बिहार विधानसभा समितियों का गठन: विवादित और बाहुबली छवि वाले नेताओं को भी मिली अहम जिम्मेदारी
बिहार विधानसभा ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कुल 19 समितियों का गठन कर दिया है।
राज्यसभा वोटिंग विवाद के बाद कांग्रेस-RJD विधायकों को बड़ी जिम्मेदारी, बिहार विधानसभा समितियों में मिली जगह
बिहार विधानसभा ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कुल 19 समितियों का गठन कर दिया है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार की मंजूरी के बाद समितियों के अध्यक्षों और सदस्यों की आधिकारिक सूची जारी कर दी गई है। ये समितियां 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक कार्य करेंगी और राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
समितियों की भूमिका और महत्व
विधानसभा समितियां लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक अहम हिस्सा होती हैं। ये समितियां विभिन्न विभागों के कामकाज की समीक्षा करती हैं, नीतियों के क्रियान्वयन पर नजर रखती हैं और सरकार को आवश्यक सुझाव देती हैं। इससे शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
इस बार गठित समितियों में कई महत्वपूर्ण समितियां शामिल हैं, जैसे नियम समिति और सामान्य प्रयोजन समिति, जिनका सीधा संबंध विधानसभा की कार्यप्रणाली से होता है। नियम समिति की अध्यक्षता स्वयं स्पीकर प्रेम कुमार करेंगे, जो इसकी अहमियत को दर्शाता है।
विवादित विधायकों को मिली जिम्मेदारी
इस बार समितियों के गठन में कुछ ऐसे विधायकों को भी प्रमुख जिम्मेदारी दी गई है, जो हाल के दिनों में विवादों में रहे थे। राज्यसभा चुनाव के दौरान मतदान से दूरी बनाने वाले कांग्रेस विधायक मनोहर प्रसाद सिंह को एक समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह आरजेडी के विधायक फैसल रहमान को भी समिति की कमान सौंपी गई है।

इन नियुक्तियों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। विपक्ष इसे राजनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश मान रहा है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष इसे अनुभव और प्रतिनिधित्व के आधार पर लिया गया फैसला बता रहा है।
बाहुबली नेताओं की भी एंट्री
समितियों में बाहुबली छवि वाले नेताओं को भी शामिल किया गया है, जो इस गठन का एक चर्चित पहलू बन गया है। विधायक मनोरंजन सिंह उर्फ धूमल सिंह को पर्यटन उद्योग से जुड़ी समिति का चेयरमैन बनाया गया है।
वहीं मोकामा से विधायक अनंत कुमार सिंह को पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण समिति का सदस्य बनाया गया है। अनंत सिंह पहले भी कई मामलों को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं, ऐसे में उनकी इस समिति में नियुक्ति पर भी सवाल उठ रहे हैं।

वरिष्ठ नेताओं को अहम जिम्मेदारी
विधानसभा की सबसे महत्वपूर्ण समितियों में वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है। नियम समिति और सामान्य प्रयोजन समिति में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा और संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी को सदस्य बनाया गया है।

इन समितियों में इन नेताओं की मौजूदगी से यह स्पष्ट होता है कि सरकार इन समितियों के जरिए नीतिगत फैसलों और प्रशासनिक कार्यों पर मजबूत पकड़ बनाए रखना चाहती है।
राजनीतिक संदेश और रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार समितियों का गठन केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक राजनीतिक रणनीति भी है। जिन विधायकों को हाल में लेकर सवाल उठे थे, उन्हें जिम्मेदारी देकर नेतृत्व ने एक तरह से उन्हें मुख्यधारा में बनाए रखने का संकेत दिया है।
इसके साथ ही बाहुबली छवि वाले नेताओं को शामिल कर क्षेत्रीय संतुलन और राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश भी देखी जा रही है। यह कदम आने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर भी उठाया गया माना जा रहा है।
आगे की राह
अब इन समितियों की कार्यशैली पर सभी की नजर रहेगी। यदि ये समितियां प्रभावी ढंग से काम करती हैं, तो यह न केवल शासन व्यवस्था को मजबूत बनाएंगी, बल्कि सरकार की छवि को भी सकारात्मक दिशा दे सकती हैं।
हालांकि विवादित चेहरों की मौजूदगी के कारण इन समितियों की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठ सकते हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि ये नेता अपनी जिम्मेदारियों को किस तरह निभाते हैं और जनता की अपेक्षाओं पर कितना खरे उतरते हैं।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
