UPSC 2025 पर बड़ा पेच, क्रीमी लेयर मामले में सुप्रीम कोर्ट का दखल, OBC आरक्षण पर होगी सुनवाई

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UPSC 2025 पर बड़ा अपडेट, क्रीमी लेयर मामले में 17 सितंबर को सुनवाई

निष्कर्ष भारत संवाददाता, नई दिल्ली। UPSC 2025 के नतीजों और इसके बाद होने वाली सेवा आवंटन की प्रक्रिया को लेकर स्थिति फिलहाल पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। OBC क्रीमी लेयर के मानदंड से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च के फैसले पर केंद्र सरकार ने स्पष्टीकरण की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की इस याचिका पर विचार करने की सहमति जताते हुए सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने 17 सितंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

मामला सीधे तौर पर UPSC सिविल सेवा परीक्षा-2025 के चयनित अभ्यर्थियों की सेवा आवंटन प्रक्रिया से जुड़ा है। केंद्र सरकार का कहना है कि चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और वर्तमान में अनुशंसित UPSC अभ्यर्थियों की पोस्टिंग तथा सेवा आवंटन की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में पुराने नियमों के आधार पर पूरी हुई प्रक्रिया पर अचानक नए मानदंड लागू होने से व्यावहारिक परेशानी पैदा हो सकती है।

UPSC 2025 को लेकर सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने केंद्र सरकार की याचिका पर नोटिस जारी किया है। सरकार ने 11 मार्च को दिए गए उस फैसले के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है, जिसमें OBC क्रीमी लेयर के मानदंडों से जुड़े सवालों पर फैसला आया था।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र की ओर से अपनी दलील रखी। उन्होंने अदालत को बताया कि UPSC सिविल सेवा परीक्षा-2025 में चयनित उम्मीदवारों की पोस्टिंग और सेवा आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

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सरकार का कहना है कि यदि मार्च में दिए गए फैसले को इस चरण पर अचानक लागू किया जाता है तो चयन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और कई उम्मीदवारों के सामने असमंजस की स्थिति पैदा हो सकती है।

सरकार ने 958 उम्मीदवारों के लिए क्या कहा?

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि सिविल सेवा परीक्षा-2025 के 958 अनुशंसित उम्मीदवारों का सेवा आवंटन पुराने मानदंडों के आधार पर ही आगे बढ़ाने की अनुमति दी जाए।

सरकार की दलील है कि इन उम्मीदवारों ने जिस कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था को ध्यान में रखकर परीक्षा में हिस्सा लिया, चयन प्रक्रिया उसी के अनुसार पूरी हुई। परीक्षा के नोटिफिकेशन से लेकर अंतिम परिणाम तक पुरानी व्यवस्था लागू थी। ऐसे में चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमों में बदलाव लागू करने से उम्मीदवारों की स्थिति प्रभावित हो सकती है। सरकार इसी व्यावहारिक कठिनाई को देखते हुए अदालत से स्पष्ट निर्देश चाहती है।

UPSC चयन प्रक्रिया पर क्यों पड़ सकता है असर?

UPSC परीक्षा में चयन के बाद उम्मीदवारों को उनकी रैंक, वरीयता और उपलब्ध पदों के आधार पर अलग-अलग सेवाएं आवंटित की जाती हैं। वर्तमान मामले में सेवा आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

यदि OBC क्रीमी लेयर से जुड़े मानदंडों को लेकर मार्च के फैसले की व्याख्या बदलती है या उसे वर्तमान चयन प्रक्रिया पर लागू किया जाता है, तो सेवा आवंटन पर इसका असर पड़ सकता है। यही वजह है कि केंद्र सरकार ने मामले में तत्काल स्पष्टता की मांग की है।

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सरकार का जोर इस बात पर है कि 2025 की परीक्षा पूरी तरह उस समय लागू नियमों के अनुसार आयोजित हुई और उम्मीदवारों ने भी उन्हीं नियमों के आधार पर परीक्षा दी थी।

याचिकाकर्ताओं ने सरकार की याचिका पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकीलों ने केंद्र सरकार की याचिका की स्वीकार्यता पर प्रारंभिक आपत्ति जताई।

यानी मामले की सुनवाई में सबसे पहले यह सवाल भी उठेगा कि केंद्र की ओर से दाखिल स्पष्टीकरण वाली याचिका को इस रूप में स्वीकार किया जा सकता है या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस आपत्ति को भी संज्ञान में लिया है। अदालत ने कहा है कि याचिका की स्वीकार्यता के मुद्दे पर 17 सितंबर को विस्तार से सुनवाई की जाएगी।

17 सितंबर को होगी अहम सुनवाई

अब 17 सितंबर की तारीख इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। इसी दिन सुप्रीम कोर्ट याचिका की स्वीकार्यता और इससे जुड़े पक्षों की दलीलों पर विस्तार से विचार करेगा।

इससे पहले सभी संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करना होगा। अदालत के अगले आदेश से यह स्पष्ट हो सकता है कि 11 मार्च के फैसले का UPSC सिविल सेवा परीक्षा-2025 की चयन प्रक्रिया और सेवा आवंटन पर क्या प्रभाव पड़ेगा।nहालांकि, अंतिम स्थिति सुप्रीम कोर्ट के आगे के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।

OBC क्रीमी लेयर क्या है?

क्रीमी लेयर का संबंध अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC के अपेक्षाकृत संपन्न वर्ग से है। मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में OBC के सभी उम्मीदवारों को एक समान तरीके से आरक्षण का लाभ नहीं मिलता।

OBC नॉन-क्रीमी लेयर के पात्र उम्मीदवारों को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण का लाभ मिलता है। वहीं, क्रीमी लेयर के अंतर्गत आने वाले OBC उम्मीदवार आरक्षण के लाभ से बाहर होते हैं। क्रीमी लेयर की पहचान निर्धारित मानदंडों के आधार पर की जाती है। इसी व्यवस्था से जुड़े मानदंडों की व्याख्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट का 11 मार्च का फैसला मौजूदा विवाद का केंद्र बना हुआ है।

UPSC अभ्यर्थियों की नजर अब सुप्रीम कोर्ट पर

इस मामले का सबसे सीधा असर उन 958 अनुशंसित उम्मीदवारों पर पड़ सकता है, जिनके सेवा आवंटन की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि अंतिम रूप से उम्मीदवारों की सेवा आवंटन प्रक्रिया में क्या बदलाव होगा। फिलहाल केंद्र सरकार चाहती है कि UPSC CSE 2025 की चयन प्रक्रिया को उस समय लागू नियमों के आधार पर ही आगे बढ़ाया जाए। दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं ने सरकार की याचिका की स्वीकार्यता पर ही सवाल उठाया है।

ऐसे में 17 सितंबर की सुनवाई पूरे मामले के लिए अहम मानी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की अगली कार्रवाई से ही यह साफ होगा कि क्रीमी लेयर से जुड़े फैसले की व्याख्या और उसका प्रभाव UPSC सिविल सेवा परीक्षा-2025 के चयनित उम्मीदवारों पर किस तरह पड़ेगा।

Nishkarsh Bharat

पटना से राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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