यूपी में पोस्टर पॉलिटिक्स: अखिलेश को ‘विलेन’ दिखाया, योगी को ‘धुरंधर CM’

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उत्तर प्रदेश की राजनीति इन दिनों फिल्म धुरंधर 2 को लेकर गरमा गई है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति इन दिनों फिल्म धुरंधर 2 को लेकर गरमा गई है। माफिया डॉन अतीक अहमद से मिलते-जुलते किरदार को फिल्म में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से जोड़कर दिखाए जाने पर विवाद गहराता जा रहा है।यूपी में समाजवादी पार्टी (सपा) समेत विपक्षी दल इसे सत्ताधारी दल का “प्रोपेगेंडा” बता रहे हैं, वहीं भाजपा समर्थक इसे वास्तविक घटनाओं से प्रेरित बता रहे हैं।

होर्डिंग्स से सियासी जंग तेज

इसी विवाद के बीच लखनऊ समेत यूपी के करीब 10 जिलों में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ विवादित होर्डिंग्स लगाए गए हैं। इन होर्डिंग्स में एक तरफ अखिलेश यादव को फिल्म ‘धुरंधर’ के विलेन ‘रहमान डकैत’ की तरह दर्शाया गया है, जबकि दूसरी तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कन्या पूजन करते हुए तस्वीर लगाई गई है।

होर्डिंग पर सवाल लिखा गया है—“आपको क्या चाहिए?”
एक ओर “अखिलेश का ल्यारी राज” लिखा गया है, जबकि दूसरी ओर “धुरंधर सीएम” लिखकर योगी सरकार को कानून-व्यवस्था के प्रतीक के रूप में दिखाया गया है।

‘यूथ अगेंस्ट माफिया’ ने लगाए पोस्टर

इन होर्डिंग्स को ‘यूथ अगेंस्ट माफिया’ नामक संस्था द्वारा लगवाया गया है। राजधानी लखनऊ के हजरतगंज, गोमती नगर, इंदिरा नगर, हनुमान सेतु समेत कई प्रमुख चौराहों पर ये पोस्टर लगाए गए हैं। इसके अलावा अमेठी, सीतापुर, हरदोई, जौनपुर, बाराबंकी, आजमगढ़ और नोएडा जैसे जिलों में भी इनका प्रसार किया गया है।

होर्डिंग्स में अखिलेश यादव के शासनकाल (2012-2017) के दौरान हुए मुजफ्फरनगर और शामली दंगों की खबरों की कटिंग लगाई गई है। वहीं दूसरी तरफ योगी सरकार के दौरान माफियाओं पर हुई कार्रवाई—जैसे अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी के खिलाफ कदम—को प्रमुखता से दिखाया गया है।

फिल्म के किरदार पर विवाद

19 मार्च को रिलीज हुई फिल्म ‘धुरंधर-2’ में ‘आतिफ अहमद’ नाम का किरदार दिखाया गया है, जिसे अतीक अहमद से प्रेरित बताया जा रहा है। फिल्म में इस किरदार को ISI एजेंट और नकली नोटों के नेटवर्क से जुड़ा बताया गया है। यही बिंदु विवाद का मुख्य कारण बना हुआ है।

सपा नेताओं का आरोप है कि फिल्म के जरिए विपक्षी नेताओं को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। अखिलेश यादव ने इसे राजनीतिक एजेंडा बताते हुए कहा कि फिल्म का उद्देश्य जनता को गुमराह करना है।

वहीं, गाजीपुर से सपा सांसद अफजाल अंसारी ने भी आपत्ति जताते हुए कहा कि एक दिवंगत व्यक्ति को इस तरह ISI एजेंट के रूप में दिखाना गलत और भड़काऊ है।

भाजपा नेताओं का समर्थन

दूसरी ओर भाजपा नेताओं ने फिल्म का समर्थन किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में फिल्म की तारीफ करते हुए कहा कि आज की फिल्में वास्तविकता को सामने ला रही हैं, जबकि पहले सच को छिपाया जाता था।

भाजपा नेता और पूर्व आईपीएस अधिकारी डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला ने दावा किया कि अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और बिहार के शहाबुद्दीन के बीच करीबी संबंध थे और ये लोग आपराधिक नेटवर्क के जरिए नकली नोटों के कारोबार में शामिल थे।

राजनीति और सिनेमा का टकराव

‘धुरंधर-2’ को लेकर विवाद अब सिर्फ फिल्म तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सीधे राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन गया है। सिनेमा और राजनीति के इस टकराव ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या फिल्मों को राजनीतिक नैरेटिव गढ़ने का माध्यम बनाया जा रहा है?

विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी माहौल में इस तरह के मुद्दे जनमत को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं, सोशल मीडिया पर भी फिल्म और होर्डिंग्स को लेकर तीखी बहस जारी है।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश में ‘धुरंधर-2’ ने एक नई सियासी बहस को जन्म दे दिया है। एक ओर इसे सच्चाई दिखाने वाली फिल्म बताया जा रहा है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे प्रोपेगेंडा करार दे रहा है।

होर्डिंग्स के जरिए शुरू हुई यह राजनीतिक जंग आने वाले समय में और तेज हो सकती है। फिलहाल, फिल्म, माफिया और राजनीति के इस त्रिकोण ने यूपी की सियासत को गर्मा दिया है और जनता के बीच एक बड़ा मुद्दा बन गया है।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट