पटना यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट एकजुट, फीस वृद्धि व पेपर लीक को लेकर छात्र भूख हड़ताल पर बैठे, VC को हटाने की मांग
पटना यूनिवर्सिटी में छात्रों की भूख हड़ताल, VC हटाने की मांग
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। पटना यूनिवर्सिटी भूख हड़ताल को लेकर सोमवार से छात्र आंदोलन पर बैठ गए हैं। एलएलबी प्रवेश परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने का आरोप, पीजी पाठ्यक्रमों में फीस वृद्धि, पटना यूनिवर्सिटी में MFA की पढ़ाई अब तक शुरू नहीं होने और अन्य शैक्षणिक व लोकतांत्रिक मांगों को लेकर AISF के छात्रों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की है। छात्र पटना यूनिवर्सिटी के सीनेट हॉल के बाहर बैठकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन लंबे समय से उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है। आंदोलनकारियों ने 10 सूत्री मांगों को सामने रखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। इससे पहले AISF की ओर से इन मुद्दों को लेकर विरोध मार्च भी निकाला जा चुका है।
पटना यूनिवर्सिटी में सीनेट हॉल के बाहर छात्रों का धरना
AISF से जुड़े छात्र सोमवार से पटना यूनिवर्सिटी के सीनेट हॉल के बाहर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई।

छात्र नेता बिट्टू भारद्वाज ने कहा कि एलएलबी प्रवेश परीक्षा में प्रश्नपत्र बाहर आने की घटना ने परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनके मुताबिक, परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद प्रश्नपत्र विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुपों में प्रसारित होने लगा था। इसकी जानकारी तत्काल कुलपति, डीन और परीक्षा नियंत्रक को दी गई थी।
एलएलबी परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक को लेकर सवाल
छात्र नेता बिट्टू भारद्वाज का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रश्नपत्र बाहर आने की बात स्वीकार की, लेकिन परीक्षा को रद्द कर दोबारा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से परीक्षा कराने की मांग पर सहमति नहीं दी। छात्रों का कहना है कि प्रवेश परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
AISF नेताओं के मुताबिक, परीक्षा को लेकर उठे सवालों का उचित समाधान नहीं होने से छात्रों में नाराजगी बढ़ी है। संगठन का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि प्रश्नपत्र लीक होने की पुष्टि होती है तो परीक्षा को रद्द कर फिर से आयोजित किया जाना चाहिए।
पटना यूनिवर्सिटी में फीस वृद्धि का भी विरोध
छात्रों के आंदोलन का दूसरा प्रमुख मुद्दा पीजी पाठ्यक्रमों में हुई फीस वृद्धि है। AISF का आरोप है कि पीजी में व्यापक स्तर पर फीस बढ़ाई गई है, जिससे छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। संगठन ने बढ़ी हुई फीस को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
छात्रों का कहना है कि उच्च शिक्षा को छात्रों के लिए सुलभ और किफायती बनाया जाना चाहिए। फीस में अचानक बढ़ोतरी से आर्थिक रूप से कमजोर और सामान्य परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसी वजह से AISF ने फीस वृद्धि को वापस लेने की मांग को अपने आंदोलन की प्रमुख मांगों में शामिल किया है।
MFA की पढ़ाई शुरू नहीं होने पर नाराजगी
पटना यूनिवर्सिटी में MFA की पढ़ाई अब तक शुरू नहीं होने का मुद्दा भी छात्रों के आंदोलन में प्रमुखता से उठाया गया है। AISF ने विश्वविद्यालय प्रशासन से MFA पाठ्यक्रम की पढ़ाई जल्द शुरू कराने की मांग की है।
छात्रों का कहना है कि नए और रोजगार से जुड़े पाठ्यक्रमों को समय पर शुरू करना विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी है। MFA की पढ़ाई में देरी से संबंधित विद्यार्थियों के भविष्य और शैक्षणिक अवसर प्रभावित हो सकते हैं। संगठन ने इस दिशा में तत्काल कदम उठाने की मांग की है।
सेंट्रल लाइब्रेरी को 24 घंटे खोलने की मांग
छात्रों ने पटना यूनिवर्सिटी की सेंट्रल लाइब्रेरी को 24×7 शुरू करने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र हैं जिन्हें पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए नियमित रूप से लाइब्रेरी की जरूरत होती है।
AISF का तर्क है कि यदि सेंट्रल लाइब्रेरी को 24 घंटे उपलब्ध कराया जाता है तो छात्रों को अध्ययन के लिए बेहतर सुविधा मिल सकती है। खासकर हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।
पटना यूनिवर्सिटी के कुलपति को हटाने की मांग
AISF पटना जिला सचिव मीर सैफ अली ने कहा कि संगठन की दस सूत्री मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की गई है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द समाधान करने की अपील की।
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संगठन ने पटना यूनिवर्सिटी के कुलपति को तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग भी की है। AISF नेताओं ने कुलपति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, ये आरोप संगठन की ओर से लगाए गए हैं और इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है।
छात्र नेताओं ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती है तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उनका कहना है कि छात्रों की शैक्षणिक समस्याओं के साथ लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों का भी समाधान जरूरी है।
दस सूत्री मांगों को लेकर आंदोलन
AISF की ओर से आंदोलन के तहत रखी गई प्रमुख मांगों में एलएलबी प्रवेश परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक की निष्पक्ष जांच, परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा आयोजित करना, पीजी में बढ़ी फीस वापस लेना और MFA की पढ़ाई तत्काल शुरू करना शामिल है।

इसके अलावा सेंट्रल लाइब्रेरी को 24×7 खोलने, विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने और अन्य शैक्षणिक व लोकतांत्रिक मांगों का जल्द समाधान करने की मांग की गई है।
छात्रों ने साफ किया है कि इन मुद्दों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार किया जाएगा। यदि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती है तो आंदोलन को आगे बढ़ाने की चेतावनी दी गई है।
भूख हड़ताल से बढ़ा विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव
पटना यूनिवर्सिटी में छात्रों के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठने से विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। फिलहाल छात्रों का आंदोलन किन परिस्थितियों में आगे बढ़ता है और विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी मांगों पर क्या कदम उठाता है, इस पर सभी की नजर है।
छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल एक परीक्षा या फीस से जुड़ा नहीं है, बल्कि विश्वविद्यालय में बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था, पारदर्शिता और छात्रों के अधिकारों से संबंधित है। वहीं, प्रशासन की ओर से मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
अमन कुमार की रिपोर्ट
