ट्रेनों के खाने पर रेलवे सख्त, CCTV और AI से होगी निगरानी, गड़बड़ी करने वालों की खैर नहीं

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ट्रेनों के खाने की गुणवत्ता पर अब CCTV और AI से रखी जाएगी नजर

निष्कर्ष भारत संवाददाता, नई दिल्ली। ट्रेनों के खाने की निगरानी को लेकर रेलवे ने व्यवस्था और सख्त करने की तैयारी शुरू कर दी है। ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा को लेकर अब केवल नियमित निरीक्षण पर निर्भर रहने के बजाय तकनीक का सहारा लिया जाएगा। रेलवे बोर्ड ने कैटरिंग सेंटर, बेस किचन, कैंटीन और जन आहार केंद्रों की निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है।

इसके तहत ट्रेनों में CCTV कैमरों और AI आधारित तकनीक के जरिए भोजन तैयार होने से लेकर उसे स्टोर करने तक की प्रक्रिया पर नजर रखने की व्यवस्था की जा रही है। पूर्व मध्य रेल के प्रमुख स्टेशनों और महत्वपूर्ण ट्रेनों में भी इसका असर दिखाई देने लगा है। पटना जंक्शन, दानापुर, पाटलिपुत्र और राजेंद्रनगर टर्मिनल जैसे प्रमुख स्टेशनों पर भोजन तैयार करने वाली व्यवस्थाओं की निगरानी बढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही महत्वपूर्ण ट्रेनों की पेंट्री कार में भी साफ-सफाई और भोजन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

ट्रेनों के खाने पर अब कैमरे की नजर

ट्रेनों में नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा CCTV निगरानी है। रेलवे की कोशिश है कि बेस किचन और कैटरिंग सेंटर में होने वाली गतिविधियों की वास्तविक स्थिति अधिकारियों तक पहुंचती रहे। इसके लिए हाई-रेजोल्यूशन कैमरों की मदद ली जा रही है।

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ट्रेनों में निगरानी केवल खाना पकाने वाली जगह तक सीमित नहीं रहेगी। कच्चे खाद्य पदार्थ कहां और किस स्थिति में रखे गए हैं, स्टोरेज एरिया में सफाई कैसी है और भोजन तैयार करने के दौरान स्वच्छता के मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, इन सभी पहलुओं पर नजर रखी जाएगी।

इस व्यवस्था से रेलवे को उन कमियों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जो सामान्य निरीक्षण के दौरान सामने नहीं आ पाती हैं। कैमरों के जरिए अधिकारियों को किचन की स्थिति की अधिक वास्तविक तस्वीर मिल सकेगी।

AI पकड़ेगा किचन की गड़बड़ी

रेलवे अब कैटरिंग व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल भी बढ़ा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसी गड़बड़ियों की पहचान करना है, जिनका यात्रियों के स्वास्थ्य और भोजन की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ सकता है।

AI आधारित निगरानी व्यवस्था किचन में चूहे, कॉकरोच या अन्य कीड़े-मकोड़े जैसी स्थितियों की पहचान कर अलर्ट जारी कर सकती है। इसके बाद संबंधित अधिकारियों तक सूचना पहुंचाई जा सकेगी, ताकि समस्या को समय रहते दूर किया जा सके। रेलवे की इस पहल का मकसद केवल घटना सामने आने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि संभावित समस्या की पहचान कर तुरंत सुधार करना है। इससे किचन में स्वच्छता से जुड़ी लापरवाही लंबे समय तक छिपी रहने की संभावना कम होगी।

रसोई से स्टोरेज तक ट्रेनों के खाने की निगरानी

भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए खाद्य सामग्री के स्टोरेज पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कच्चे माल के रखरखाव में लापरवाही होने पर भोजन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए रेलवे की नई व्यवस्था में स्टोरेज एरिया को भी निगरानी के दायरे में लाया जा रहा है।

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कैमरों के माध्यम से यह देखा जा सकेगा कि खाद्य सामग्री किस तरह रखी गई है और किचन में काम करने वाले कर्मचारी स्वच्छता संबंधी नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं। भोजन तैयार करने की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखने से रेलवे को कैटरिंग एजेंसियों की कार्यप्रणाली का आकलन करने में भी मदद मिलेगी।

रोटी और पराठे की गुणवत्ता भी जांच के दायरे में

रेलवे बोर्ड ने रोटी और पराठा तैयार करने की प्रक्रिया की समीक्षा के निर्देश भी दिए हैं। यात्रियों को परोसे जाने वाले भोजन में गुणवत्ता और एकरूपता बनाए रखना रेलवे की प्राथमिकताओं में शामिल है।

इसलिए यह देखा जाएगा कि रोटी और पराठे निर्धारित मानकों के अनुसार तैयार हो रहे हैं या नहीं। भोजन की तैयारी, पकाने की प्रक्रिया और उसे यात्रियों तक पहुंचाने के दौरान जरूरी मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।

संपूर्ण क्रांति जैसी ट्रेनों पर भी फोकस

पूर्व मध्य रेल क्षेत्र में पटना जंक्शन, दानापुर, पाटलिपुत्र और राजेंद्रनगर टर्मिनल जैसे प्रमुख स्टेशनों के अलावा महत्वपूर्ण ट्रेनों की पेंट्री कार भी निगरानी के दायरे में रहेगी। संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनों में यात्रियों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता पर विशेष नजर रखने की तैयारी है।

रेलवे की कोशिश है कि जिस जगह से भोजन तैयार होकर यात्रियों तक पहुंचता है, उस पूरी श्रृंखला में किसी स्तर पर लापरवाही न हो। इसके लिए तकनीकी निगरानी के साथ मानवीय निरीक्षण व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।

आईआरसीटीसी वॉर रूम में हुई समीक्षा

कैटरिंग व्यवस्था में सुधार को लेकर रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष सतीश कुमार की अध्यक्षता में आईआरसीटीसी वॉर रूम की समीक्षा बैठक में भी चर्चा हुई। बैठक में भोजन की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया। निर्देश दिया गया है कि जहां भी लापरवाही सामने आए, वहां संबंधित एजेंसी के खिलाफ नोटिस जारी करने के साथ सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। गंभीर या लगातार सामने आने वाली कमियों की स्थिति में दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

अनंतपुर के किचन की निगरानी के बाद सख्ती

दक्षिण मध्य रेलवे के अनंतपुर स्थित एक किचन की वीडियो निगरानी के दौरान सामने आई स्थिति ने भी कैटरिंग व्यवस्था की निगरानी को लेकर रेलवे का ध्यान खींचा। इसके बाद सुधार के निर्देश दिए गए। इस घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि रेलवे अब कागजी निरीक्षण के बजाय रियल-टाइम मॉनिटरिंग पर ज्यादा भरोसा कर रहा है। इसका फायदा यह होगा कि अधिकारियों को किचन की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिलती रहेगी और कमियों पर तेजी से कार्रवाई की जा सकेगी।

रेल मदद पर शिकायत, फोटो भी भेज सकेंगे यात्री

यात्रियों की शिकायतों को भी नई निगरानी व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाया गया है। अगर किसी यात्री को ट्रेन या स्टेशन पर खराब, बासी या अस्वच्छ भोजन मिलता है तो वह रेल मदद के जरिए शिकायत दर्ज करा सकता है। शिकायत के साथ फोटो साझा करने की सुविधा भी यात्रियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। इससे शिकायत की प्रकृति समझने और संबंधित कैटरिंग एजेंसी तक मामला पहुंचाने में आसानी होगी।

शिकायतों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के जरिए रेलवे समस्या वाले स्थान की पहचान कर कार्रवाई की प्रक्रिया तेज करने की कोशिश कर रहा है। इससे यात्रियों को शिकायत के समाधान के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा, ऐसी उम्मीद है।

लापरवाह कैटरिंग एजेंसियों पर कार्रवाई

रेलवे ने कैटरिंग व्यवस्था की जांच करने वाली थर्ड-पार्टी इंस्पेक्शन एजेंसियों की जवाबदेही बढ़ाने का भी फैसला किया है। अब केवल निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करना पर्याप्त नहीं होगा। किचन में मिली कमियों और उसके बाद की गई कार्रवाई का डिजिटल रिकॉर्ड भी रखना होगा। लगातार खराब प्रदर्शन करने वाली एजेंसियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य निरीक्षण प्रक्रिया को जवाबदेह बनाना है, ताकि कमी सामने आने के बाद उसके सुधार की जिम्मेदारी भी तय हो।

तकनीक से बदल सकती है ट्रेनों की कैटरिंग व्यवस्था

रेलवे की नई पहल का असर सीधे यात्रियों के अनुभव पर पड़ सकता है। CCTV निगरानी, AI आधारित अलर्ट, डिजिटल शिकायत व्यवस्था और कैटरिंग एजेंसियों की जवाबदेही को एक साथ लागू करने से भोजन की गुणवत्ता पर नियंत्रण मजबूत होने की उम्मीद है। हालांकि तकनीक के इस्तेमाल के साथ नियमित मानवीय निरीक्षण भी जरूरी रहेगा। कैमरे और AI समस्या की पहचान में मदद कर सकते हैं, लेकिन समय पर सुधार और जिम्मेदारी तय करना संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों की भूमिका पर निर्भर करेगा।

फिलहाल रेलवे का लक्ष्य साफ है कि यात्रियों को ट्रेनों में स्वच्छ और बेहतर गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराया जाए। आने वाले समय में निगरानी व्यवस्था का विस्तार होने के साथ कैटरिंग सेंटर, बेस किचन और पेंट्री कार में होने वाली गतिविधियों पर नजर और मजबूत हो सकती है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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