‘The Kerala Story 2: गोज़ बियॉन्ड’ पर विवाद तेज, मुस्लिम समुदाय की छवि को लेकर उठे सवाल
साल 2023 में रिलीज़ हुई The Kerala Story 2 ने देशभर में तीखी बहस छेड़ दी थी। निर्देशक सुदीप्तो सेन की इस फिल्म को कुछ लोगों ने सामाजिक मुद्दे पर आधारित बताया, तो कई आलोचकों ने इसे सांप्रदायिक एजेंडा आगे बढ़ाने वाला प्रोजेक्ट करार दिया।
The Kerala Story 2 को लेकर फिर गरमाई बहस, पहले पार्ट से भी ज्यादा विवाद
साल 2023 में रिलीज़ हुई The Kerala Story 2 ने देशभर में तीखी बहस छेड़ दी थी। निर्देशक सुदीप्तो सेन की इस फिल्म को कुछ लोगों ने सामाजिक मुद्दे पर आधारित बताया, तो कई आलोचकों ने इसे सांप्रदायिक एजेंडा आगे बढ़ाने वाला प्रोजेक्ट करार दिया। अब इसका तथाकथित आध्यात्मिक सीक्वल The Kerala Story 2: Goes Beyond रिलीज़ हो चुका है, जिसने एक बार फिर विवादों को हवा दे दी है।
इस बार निर्देशन की कमान कामाख्या नारायण सिंह ने संभाली है, जबकि निर्माता के रूप में विपुल अमृतलाल शाह जुड़े हुए हैं। फिल्म की कहानी और प्रस्तुति को लेकर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों तक तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
कहानी क्या है?
‘The Kerala Story 2: गोज़ बियॉन्ड’ की कहानी अलग-अलग शहरों की तीन हिंदू महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्हें कथित तौर पर मुस्लिम पुरुषों द्वारा प्रेम संबंधों के जरिए फंसाया जाता है। फिल्म में ‘गज़वा-ए-हिंद’ जैसी अवधारणाओं का जिक्र करते हुए यह दिखाने की कोशिश की गई है कि अंतर-धार्मिक विवाह और धर्मांतरण के जरिए देश की जनसांख्यिकी बदलने की साजिश रची जा रही है।

कोच्चि की सुरेखा, जो खुद को प्रगतिशील मानती है, एक पत्रकार सलीम के साथ लिव-इन में रहती है। उसे भरोसा दिलाया जाता है कि उस पर धर्म परिवर्तन या हिजाब थोपने का दबाव नहीं डाला जाएगा। लेकिन कहानी आगे बढ़ते ही सलीम को एक साजिश का हिस्सा दिखाया जाता है। इसी तरह जोधपुर की दिव्या और ग्वालियर की नेहा की कहानी भी शोषण, धोखे और हिंसा के इर्द-गिर्द बुनी गई है।
फिल्म में महिलाओं को धर्मांतरण के बाद नए मुस्लिम नाम दिए जाते हैं और उन्हें शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना झेलते दिखाया गया है। कई दृश्यों में अत्यधिक हिंसा और यौन उत्पीड़न के चित्रण ने दर्शकों को असहज किया है।
रिलीज़ से पहले कानूनी विवाद
फिल्म की रिलीज़ से पहले इसे लेकर कानूनी चुनौतियां सामने आईं। पवित्र रमज़ान माह के दौरान रिलीज़ को लेकर कुछ संगठनों ने आपत्ति जताई। हालांकि अदालत से राहत मिलने के बाद फिल्म सिनेमाघरों में प्रदर्शित की गई। निर्माताओं का कहना है कि फिल्म का उद्देश्य “सामाजिक सच्चाई” दिखाना है, जबकि आलोचकों का आरोप है कि यह एक समुदाय को सामूहिक रूप से खलनायक के रूप में प्रस्तुत करती है।
आलोचना और समर्थन
फिल्म को लेकर समाज दो हिस्सों में बंटा नजर आ रहा है। समर्थकों का दावा है कि यह “लव जिहाद” और जबरन धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर चर्चा की जरूरत को सामने लाती है। वहीं आलोचक इसे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भय और अविश्वास पैदा करने वाला प्रोपेगेंडा मानते हैं।

फिल्म के कुछ संवाद, जिनमें “देश की जनसंख्या बदलने” और “शरिया कानून लागू करने” जैसे दावे किए गए हैं, ने बहस को और तीखा बना दिया है। कई समीक्षकों ने कहा है कि फिल्म में हिंदू परिवारों को रोशनी, प्रेम और पारिवारिक मूल्यों के प्रतीक के रूप में दिखाया गया है, जबकि मुस्लिम इलाकों को अंधेरे और हिंसा से भरा दर्शाया गया है। इस दृश्यात्मक विरोधाभास को लेकर भी सवाल उठे हैं।
राजनीतिक संदर्भ
‘The Kerala Story 2: गोज़ बियॉन्ड’ ऐसे समय में आई है जब देश में धर्मांतरण, समान नागरिक संहिता और जनसंख्या संतुलन जैसे मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। फिल्म को कुछ राजनीतिक वर्गों का समर्थन भी मिला है, जबकि विपक्षी दलों ने इसे समाज में विभाजन बढ़ाने वाला कदम बताया है।
फिल्म में दिखाए गए बुलडोजर और धार्मिक नारों वाले दृश्य भी चर्चा में हैं। आलोचकों का कहना है कि ऐसे प्रतीक वर्तमान राजनीतिक विमर्श से मेल खाते हैं और फिल्म को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि वैचारिक हस्तक्षेप के रूप में स्थापित करते हैं।
सेंसर और जिम्मेदारी पर सवाल
131 मिनट लंबी इस हिंदी फिल्म ने सेंसरशिप, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और फिल्मकारों की सामाजिक जिम्मेदारी पर नई बहस छेड़ दी है। क्या फिल्मों को किसी भी समुदाय के बारे में व्यापक दावे करने की छूट होनी चाहिए? या फिर संवेदनशील विषयों पर संतुलन और तथ्यात्मक आधार जरूरी है

‘The Kerala Story 2: गोज़ बियॉन्ड’ अपने पूर्ववर्ती से भी आगे बढ़कर तीखे संदेश देती है। यह फिल्म केवल एक कहानी नहीं, बल्कि वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक माहौल की झलक भी पेश करती है। जहां एक ओर समर्थक इसे “साहसी सिनेमा” बता रहे हैं, वहीं विरोधी इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का माध्यम मान रहे हैं।
स्पष्ट है कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस से ज्यादा बहस और विवाद के लिए याद की जाएगी। आने वाले दिनों में इसकी सामाजिक और राजनीतिक प्रतिध्वनियां किस दिशा में जाती हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
