बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत, भाजपा का गढ़ टूटा; राजद तीसरे स्थान पर, जमानत भी जब्त

प्रशांत किशोर

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जनसुराज के प्रशांत किशोर ने भाजपा के नीरज कुमार को 19,324 वोटों से हराकर बड़ी जीत दर्ज की

बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव ने बड़ा संदेश दिया है। जनसुराज के सूत्रधार और प्रत्याशी प्रशांत किशोर ने भाजपा के मजबूत गढ़ माने जाने वाले बांकीपुर में शानदार जीत दर्ज करते हुए राज्य की राजनीति में नया समीकरण खड़ा कर दिया है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार को 19,324 मतों के अंतर से हराया, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की प्रत्याशी रेखा कुमारी तीसरे स्थान पर रहीं और अपनी जमानत भी नहीं बचा सकीं।

पटना के एएन कॉलेज स्थित मतगणना केंद्र में सोमवार को 32 राउंड तक चली मतगणना के बाद निर्वाचन अधिकारियों ने प्रशांत किशोर को विजयी घोषित किया। अंतिम परिणाम के अनुसार प्रशांत किशोर को 64,151 वोट मिले, जबकि भाजपा के नीरज कुमार को 44,827 मत प्राप्त हुए। राजद की प्रत्याशी रेखा कुमारी को केवल 14,273 वोट मिले।

भाजपा के गढ़ में जनसुराज की बड़ी सेंध

बांकीपुर लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसी सीट से राजद की रेखा कुमारी को 51,936 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। ऐसे में इस उपचुनाव में भाजपा की हार को केवल एक सीट का नुकसान नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

सबसे बड़ा झटका राजद को भी लगा है। पिछले चुनाव में मुख्य मुकाबले में रही पार्टी इस बार तीसरे स्थान पर पहुंच गई और उसकी उम्मीदवार जमानत बचाने लायक वोट भी हासिल नहीं कर सकीं। इससे स्पष्ट है कि इस उपचुनाव में मुकाबला पूरी तरह भाजपा और जनसुराज के बीच सिमट गया।

वोट प्रतिशत में बड़ा बदलाव

उपचुनाव के नतीजों ने मतदाताओं के रुझान में बड़ा बदलाव भी दिखाया। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव की तुलना में भाजपा के वोट प्रतिशत में 28.26 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि राजद का वोट शेयर 18.60 प्रतिशत घट गया। दूसरी ओर जनसुराज के वोट प्रतिशत में 44.31 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव केवल सत्ता विरोधी मतदान का परिणाम नहीं है, बल्कि प्रशांत किशोर के संगठनात्मक अभियान और स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित चुनाव प्रचार का भी प्रभाव है।

2010 के बाद पहली बार ऐसा परिणाम

बांकीपुर विधानसभा सीट के चुनावी इतिहास में यह परिणाम कई कारणों से खास माना जा रहा है। वर्ष 2010 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब विजेता उम्मीदवार को कुल वैध मतों का 50 प्रतिशत से कम वोट मिला। वहीं पिछले दो दशकों में यह सबसे कम जीत का अंतर भी माना जा रहा है। इससे साफ संकेत मिलता है कि मतदाताओं के बीच त्रिकोणीय मुकाबले के बावजूद राजनीतिक ध्रुवीकरण का नया स्वरूप सामने आया है।

दिग्गज नेताओं के इलाकों में भी मिली बढ़त

मतगणना की शुरुआत से ही प्रशांत किशोर लगातार बढ़त बनाए रहे। केवल तीसरे राउंड में जीत का अंतर सबसे कम रहा, लेकिन उसके बाद उन्होंने लगातार अपनी बढ़त बढ़ाई। राजद की प्रत्याशी पूरे चुनाव के दौरान तीसरे स्थान पर ही बनी रहीं।

दिलचस्प बात यह रही कि पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद रविशंकर प्रसाद, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. सी.पी. ठाकुर, बिहार सरकार के मंत्री रामकृपाल यादव तथा अशोक चौधरी के मोहल्लों से जुड़े मतदान केंद्रों पर भी जनसुराज को बढ़त मिली। इसे भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध के रूप में देखा जा रहा है।

मतगणना केंद्र पर बदला माहौल

मतगणना के शुरुआती राउंड से ही प्रशांत किशोर की बढ़त स्पष्ट होने लगी थी। 20वें राउंड के बाद मतगणना केंद्र के बाहर भाजपा और राजद समर्थकों की भीड़ धीरे-धीरे कम होने लगी। वहीं जनसुराज के समर्थकों में उत्साह बढ़ता गया और वे पीला गुलाल लेकर जीत का जश्न मनाने की तैयारी में जुट गए।

निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार सामान्य तौर पर मतगणना 31 राउंड में पूरी होनी थी, लेकिन मतदान के दौरान एक बैलेट यूनिट में आई तकनीकी खराबी के कारण उससे जुड़े मतदान की अलग से गणना करनी पड़ी। इसी वजह से कुल 32 राउंड में मतगणना पूरी की गई।

प्रशांत किशोर ने जीत को बताया बिहार का संदेश

जीत के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि यह केवल एक विधानसभा सीट की जीत नहीं है, बल्कि बिहार की जनता की आकांक्षाओं का संदेश है। उन्होंने कहा कि बांकीपुर की जनता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में शिक्षा, रोजगार और पलायन जैसे मुद्दे सबसे महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने केंद्र सरकार से अपील करते हुए कहा कि बिहार के युवाओं के लिए बेहतर शिक्षा और रोजगार की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं ताकि पलायन को रोका जा सके। उन्होंने सभी मतदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिन्होंने उन्हें वोट दिया और जिन्होंने नहीं दिया, दोनों का समान रूप से सम्मान किया जाएगा क्योंकि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है।

भाजपा ने स्वीकार की हार

उपचुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने जनता के फैसले का सम्मान करते हुए कहा कि पार्टी सिर झुकाकर इस जनादेश को स्वीकार करती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय सर्वोच्च होता है और पार्टी गंभीरता से समीक्षा करेगी कि किन कारणों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका।

उन्होंने कहा कि भाजपा अपनी कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करेगी और भविष्य के चुनावों में बेहतर प्रदर्शन का प्रयास करेगी।

बिहार की राजनीति पर क्या होगा असर?

बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम केवल एक सीट का चुनावी नतीजा नहीं माना जा रहा है। भाजपा के मजबूत गढ़ में जनसुराज की जीत ने राज्य की राजनीति में नए राजनीतिक विकल्प की संभावनाओं को मजबूत किया है। वहीं भाजपा के लिए यह संगठन और रणनीति की समीक्षा का अवसर बन गया है। दूसरी ओर राजद के लिए यह परिणाम चिंता बढ़ाने वाला है, क्योंकि पार्टी इस सीट पर मुख्य मुकाबले से बाहर दिखाई दी।

आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यह उपचुनाव बिहार की राजनीति में बदलते जनमत का संकेत माना जा रहा है। अब सभी राजनीतिक दल इस परिणाम का विश्लेषण कर अपनी आगामी रणनीति तैयार करने में जुटेंगे।

Nishkarsh Bharat

पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट

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