पटना में UGC नियम और 65% आरक्षण की मांग को लेकर बवाल, छात्रों पर पुलिस का लाठीचार्ज
पटना में बुधवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों को लागू करने और 65% आरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।
पटना में बुधवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों को लागू करने और 65% आरक्षण की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। इस घटना ने राज्य में शिक्षा और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
गांधी मैदान से शुरू हुआ प्रदर्शन
प्रदर्शन की शुरुआत सुबह गांधी मैदान के गेट नंबर 10 के पास हुई, जहां बड़ी संख्या में छात्र एकत्र हुए। यहां से छात्र राजभवन की ओर मार्च करने के लिए निकले थे। हालांकि, पुलिस ने उन्हें जेपी गोलंबर के पास बैरिकेडिंग कर रोक दिया।

पुलिस की इस कार्रवाई के बाद स्थिति अचानक बिगड़ गई। कई प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने लगे, जिससे पुलिस और छात्रों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई।
डाकबंगला चौराहा बना टकराव का केंद्र
आंदोलन ने उस समय और उग्र रूप ले लिया जब प्रदर्शनकारी डाकबंगला चौराहा तक पहुंच गए। यहां भी पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग की, लेकिन छात्र बैरिकेड पर चढ़ गए और सड़क पर बैठकर नारेबाजी करने लगे।
इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच हल्की नोकझोंक हुई, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ छात्रों को हल्की चोटें भी आईं, हालांकि प्रशासन की ओर से इस पर आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।
छात्र संगठनों की भागीदारी
इस प्रदर्शन में कई छात्र संगठन सक्रिय रूप से शामिल थे, जिनमें AISA और भीम सेना प्रमुख रहे। इनके समर्थन में राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता भी सड़कों पर उतरे।

माले नेता दिव्या गौतम भी अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुईं और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
छात्रों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि बिहार में UGC के नए नियमों को पूरी तरह लागू किया जाए। इसके साथ ही उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और पिछड़ा वर्ग (BC) के लिए 65% आरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
छात्र नेताओं का कहना है कि सामाजिक न्याय के सिद्धांत को मजबूत करने के लिए शिक्षा में आरक्षण की व्यवस्था का सही तरीके से लागू होना बेहद जरूरी है। उनका आरोप है कि कई विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में UGC के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे वंचित वर्गों को नुकसान हो रहा है।
एक प्रदर्शनकारी छात्र ने कहा, “हम अब कॉलेजों में अपमान नहीं सहेंगे। यह लड़ाई हमारे भविष्य की है। अगर अभी आवाज नहीं उठाएंगे, तो आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय होगा।”
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बढ़ा विवाद
इस मुद्दे को और जटिल बना दिया है सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने। 29 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भेदभाव रोकने से जुड़े UGC के नए नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

कोर्ट का कहना था कि इन नियमों के कुछ प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनके दुरुपयोग की संभावना हो सकती है। गौरतलब है कि UGC ने 2012 के नियमों में संशोधन करते हुए 13 जनवरी 2026 को नए दिशा-निर्देश जारी किए थे।
इन नए नियमों को लेकर छात्रों और शिक्षाविदों के बीच मतभेद बना हुआ है। एक वर्ग इन्हें जरूरी सुधार मानता है, जबकि दूसरा वर्ग इनके संभावित दुष्प्रभावों को लेकर चिंतित है।
प्रशासन की चुनौती और आगे का रास्ता
पटना में हुए इस प्रदर्शन और लाठीचार्ज ने राज्य प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर छात्रों की मांगें हैं, जो सामाजिक न्याय और समान अवसर की बात कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी प्रशासन की प्राथमिकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे का समाधान संवाद के जरिए ही संभव है। यदि सरकार और संबंधित संस्थाएं छात्रों के साथ बैठकर उनकी चिंताओं का समाधान निकालती हैं, तो स्थिति को शांत किया जा सकता है।
पटना में छात्रों पर हुआ लाठीचार्ज केवल एक कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह शिक्षा नीति, आरक्षण व्यवस्था और सामाजिक न्याय जैसे बड़े मुद्दों से जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और संबंधित संस्थाएं इस संवेदनशील मामले को किस तरह संभालती हैं और क्या छात्रों की मांगों पर कोई ठोस निर्णय लिया जाता है।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
