फेक रिव्यू का बड़ा खेल! ऑनलाइन रेटिंग पर कितना करें भरोसा? जानें कैसे फंस रहे कंज्यूमर?
फेक रिव्यू के दौर में ऑनलाइन रेटिंग पर कितना करें भरोसा?
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नई दिल्ली)। फेक रिव्यू का खेल अब ऑनलाइन खरीदारी और सेवाओं के चुनाव का बड़ा सवाल बन गया है। प्रोडक्ट खरीदना हो, होटल बुक करना हो या रेस्टोरेंट, डॉक्टर और सैलून चुनना हो, ग्राहक अक्सर सबसे पहले ऑनलाइन रेटिंग और रिव्यू देखते हैं। लेकिन चमकते पांच सितारे और तारीफों से भरे कमेंट हमेशा असली अनुभव की गारंटी नहीं होते। पैसे देकर सकारात्मक रिव्यू करवाने से लेकर प्रतिस्पर्धी कारोबार को नुकसान पहुंचाने के लिए फर्जी निगेटिव रिव्यू पोस्ट कराने तक का खेल उपभोक्ताओं के फैसले को प्रभावित कर सकता है।
यही वजह है कि अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि किसी प्रोडक्ट या कारोबार की रेटिंग कितनी है, बल्कि यह भी है कि उस फेक रिव्यू रेटिंग के पीछे मौजूद रिव्यू कितने भरोसेमंद हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बढ़ती निर्भरता के बीच उपभोक्ताओं के लिए रिव्यू को समझकर फैसला लेना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।
रिव्यू से तय होता है खरीदारी का फैसला
BrightLocal के 2026 Local Consumer Review Survey के मुताबिक 97 फीसदी उपभोक्ता स्थानीय कारोबार चुनते समय ऑनलाइन फेक रिव्यू पढ़ते हैं। सर्वे में 85 फीसदी लोगों ने कहा कि सकारात्मक रिव्यू उन्हें किसी कारोबार का इस्तेमाल करने के लिए ज्यादा तैयार करते हैं, जबकि 77 फीसदी ने माना कि खराब रिव्यू उन्हें किसी कारोबार से दूर कर सकते हैं। इसका सीधा असर कारोबार पर पड़ता है। किसी रेस्टोरेंट को लगातार अच्छे रिव्यू मिल रहे हों तो ग्राहक वहां जाने का मन बना सकता है। दूसरी तरफ बार-बार खराब सर्विस, गंदगी या घटिया क्वालिटी की शिकायतें दिखें तो ग्राहक दूसरा विकल्प तलाश सकता है।
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हालांकि सिर्फ स्टार रेटिंग देखकर फैसला लेना जोखिम भरा हो सकता है। 2026 के सर्वे में उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेत यह था कि अलग-अलग रिव्यू में अनुभव एक जैसा दिखाई दे। यानी केवल पांच स्टार नहीं, बल्कि कई ग्राहकों की बातों में एक जैसा अनुभव दिखना ज्यादा भरोसा पैदा करता है।
फेक रिव्यू कैसे बनते हैं बड़ा खतरा
फेक रिव्यू कई तरीकों से उपभोक्ता तक पहुंच सकते हैं। किसी कारोबार की छवि बेहतर दिखाने के लिए उसके पक्ष में बनावटी सकारात्मक रिव्यू पोस्ट किए जा सकते हैं। दूसरी तरफ प्रतिस्पर्धी को नुकसान पहुंचाने के लिए फर्जी पहचान से फेक रिव्यू भी डाले जा सकते हैं।

कभी-कभी कारोबार ग्राहकों को किसी खास तरह का फेक रिव्यू लिखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। कुछ मामलों में फेक रिव्यू के बदले डिस्काउंट या दूसरे फायदे देने की कोशिश भी की जाती है। इससे ऑनलाइन रेटिंग वास्तविक ग्राहक अनुभव की जगह मार्केटिंग का हिस्सा बन सकती है।
भारतीय मानक ब्यूरो ने भी ऑनलाइन फेक रिव्यू की विश्वसनीयता से जुड़े इन जोखिमों को पहचाना है। BIS के IS 19000:2022 में ऑनलाइन कंज्यूमर रिव्यू को जमा करने, उनकी मॉडरेशन प्रक्रिया और प्रकाशन से जुड़े सिद्धांत और आवश्यकताएं तय की गई हैं। मानक में फर्जी सकारात्मक और फर्जी नकारात्मक रिव्यू जैसी समस्याओं का भी उल्लेख है।
सिर्फ पांच स्टार देखकर न करें भरोसा
ऑनलाइन फेक रिव्यू की जांच करते समय ग्राहक को सबसे पहले यह देखना चाहिए कि रिव्यू कितने हैं और वे कब लिखे गए हैं। बहुत कम समय में बड़ी संख्या में एक जैसी भाषा वाले रिव्यू सामने आए हैं तो सावधानी जरूरी है।
BrightLocal के 2026 सर्वे में 56 फीसदी उपभोक्ताओं ने बताया कि दूसरे रिव्यू में समान अनुभव से पुष्टि होना उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक है। इसके बाद सकारात्मक अनुभव का स्पष्ट विवरण और हाल में लिखा गया रिव्यू भी अहम माना गया। 74 फीसदी उपभोक्ता पिछले तीन महीने के रिव्यू को महत्व देते हैं।
इसलिए किसी कारोबार के बारे में राय बनाते समय केवल सबसे अच्छे रिव्यू पढ़ने के बजाय कुछ निगेटिव और सामान्य रिव्यू भी देखना चाहिए। अगर अलग-अलग ग्राहकों की शिकायतें बार-बार एक ही समस्या की ओर इशारा कर रही हैं तो उसे नजरअंदाज करना सही नहीं होगा।
फेक रिव्यू पहचानने के कुछ संकेत
फेक रिव्यू की पहचान हमेशा आसान नहीं होती, लेकिन कुछ संकेत उपभोक्ता को सावधान कर सकते हैं। लगातार एक जैसी भाषा, बहुत सामान्य तारीफ, प्रोडक्ट या सेवा के बारे में कोई वास्तविक जानकारी नहीं होना और कम समय में बड़ी संख्या में रिव्यू आना संदेह पैदा कर सकता है।
किसी रिव्यू में वास्तविक अनुभव से जुड़े विवरण मौजूद हैं या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए होटल के रिव्यू में कमरे, सफाई, स्टाफ या खाने से जुड़ी स्पष्ट जानकारी ज्यादा उपयोगी हो सकती है। इसी तरह किसी प्रोडक्ट के रिव्यू में उसकी गुणवत्ता, इस्तेमाल की अवधि और वास्तविक कमियों का जिक्र ज्यादा विश्वसनीय संकेत देता है।

ग्राहक को एक ही वेबसाइट पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर जानकारी देखनी चाहिए। BrightLocal के मुताबिक 2026 में औसतन उपभोक्ता कारोबार चुनते समय छह अलग-अलग रिव्यू साइटों का इस्तेमाल कर रहा है।
ऑनलाइन रेटिंग के साथ दूसरी जानकारी भी देखें
किसी प्रोडक्ट या सर्विस को चुनने से पहले कंपनी की वेबसाइट, रिटर्न पॉलिसी, वारंटी, कीमत और संपर्क जानकारी भी देखनी चाहिए। केवल स्टार रेटिंग के आधार पर महंगा सामान खरीदना जोखिम बढ़ा सकता है।
खासकर होटल, अस्पताल, डॉक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स या महंगे ऑनलाइन प्रोडक्ट के मामले में रिव्यू के साथ दूसरी स्वतंत्र जानकारी देखना बेहतर तरीका है। सोशल मीडिया पर ग्राहक अनुभव, वीडियो रिव्यू और अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर मौजूद शिकायतें भी तस्वीर को समझने में मदद कर सकती हैं।
सर्वे के अनुसार 66 फीसदी उपभोक्ता सकारात्मक रिव्यू पढ़ने के बाद भी आगे और रिसर्च करते हैं, जबकि 34 फीसदी सीधे खरीदारी या बुकिंग के लिए तैयार होते हैं। यानी रिव्यू महत्वपूर्ण हैं, लेकिन बड़ी संख्या में ग्राहक उन्हें अंतिम फैसला मानने के बजाय शुरुआती संकेत के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।
रिव्यू पर भरोसा करें, लेकिन जांच के बाद
ऑनलाइन रिव्यू पूरी तरह बेकार नहीं हैं। वास्तव में वे ग्राहक के अनुभव को समझने का उपयोगी माध्यम हैं। समस्या तब शुरू होती है जब उपभोक्ता किसी एक रेटिंग या कुछ चुनिंदा कमेंट को पूरी सच्चाई मान लेता है।
सही तरीका यह है कि रिव्यू की संख्या, तारीख, भाषा, अनुभव का विवरण और अलग-अलग ग्राहकों की बातों में समानता को देखा जाए। सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के रिव्यू पढ़े जाएं और जरूरत पड़ने पर दूसरे प्लेटफॉर्म से भी जानकारी ली जाए।
फेक रिव्यू से पैदा होने वाली समस्या सिर्फ ग्राहक के गलत खरीदारी फैसले तक सीमित नहीं है। इसका असर ईमानदारी से कारोबार करने वाले व्यवसायों की प्रतिष्ठा पर भी पड़ सकता है। फर्जी सकारात्मक रिव्यू किसी कमजोर सेवा को बेहतर दिखा सकते हैं और फर्जी निगेटिव रिव्यू किसी अच्छे कारोबार की छवि खराब कर सकते हैं।
उपभोक्ता शिकायत भी कर सकता है
अगर ग्राहक को ऑनलाइन खरीदारी या किसी सेवा से संबंधित धोखाधड़ी या अनुचित व्यापार व्यवहार का सामना करना पड़ता है, तो वह राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकता है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के मुताबिक National Consumer Helpline पर 1915 के जरिए शिकायत दर्ज की जा सकती है।
ऐसे में स्क्रीनशॉट, ऑर्डर की जानकारी, बिल, भुगतान का रिकॉर्ड और संबंधित रिव्यू या विज्ञापन की कॉपी सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। इससे शिकायत के समय मामले को स्पष्ट तरीके से रखने में मदद मिलती है।
ऑनलाइन रेटिंग आज उपभोक्ता के फैसले का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है, लेकिन इसे अंतिम सत्य मानना सही नहीं है। पांच स्टार देखकर तुरंत खरीदारी करने के बजाय रिव्यू की गुणवत्ता, उसकी तारीख और दूसरे ग्राहकों के अनुभव को समझना ज्यादा सुरक्षित तरीका है। डिजिटल बाजार में सबसे मजबूत सुरक्षा यही है कि ग्राहक रेटिंग पर भरोसा करे, लेकिन आंख मूंदकर नहीं।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
