विशाल भारद्वाज की ‘ओ रोमियो’ रिलीज: शाहिद कपूर-तृप्ति डिमरी स्टारर फिल्म उम्मीदों पर खरी उतरी या नहीं?

ओ रोमियो

13 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हुई विशाल भारद्वाज की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘ओ रोमियो’ लंबे समय से चर्चा और विवादों में रही। फिल्म में शाहिद कपूर, तृप्ति डिमरी, अविनाश तिवारी, नाना पाटेकर, फरीदा जलाल, दिशा पाटनी और तमन्ना भाटिया मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि नेशनल अवॉर्ड विनिंग एक्टर विक्रांत मैसी स्पेशल अपीयरेंस में नजर आते हैं।

13 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हुई विशाल भारद्वाज की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘ओ रोमियो’ लंबे समय से चर्चा और विवादों में रही। फिल्म में शाहिद कपूर, तृप्ति डिमरी, अविनाश तिवारी, नाना पाटेकर, फरीदा जलाल, दिशा पाटनी और तमन्ना भाटिया मुख्य भूमिकाओं में हैं, जबकि नेशनल अवॉर्ड विनिंग एक्टर विक्रांत मैसी स्पेशल अपीयरेंस में नजर आते हैं।

रिलीज से पहले फिल्म को लेकर विवाद भी हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘ओ रोमियो’ कथित तौर पर हुसैन उस्तरा की जिंदगी से प्रेरित बताई गई, जिस पर उनके परिवार की ओर से आपत्ति जताई गई। हालांकि इन विवादों के बीच फिल्म आखिरकार बड़े पर्दे पर आ चुकी है। अब सवाल यह है कि क्या ‘ओ रोमियो’ दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरती है?

ओ रोमियो की कहानी: गैंगस्टर से आशिक तक का सफर

फिल्म की कहानी एक सुपारी किलर रोमियो (शाहिद कपूर) के इर्द-गिर्द घूमती है। रोमियो बेफिक्र, बिंदास और खतरनाक जिंदगी जीता है। उसे किसी चीज का डर नहीं और ना ही किसी रिश्ते से मतलब। लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब उसकी जिंदगी में जूलियट (तृप्ति डिमरी) की एंट्री होती है।

जूलियट के आने के बाद रोमियो की दुनिया पूरी तरह बदल जाती है। एक खूंखार किलर धीरे-धीरे इश्क में डूब जाता है। लेकिन जैसा अक्सर ट्रैजिक लव स्टोरी में होता है, यहां भी प्यार का अंजाम आसान नहीं है। फिल्म के दूसरे हिस्से में कहानी का टोन बदल जाता है और इसमें क्लासिक ट्रेजेडी की झलक दिखाई देती है। कई जगह दर्शकों को ‘देवदास’ जैसी भावनात्मक गहराई महसूस होती है।

हालांकि कहानी में दम होने के बावजूद फिल्म की लंबाई और स्क्रीनप्ले इसे कमजोर बना देते हैं। कई सीन प्रभावी हैं, लेकिन पूरी फिल्म एकजुट होकर मजबूत प्रभाव नहीं छोड़ पाती।

एक्टिंग: जूलियट पड़ी रोमियो पर भारी

शाहिद कपूर ने एक बार फिर गुस्सैल, तीखे और इंटेंस किरदार को निभाया है। उनके अभिनय में ऊर्जा है, लेकिन यह अंदाज दर्शक पहले भी कई फिल्मों में देख चुके हैं। किरदार में नया पन कम नजर आता है।

वहीं तृप्ति डिमरी फिल्म की असली सरप्राइज पैकेज साबित होती हैं। उन्होंने जूलियट के किरदार में गहराई, संवेदनशीलता और रहस्य का शानदार संतुलन पेश किया है। कई समीक्षकों का मानना है कि फिल्म का टाइटल ‘ओ जूलियट’ होना चाहिए था, क्योंकि भावनात्मक रूप से कहानी उन्हीं के इर्द-गिर्द ज्यादा असरदार लगती है।

नाना पाटेकर हमेशा की तरह प्रभावशाली हैं। सीमित स्क्रीन टाइम में भी वह अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं। अविनाश तिवारी और अन्य कलाकारों ने ठीक-ठाक काम किया है, लेकिन फिल्म का फोकस मुख्य रूप से रोमियो और जूलियट पर ही बना रहता है। विक्रांत मैसी का स्पेशल अपीयरेंस छोटा लेकिन प्रभावशाली है।

निर्देशन: उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा जादू

विशाल भारद्वाज ने पहले ‘मकबूल’, ‘कमीने’, ‘इश्किया’ और ‘हैदर’ जैसी शानदार फिल्में दी हैं। ऐसे में दर्शकों की उम्मीदें ‘ओ रोमियो’ से काफी ज्यादा थीं। लेकिन यह फिल्म उनके पिछले कामों जैसी कसावट और गहराई नहीं ला पाती।

फिल्म कुछ हिस्सों में बेहतरीन लगती है—संवाद, बैकग्राउंड म्यूजिक और कुछ इमोशनल सीन प्रभावित करते हैं—लेकिन पूरी फिल्म एक दिशा में नहीं चलती। इंटरवल के बाद कहानी का टोन अचानक बदल जाता है, जिससे दर्शक थोड़ा कन्फ्यूज महसूस कर सकते हैं।

सबसे बड़ी समस्या इसकी लंबाई है। अगर फिल्म लगभग 25-30 मिनट छोटी होती, तो शायद इसका प्रभाव ज्यादा मजबूत होता।

ओ रोमियो वर्डिक्ट: देखें या छोड़ दें?

अगर आप शाहिद कपूर के फैन हैं तो यह फिल्म आपको उनका एक और इंटेंस अवतार दिखाएगी। तृप्ति डिमरी के प्रशंसकों के लिए यह फिल्म खास हो सकती है, क्योंकि उनका अभिनय इस फिल्म की जान है।

हालांकि अगर आप विशाल भारद्वाज की क्लासिक फिल्मों जैसी उम्मीद लेकर जाएंगे, तो शायद थोड़ी निराशा हाथ लग सकती है। ‘ओ रोमियो’ ना पूरी तरह गैंगस्टर ड्रामा बन पाती है और ना ही एक यादगार लव स्टोरी।

कुल मिलाकर ‘ओ रोमियो’ एक ऐसी फिल्म है जिसमें अच्छे तत्व मौजूद हैं, लेकिन वे बिखरे हुए हैं। शानदार स्टारकास्ट और मजबूत आधार होने के बावजूद फिल्म वह असर नहीं छोड़ पाती जिसकी उम्मीद की जा रही थी।

रेटिंग: 2.5/5

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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