थिरुवल्ला रैली में पीएम मोदी का विपक्ष पर हमला, ‘द केरल स्टोरी’, ‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘धुरंधर’ का किया जिक्र
केरल के थिरुवल्ला में आयोजित एनडीए की रैली में पीएम मोदी का संबोधन अब राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया है।
केरल के थिरुवल्ला में आयोजित एनडीए की रैली में पीएम मोदी का संबोधन अब राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गया है। अपने भाषण में उन्होंने कांग्रेस, यूडीएफ और एलडीएफ पर लगातार झूठ फैलाने का आरोप लगाया और इसे फिल्मों, कानूनों और नीतियों से जोड़ते हुए एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की।
“झूठ फैलाने की राजनीति” पर सीधा हमला
प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्षी दलों ने हर मुद्दे पर भ्रम फैलाने को अपनी रणनीति बना लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चाहे वह कानून हो या सामाजिक मुद्दा, विपक्ष जनता के बीच डर और गलत जानकारी फैलाने का काम करता है।
उन्होंने कहा,
“ये लोग हर चीज में झूठ बोलते हैं। चाहे CAA हो, UCC हो या फिर फिल्में—हर जगह इन्होंने भ्रम फैलाया।”
फिल्मों के जरिए नैरेटिव की लड़ाई
पीएम मोदी ने अपने भाषण में जिन फिल्मों का जिक्र किया—द केरल स्टोरी, द कश्मीर फाइल्स और धुरंधर—वे सभी किसी न किसी सामाजिक या ऐतिहासिक मुद्दे से जुड़ी रही हैं और रिलीज के समय व्यापक बहस का कारण बनीं।

प्रधानमंत्री का कहना था कि इन फिल्मों को लेकर विपक्ष ने उन्हें “झूठा” और “प्रचार” करार दिया, जबकि उनके मुताबिक ये फिल्में समाज के कुछ पहलुओं को सामने लाने का प्रयास थीं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान दर्शाता है कि अब सिनेमा सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि वैचारिक और राजनीतिक बहस का अहम हिस्सा बन चुका है।
‘धुरंधर’ पर खास फोकस
धुरंधर का जिक्र इस भाषण का सबसे नया और दिलचस्प पहलू रहा। निर्देशक आदित्य धर की इस फिल्म को दो भागों में रिलीज किया गया है।
इसमें रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना, आर. माधवन, संजय दत्त और अर्जुन रामपाल जैसे बड़े सितारे नजर आए हैं।

फिल्म में कंधार हाईजैक (1999) और 26/11 मुंबई हमलों जैसी घटनाओं से प्रेरित कहानी दिखाई गई है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों को छूती है।
‘द केरल स्टोरी’ और वैचारिक बहस
द केरल स्टोरी ने रिलीज के समय देशभर में तीखी बहस छेड़ दी थी। सुदीप्तो सेन द्वारा निर्देशित इस फिल्म में कथित तौर पर उन लड़कियों की कहानी दिखाई गई जो कट्टरपंथ के प्रभाव में ISIS से जुड़ गईं।
इस फिल्म में अदा शर्मा ने मुख्य भूमिका निभाई थी। इसके सीक्वल ने 2026 में इस बहस को और आगे बढ़ाया।
‘द कश्मीर फाइल्स’ का राजनीतिक संदर्भ
द कश्मीर फाइल्स, जिसे विवेक अग्निहोत्री ने निर्देशित किया, पहले ही राजनीतिक विमर्श का बड़ा हिस्सा बन चुकी है।

इस फिल्म ने 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों के पलायन के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर फिर से चर्चा में ला दिया था। इसमें अनुपम खेर और मिथुन चक्रवर्ती जैसे कलाकारों ने अहम भूमिका निभाई।
CAA, UCC और FCRA पर सियासी घमासान
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके लागू होने के बाद भी विपक्ष के दावों के मुताबिक कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा।
इसी तरह यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर उन्होंने गोवा का उदाहरण दिया, जहां यह पहले से लागू है।
साथ ही फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) को लेकर भी विपक्ष पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया।
केरल की राजनीति में संदेश
केरल में traditionally भाजपा की स्थिति सीमित रही है, जहां यूडीएफ और एलडीएफ का दबदबा रहा है। ऐसे में पीएम मोदी का यह भाषण सीधे तौर पर राज्य की राजनीतिक जमीन को प्रभावित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि फिल्मों और राष्ट्रीय मुद्दों को जोड़कर भाजपा एक व्यापक वैचारिक आधार तैयार करने की कोशिश कर रही है, खासकर उन मतदाताओं के बीच जो सांस्कृतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों से प्रभावित होते हैं।
निष्कर्ष: सिनेमा और राजनीति का बढ़ता मेल
थिरुवल्ला रैली का यह भाषण साफ संकेत देता है कि आने वाले समय में राजनीति और सिनेमा के बीच की दूरी और कम होगी।
जहां एक तरफ फिल्में सामाजिक और ऐतिहासिक मुद्दों को सामने ला रही हैं, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक दल उन्हें अपने-अपने नैरेटिव के अनुसार इस्तेमाल कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान इसी बदलते ट्रेंड का हिस्सा है, जहां फिल्मों के जरिए राजनीतिक संदेश देने की रणनीति अब खुलकर सामने आ रही है।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
