बिहार में बनेंगे 31 आधुनिक बस स्टैंड, एयरपोर्ट जैसी सुविधा, गुजरात मॉडल पर होगा निर्माण
बिहार के 31 बस स्टैंड गुजरात मॉडल पर होंगे आधुनिक और हाईटेक
निष्कर्ष भारत, संवाददाता पटना। बिहार में बस स्टैंड की तस्वीर आने वाले समय में पूरी तरह बदलने वाली है। अब यात्रियों को केवल बस पकड़ने और इंतजार करने की सुविधा ही नहीं, बल्कि एयरपोर्ट जैसी आधुनिक सुविधाएं भी मिल सकती हैं। राज्य सरकार ने गुजरात मॉडल पर बिहार के 31 बस स्टैंड और डिपो को आधुनिक स्वरूप देने की योजना बनाई है। इन परिसरों को हाईटेक ट्रांसपोर्ट हब के साथ-साथ व्यावसायिक केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है।
योजना के तहत आधुनिक इमारतें, AC वेटिंग हॉल, फूड कोर्ट, होटल, शॉपिंग स्पेस, पार्किंग और अन्य यात्री सुविधाएं विकसित की जाएंगी। परियोजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल के जरिए आगे बढ़ाने की तैयारी है। सरकार का लक्ष्य सिर्फ यात्रियों को बेहतर सुविधा देना नहीं, बल्कि बिहार राज्य पथ परिवहन निगम को आर्थिक रूप से भी मजबूत बनाना है।
गुजरात मॉडल पर बदलेगा बिहार का बस स्टैंड
बिहार सरकार ने आधुनिक बस स्टैंड विकसित करने के लिए गुजरात के GSRTC Bus Port मॉडल को आधार बनाया है। गुजरात में कई बस टर्मिनलों को आधुनिक परिवहन केंद्र के साथ कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के रूप में विकसित किया गया है। यहां यात्री सुविधाओं के साथ दुकानें, होटल, फूड कोर्ट और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए जगह उपलब्ध है।
इसी तर्ज पर बिहार के 31 बस डिपो को आधुनिक रूप देने की योजना है। कई जगहों पर मौजूदा बस स्टैंड के विस्तार या स्थान परिवर्तन की संभावना भी तलाशी जा सकती है। सरकार इन परियोजनाओं के जरिए बस यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के साथ-साथ परिवहन परिसरों से नियमित आय का नया स्रोत तैयार करना चाहती है।
G+4 से G+6 तक बनेंगी आधुनिक इमारतें
योजना के अनुसार, चयनित बस डिपो और बस टर्मिनल परिसरों में जरूरत और उपलब्ध जमीन के अनुसार G+4 से G+6 तक के आधुनिक भवन विकसित किए जा सकते हैं। इन भवनों में बस संचालन से जुड़ी सुविधाओं के साथ व्यावसायिक उपयोग के लिए भी पर्याप्त जगह बनाई जाएगी।
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बस स्टैंड को केवल बसों के आने-जाने की जगह तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसे मल्टी-फंक्शनल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां यात्रियों को यात्रा से जुड़ी लगभग सभी जरूरी सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध हो सकें।

सरकार का मानना है कि आधुनिक संरचना और कमर्शियल गतिविधियों के जरिए इन परिसरों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। बस स्टैंड से होने वाली आय को बिहार राज्य पथ परिवहन निगम और निजी भागीदारों के बीच तय व्यवस्था के तहत साझा किया जाएगा। इसी आय से संचालन और रखरखाव की व्यवस्था को मजबूत करने की योजना है।
AC वेटिंग हॉल से होटल और फूड कोर्ट तक सुविधा
नए स्वरूप में विकसित होने वाले बस स्टैंड यात्रियों को आरामदायक इंतजार की सुविधा देंगे। यहां आधुनिक वेटिंग एरिया, AC वेटिंग हॉल और बेहतर बैठने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है। इसके अलावा फूड कोर्ट, दुकानें और अन्य व्यावसायिक सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।
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कुछ प्रमुख बस टर्मिनलों में होटल और बैंक्वेट हॉल जैसी सुविधाओं की भी संभावना है। इसका उद्देश्य बस परिसरों को केवल ट्रांसपोर्ट सुविधा तक सीमित न रखकर बहुउद्देश्यीय कॉम्प्लेक्स के रूप में विकसित करना है।
आधुनिक बस स्टैंड में यात्रियों, आम लोगों और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अलग-अलग तरह की सुविधाएं उपलब्ध होने से इन परिसरों में दिनभर गतिविधियां बनी रह सकती हैं। इससे स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
ई-बसों के लिए बनेंगे चार्जिंग स्टेशन
बिहार में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने की दिशा में इलेक्ट्रिक बसों पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए आधुनिक बस स्टैंड और डिपो में ई-बस चार्जिंग स्टेशन विकसित करने की योजना है।
इसके अलावा आधुनिक वर्कशॉप, बस पार्किंग, निरीक्षण पिट, स्टोर और टायर सेक्शन जैसी तकनीकी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। जल निकासी, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट और बैकअप पावर सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं भी परियोजना का हिस्सा हो सकती हैं।
इन सुविधाओं से भविष्य में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन और रखरखाव को आसान बनाने में मदद मिलेगी। राज्य में आने वाले समय में बड़ी संख्या में ई-बसों के संचालन की योजना को देखते हुए बस डिपो की तकनीकी क्षमता बढ़ाना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
31 बस स्टैंड से जुड़ेगा पर्यटन और परिवहन
आधुनिक बनाए जाने वाले बस स्टैंड विभिन्न क्षेत्रों की कनेक्टिविटी और पर्यटन की जरूरतों को भी ध्यान में रखकर विकसित किए जाएंगे। योजना में पटना, भागलपुर, नालंदा, गया, मुंगेर, सहरसा समेत कई महत्वपूर्ण जिले शामिल हैं।
नालंदा और गया जैसे धार्मिक एवं पर्यटन महत्व वाले क्षेत्रों में आधुनिक बस सुविधाएं पर्यटकों के लिए यात्रा को आसान बना सकती हैं। इसी तरह अन्य जिलों में बेहतर बस टर्मिनल बनने से स्थानीय और अंतरजिला परिवहन को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

पटना में बिहार के सबसे बड़े आधुनिक बस स्टैंड को विकसित करने की योजना है। वहीं मुजफ्फरपुर को उत्तर बिहार के प्रमुख ट्रांजिट केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर रहेगा। दरभंगा की नेपाल से कनेक्टिविटी, भागलपुर की पूर्वी बिहार और झारखंड से पहुंच तथा पूर्णिया की सीमांचल क्षेत्र में भूमिका को देखते हुए इन क्षेत्रों के बस टर्मिनल भी महत्वपूर्ण होंगे।
बस स्टैंड बनेंगे रोजगार और कारोबार के नए केंद्र
राज्य सरकार की योजना का एक बड़ा उद्देश्य रोजगार और राजस्व बढ़ाना भी है। प्रस्तावित आधुनिक बस स्टैंड में बड़ी संख्या में दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान खुलने की संभावना है। अनुमान के अनुसार, एक बड़े बस टर्मिनल में 100 से 150 तक दुकानें विकसित की जा सकती हैं।
31 आधुनिक परिसरों में कुल मिलाकर हजारों दुकानों के खुलने की संभावना है। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। होटल, फूड कोर्ट, रिटेल स्टोर, सर्विस सेंटर और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से स्थानीय युवाओं और कारोबारियों को अवसर मिलने की उम्मीद है।
सरकार इन बस टर्मिनलों को ऐसे कमर्शियल हब के रूप में विकसित करना चाहती है, जहां परिवहन सुविधा के साथ स्थायी आर्थिक गतिविधियां भी संचालित हों।
अहमदाबाद का गीता मंदिर बस टर्मिनल बनेगा उदाहरण
गुजरात मॉडल को समझने के लिए अहमदाबाद के गीता मंदिर ST बस टर्मिनल का उदाहरण महत्वपूर्ण है। आधुनिक स्वरूप में विकसित यह टर्मिनल बस संचालन के साथ कमर्शियल सुविधाओं को जोड़ने वाले प्रमुख मॉडल में शामिल है।
परिसर में बड़ी संख्या में प्लेटफॉर्म, आधुनिक वेटिंग एरिया और व्यावसायिक क्षेत्र विकसित किए गए हैं। यात्रियों की सुविधा के लिए बेहतर बोर्डिंग व्यवस्था, बैठने की जगह और खान-पान की सुविधाएं उपलब्ध हैं। नए टर्मिनल विस्तार में एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं पर भी जोर दिया गया है।
इस मॉडल में पैदल यात्रियों और वाहनों के लिए अलग-अलग आवागमन व्यवस्था, दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधाएं, पार्सल रूम और मल्टी-लेवल पार्किंग जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। बिहार में भी इसी तरह यात्रियों की सुविधा और कमर्शियल उपयोग के बीच संतुलन बनाने की तैयारी की जा रही है।
बस स्टैंड की बदलती तस्वीर से बढ़ेगी BSRTC की आय
बिहार सरकार का लक्ष्य बस स्टैंड को केवल खर्च वाले परिसरों के रूप में नहीं, बल्कि आय उत्पन्न करने वाले केंद्रों में बदलना है। PPP मॉडल के तहत निजी भागीदारों की मदद से आधुनिक निर्माण और व्यावसायिक विकास किया जाएगा।
दुकानों, होटल, फूड कोर्ट और अन्य कमर्शियल स्पेस से होने वाली आमदनी का एक हिस्सा बिहार राज्य पथ परिवहन निगम को मिलेगा। इससे निगम की वित्तीय स्थिति मजबूत करने और बस सेवा के संचालन व रखरखाव पर बेहतर तरीके से खर्च करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बिहार के 31 बस स्टैंड को आधुनिक बनाने की योजना सार्वजनिक परिवहन के साथ शहरी विकास, रोजगार और व्यावसायिक गतिविधियों को जोड़ने की बड़ी पहल मानी जा रही है। एयरपोर्ट जैसी यात्री सुविधाएं, इलेक्ट्रिक बसों के लिए तकनीकी व्यवस्था और कमर्शियल हब के रूप में विकास के बाद बिहार के बस टर्मिनलों की पुरानी तस्वीर बदल सकती है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
