केदारनाथ में मौसम की मार, बादल फटने से हुआ भूस्खलन, 2 की मौत
केदारनाथ पैदल मार्ग पर बादल फटने से मलबा और बोल्डर गिरे
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (रुद्रप्रयाग)। केदारनाथ में बादल फटा और इसके बाद पैदल यात्रा मार्ग पर भारी भूस्खलन होने से यात्रियों की आवाजाही कुछ समय के लिए प्रभावित हो गई। रुद्रप्रयाग जिले में शुक्रवार तड़के चिरबासा हेलीपैड के समीप अचानक मौसम बदला और बादल फटने के बाद करीब 150 मीटर क्षेत्र में मलबा और बड़े-बड़े बोल्डर पैदल मार्ग पर आ गए। घटना के बाद सुरक्षा के मद्देनजर केदारनाथ धाम की पैदल यात्रा कुछ देर के लिए रोक दी गई।
हालांकि, प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमों की कार्रवाई के बाद पैदल यात्रियों की आवाजाही दोबारा शुरू कर दी गई है। एहतियात के तौर पर घोड़े-खच्चरों की आवाजाही फिलहाल बंद रखी गई है। प्रशासन की टीमें मार्ग से मलबा और बोल्डर हटाने में जुटी हैं। अधिकारियों के मुताबिक, घटना में फिलहाल किसी जनहानि की सूचना नहीं है।
केदारनाथ पैदल मार्ग पर अचानक बदला मौसम
रुद्रप्रयाग जिले में शुक्रवार तड़के मौसम ने अचानक करवट ली। केदारनाथ धाम जाने वाले पैदल मार्ग पर चिरबासा हेलीपैड के पास बादल फटने के बाद तेज बहाव और भूस्खलन की स्थिति बनी। देखते ही देखते बड़ी मात्रा में मलबा और बोल्डर मार्ग पर आ गए।
भूस्खलन का दायरा करीब 150 मीटर बताया गया है। मार्ग पर मलबा आने के कारण यात्रियों की आवाजाही को तत्काल रोक दिया गया। घटना के बाद प्रशासन को इसकी सूचना दी गई और संबंधित टीमें मौके के लिए रवाना हुईं।

केदारनाथ यात्रा मार्ग पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्र से होकर गुजरता है। ऐसे में मौसम में अचानक बदलाव और भारी बारिश के दौरान भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने कुछ समय के लिए आवाजाही रोकने का फैसला लिया।
मलबा और बड़े बोल्डर हटाने में जुटीं टीमें
घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंचीं। पैदल मार्ग को दोबारा सुरक्षित बनाने के लिए मलबा और बड़े पत्थरों को हटाने का काम शुरू किया गया।
आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार के मुताबिक, घटना में अभी तक किसी तरह की जनहानि की सूचना नहीं है। अधिकारियों ने मौके की स्थिति का जायजा लिया और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की।
मार्ग को साफ करने के साथ ही पूरे इलाके पर निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन की कोशिश है कि यात्रियों को किसी तरह के जोखिम का सामना न करना पड़े और यात्रा मार्ग को सुरक्षित स्थिति में ही संचालित किया जाए।
केदारनाथ यात्रा फिर शुरू, घोड़े-खच्चर रोके गए
स्थिति का आकलन करने के बाद पैदल यात्रियों की आवाजाही शुरू कर दी गई। हालांकि, एहतियात के तौर पर घोड़े-खच्चरों को मार्ग पर चलने की अनुमति फिलहाल नहीं दी गई है।
यात्रा मार्ग पर मलबा और बोल्डर हटाने का काम जारी रहने के कारण प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। यात्रियों की आवाजाही शुरू करने से पहले मार्ग की स्थिति का जायजा लिया गया।
प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मौसम में दोबारा बदलाव होने की स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
केदारनाथ जाने वाले यात्रियों से सतर्क रहने की अपील
पहाड़ी इलाकों में मौसम तेजी से बदलने के कारण यात्रियों के सामने अचानक खतरे की स्थिति बन सकती है। बादल फटने और भूस्खलन जैसी घटनाओं के दौरान पैदल मार्ग पर मलबा आने से आवाजाही बाधित हो जाती है।
प्रशासन ने यात्रियों से सतर्कता बरतने और सुरक्षित तरीके से यात्रा करने की अपील की है। यात्रियों को मौसम और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
निष्पक्ष ख़बर देखिये हमारे यूट्यूब चैनल पर: IIT Patna में पुलिस और दिग्गजों की मौजूदगी .. शराब और शबाब’ वाली महफिल का सच क्या ?
अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जनहानि की कोई सूचना नहीं है। इसके बावजूद संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
बदरीनाथ में तप्त कुंड में दो महिलाओं की मौत
इसी बीच उत्तराखंड के बदरीनाथ धाम से एक अलग घटना सामने आई है। यहां मंदिर के पास तप्त कुंड में स्नान के दौरान राजस्थान की दो बुजुर्ग महिला तीर्थयात्रियों की मौत हो गई।
पुलिस के अनुसार, घटना शुक्रवार सुबह की है। दोनों महिलाएं तप्त कुंड में स्नान कर रही थीं। इसी दौरान दोनों अचानक बेहोश हो गईं। घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची टीम ने दोनों को एंबुलेंस सेवा 108 के जरिए अस्पताल पहुंचाया।
अस्पताल में चिकित्सकों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने घटना की जानकारी जुटाने के साथ आवश्यक कार्रवाई शुरू की है।
एक ही दिन मौसम और हादसों से बढ़ी चिंता
केदारनाथ पैदल मार्ग पर बादल फटने के बाद भूस्खलन और बदरीनाथ में तप्त कुंड में दो महिला तीर्थयात्रियों की मौत की घटनाओं ने तीर्थयात्रा के दौरान सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि दोनों घटनाएं अलग-अलग हैं और इनके कारण भी अलग हैं।

केदारनाथ मार्ग पर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पैदल यात्रियों की आवाजाही बहाल कर दी है, जबकि घोड़े-खच्चरों की आवाजाही रोककर सावधानी बरती जा रही है। दूसरी ओर, बदरीनाथ की घटना में पुलिस और संबंधित टीमों ने अस्पताल पहुंचाकर महिलाओं की जांच कराई।
उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम लगातार बदलता रहता है। ऐसे में तीर्थयात्रियों के लिए स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना और मौसम की स्थिति को देखते हुए यात्रा करना जरूरी है। फिलहाल केदारनाथ पैदल मार्ग पर राहत और मार्ग साफ करने का काम जारी है तथा प्रशासन पूरे क्षेत्र की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
अमन कुमार की रिपोर्ट
