TRE-4 परीक्षा को लेकर पटना में उबाल: अभ्यर्थियों का जोरदार प्रदर्शन, सरकार की मंशा पर उठे सवाल
पटना में शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 को लेकर एक बार फिर माहौल गर्म हो गया है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा वर्ष 2026 तक आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं का कैलेंडर जारी किए जाने के बाद, उसमें TRE-4 का नाम न होने से हजारों अभ्यर्थियों में गुस्सा और निराशा दोनों साफ तौर पर देखी जा रही है।
TRE-4 को लेकर पटना में सड़कों पर उतरे अभ्यर्थी
पटना में शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 को लेकर एक बार फिर माहौल गर्म हो गया है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा वर्ष 2026 तक आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं का कैलेंडर जारी किए जाने के बाद, उसमें TRE-4 का नाम न होने से हजारों अभ्यर्थियों में गुस्सा और निराशा दोनों साफ तौर पर देखी जा रही है। इसी नाराजगी के बीच शुक्रवार को पटना की सड़कों पर अभ्यर्थियों का जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला।
प्रदर्शन की शुरुआत पटना कॉलेज से हुई, जहां बड़ी संख्या में शिक्षक अभ्यर्थी एकत्र हुए। हाथों में पोस्टर और बैनर लिए ये अभ्यर्थी सरकार और शिक्षा विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जेपी गोलंबर की ओर बढ़े। पोस्टरों पर “शिक्षा मंत्री झूठा है” और “I LOVE TRE-4” जैसे नारे लिखे थे, जो उनकी भावनात्मक स्थिति और आक्रोश को दर्शा रहे थे। करीब दो घंटे तक चले इस मार्च ने राजधानी के कई इलाकों में यातायात और सामान्य जनजीवन को भी प्रभावित किया।

जैसे ही प्रदर्शनकारी जेपी गोलंबर की ओर बढ़े, पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए रास्ते में बैरिकेडिंग कर दी। पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच काफी देर तक बातचीत और समझाने-बुझाने का प्रयास चलता रहा, लेकिन जब अभ्यर्थियों ने आगे बढ़ने की जिद की तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। बैरिकेडिंग के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच झूमाझटकी भी हुई। कुछ अभ्यर्थियों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, वहीं कई छात्र बैरिकेड पर चढ़ गए, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
दरअसल, इस पूरे विरोध की जड़ BPSC का हालिया परीक्षा कैलेंडर है। आयोग ने 2026 तक होने वाली 50 से अधिक भर्तियों की संभावित तिथियां जारी की हैं। इसमें 70वीं, 71वीं और 72वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (CCE), न्यायिक सेवा, APO, तकनीकी व प्रशासनिक पदों के साथ-साथ विशेष शिक्षक और सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी जैसी भर्तियों का भी उल्लेख है। लेकिन शिक्षक भर्ती परीक्षा TRE-4 इस सूची से पूरी तरह गायब है। यही बात अभ्यर्थियों को सबसे ज्यादा खल रही है।
TRE-4 के कैलेंडर से गायब होने के बाद अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार जानबूझकर शिक्षक भर्ती को टालना चाहती है। उनका कहना है कि जब अन्य सभी बड़ी भर्तियों की संभावित तिथियां दी जा सकती हैं, तो फिर TRE-4 को क्यों नजरअंदाज किया गया। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि सरकार शिक्षक अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर गंभीर नहीं है।

छात्र संगठनों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। उनका कहना है कि सरकार ने पहले एक लाख से अधिक शिक्षक पदों पर भर्ती का वादा किया था, लेकिन बाद में इस संख्या को घटाकर लगभग 26 हजार कर दिया गया। अब हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि सरकार इन पदों पर भी समय पर भर्ती करने को तैयार नहीं है। छात्र संगठनों का आरोप है कि सरकार सिर्फ जुमलेबाजी कर रही है और जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
वहीं, TRE-4 को लेकर शिक्षा मंत्री पहले ही अपना पक्ष रख चुके हैं। हाल ही में दैनिक भास्कर को दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि बिहार देश का पहला ऐसा राज्य है, जहां पिछले दो वर्षों में 2.70 लाख शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। उनके अनुसार, यह पूरी तरह सरकारी और पारदर्शी प्रक्रिया है, जिसमें रोस्टर क्लियरेंस बेहद जरूरी होता है। शिक्षा मंत्री ने यह भी बताया था कि चुनावी प्रक्रिया की वजह से भर्ती में देरी हुई है।
मंत्री के मुताबिक, फिलहाल आधे जिलों से रोस्टर क्लियरेंस मिल चुका है, जबकि बाकी जिलों का इंतजार किया जा रहा है। जैसे ही सभी जिलों से रोस्टर प्राप्त होगा, सामान्य प्रशासन विभाग आरक्षण नियमों के तहत आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा। उनका दावा है कि सरकार की मंशा शिक्षक भर्ती रोकने की नहीं है, बल्कि कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा करने की है।
हालांकि, अभ्यर्थी इस सफाई से संतुष्ट नहीं दिख रहे। उनका कहना है कि जब तक TRE-4 को लेकर स्पष्ट तारीख और ठोस रोडमैप सामने नहीं आता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल TRE-4 परीक्षा को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है और यह देखना अहम होगा कि सरकार और BPSC अभ्यर्थियों की नाराजगी को दूर करने के लिए आगे क्या कदम उठाते हैं।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
