असर
हाल के दिनों में West Asia में बढ़ते तनाव और संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ा है। तेल और गैस की आपूर्ति पर अनिश्चितता के कारण कई देशों में कीमतों और उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ी है।
भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, ऐसे हालात में सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखने के लिए कई एहतियाती कदम उठा रहा है।
विपक्ष का सरकार पर हमला
इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। Indian National Congress सहित कई विपक्षी दलों ने एलपीजी की संभावित कमी को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की है।

कांग्रेस ने मांग की है कि पश्चिम एशिया संकट और उससे उत्पन्न ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति पर संसद में पूर्ण चर्चा कराई जाए। पार्टी का कहना है कि देश की जनता को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिलनी चाहिए और सरकार को पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए।
24×7 कंट्रोल रूम स्थापित
स्थिति की निगरानी के लिए Ministry of Home Affairs ने एक 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किया है। इस कंट्रोल रूम में Ministry of Information and Broadcasting और Ministry of Petroleum and Natural Gas के नोडल अधिकारियों को भी शामिल किया गया है।
इसका उद्देश्य एलपीजी सप्लाई से जुड़े किसी भी संकट या अफवाह पर तुरंत प्रतिक्रिया देना और राज्यों के साथ समन्वय बनाए रखना है।
जनता से अपील
सरकार ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे एलपीजी की कमी से संबंधित अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें।
अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में देश में एलपीजी की आपूर्ति सामान्य है और सरकार आवश्यक कदम उठाकर स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए पूरी तरह सतर्क है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि उत्पादन में वृद्धि और आयात स्रोतों के विविधीकरण की रणनीति जारी रहती है, तो भारत आने वाले समय में वैश्विक ऊर्जा संकट के प्रभाव को काफी हद तक कम करने में सफल हो सकता है।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
