बाढ़ शराब कांड में उठी CBI मांग, मामले को भटकाने की कोशिश , परिजनों का आरोप

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बाढ़ के बेढ़ना गांव में चार मौतों के बाद ग्रामीणों ने CBI जांच मांगी

निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना। बाढ़ शराब पार्टी में चार युवकों की मौत के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। पटना के बाढ़ अनुमंडल के बेढ़ना गांव में हुई इस घटना को लेकर मृतकों के परिजनों और ग्रामीणों ने स्थानीय पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए CBI जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामीण एसपी की ओर से गठित SIT की जांच पर उन्हें भरोसा नहीं है और चारों युवकों की मौत की निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से होनी चाहिए।

बाढ़ में चार मौतों के बाद जांच पर उठे सवाल

30 अगस्त को बाढ़ के बेढ़ना गांव में चार युवकों की संदिग्ध परिस्थितियों में तबीयत बिगड़ गई थी। इनमें निशु, पंकज सिंह, शशि और विकास राम शामिल बताए गए हैं। कुछ ही देर में दो युवकों की मौके पर मौत हो गई, जबकि दो को पटना के NMCH ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी भी मौत हो गई।

पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर के मुताबिक चारों की मौत जहर के कारण हुई है। हालांकि जहर किस प्रकार का था और वह शराब, पानी या खाने में मिला था, इसकी पुष्टि FSL जांच के बाद होने की बात कही गई है। शवों का बिसरा भी जांच के लिए भेजा गया है।

पुलिस के प्रेम प्रसंग वाले दावे से ग्रामीण नाराज

बाढ़ पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद इस घटना को प्रेम प्रसंग से जोड़ते हुए दावा किया था कि लाली कुमार ने शराब में जहरीला पदार्थ मिलाकर चारों की हत्या की साजिश रची। बाढ़ पुलिस के अनुसार निशु का कथित तौर पर लाली की बहन के साथ प्रेम संबंध था और इसी विवाद के कारण लाली ने शराब में जहर मिला दिया।

ग्रामीण इस दावे को पूरी तरह गलत और अपमानजनक बता रहे हैं। उनका कहना है कि जिस लड़की से प्रेम प्रसंग की बात पुलिस ने जोड़ी, वह मृतक की रिश्तेदार यानी बुआ है और उसकी शादी इसी साल मई में हो चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि एक आरोपी के बयान के आधार पर पूरे मामले को प्रेम प्रसंग का रूप दे दिया गया, जिससे गांव और परिवार की सामाजिक बदनामी हुई।

बाढ़ पुलिस की जांच पर परिजनों को भरोसा नहीं

मृतक निशु के पिता राजू सिंह ने आरोप लगाया कि घटना के बाद पुलिस ने उन्हें एक वीडियो दिखाया और फिर लाली से फोन पर बातचीत की। उनका कहना है कि पुलिस के कहने पर लाली से हुई बातचीत के आधार पर आवेदन लिखवाया गया।

राजू सिंह के मुताबिक अब उन्हें स्थानीय पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए CBI को जांच सौंपने की मांग की है।

ग्रामीण नीरज कुमार ने भी कहा कि चार लोगों की मौत कोई मामूली घटना नहीं है। उनके अनुसार ग्रामीण पुलिस की जांच से संतुष्ट नहीं हैं और सरकार को ऐसी जांच करानी चाहिए, जिससे वास्तविक दोषियों की पहचान हो सके।

हिरासत में आरोपी से फोन पर बात कराने का आरोप

ग्रामीणों ने बाढ़ थाने की पुलिस पर एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि हिरासत में मौजूद आरोपी लाली से फोन पर उनकी बातचीत कराई गई और इसी बातचीत के आधार पर FIR दर्ज कराने के लिए दबाव बनाया गया।

ग्रामीणों के मुताबिक घटना के बाद गांव में काफी आक्रोश था। करीब पांच घंटे तक फोरलेन जाम रहा। उस दौरान FIR के लिए दिए जाने वाले आवेदन पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस संबंध में बाढ़ पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और साफ हो सकेगी।

पंकज की हत्या को लेकर परिवार ने उठाया दूसरा एंगल

मृतक पंकज के परिवार ने पुलिस की प्रेम प्रसंग वाली कहानी को खारिज करते हुए हत्या की दूसरी वजह बताई है। परिवार का दावा है कि पंकज वर्ष 2009 में हुई अपने पिता की हत्या के मामले में गवाही देने वाले थे।

पंकज की भतीजी अनु कुमारी के अनुसार उनके परिवार को पहले भी धमकियां मिलती रही हैं। उन्होंने दावा किया कि 5 तारीख को मामले में पंकज की गवाही होनी थी और केस में समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा था। परिवार का आरोप है कि समझौता नहीं करने के कारण साजिश के तहत पंकज की हत्या कराई गई। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस की जांच में इस दावे को लेकर क्या तथ्य सामने आए हैं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

शराब पार्टी में क्या हुआ था?

ग्रामीणों के अनुसार चारों युवक पहले भी साथ बैठकर शराब पीते थे। 30 अगस्त को निशु और शशि गांव के बाहर बगीचे में शराब पीने के बाद घर के पास पहुंचे। वहां पंकज के साथ मछली बनाने की बात हुई। इसके बाद विकास राम को फोन कर बुलाया गया।

चारों ने मिलकर मछली बनाई और इसी दौरान एक पांचवां युवक भी वहां पहुंचा। बताया गया कि सभी युवक एक-दूसरे को पहले से जानते थे और साथ बैठकर शराब पीते थे।

ग्रामीणों के मुताबिक मौके से शराब की बोतल, टेट्रा पैक, ग्लास और मछली-रोटी बरामद हुई। दावा है कि चारों ने दोपहर करीब 1 बजकर 9 मिनट पर पहला पैग पिया और लगभग नौ मिनट बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। कुछ ही देर में दो युवकों की मौत हो गई, जबकि बाकी दो को अस्पताल भेजा गया।

मछली-रोटी खाने वाली बिल्ली भी बनी चर्चा का विषय

घटना के बाद ग्रामीणों ने खाने के जरिए जहर दिए जाने की संभावना पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक मौके पर रखी मछली और रोटी एक बिल्ली ने भी खाई थी, लेकिन वह ठीक रही। इसी वजह से ग्रामीण बाढ़ शराब में जहरीला पदार्थ मिलाए जाने की पुलिस की थ्योरी पर भी सवाल उठा रहे हैं।

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हालांकि खाने या शराब में जहर होने की अंतिम पुष्टि FSL रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहर से मौत की बात सामने आई है, लेकिन जहर का स्रोत अभी जांच का विषय है।

बाढ़ के ग्रामीण पूछ रहे हैं कई अनसुलझे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि शराब कहां तैयार हुई थी और उसे चारों तक किसने पहुंचाया। शराब सप्लाई करने वाले नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे, जहरीला पदार्थ कहां से खरीदा गया और उसे शराब में किसने मिलाया, इन सवालों का जवाब भी सामने आना बाकी है।

बाढ़ पुलिस ने मामले में लाली कुमार और रुदल समेत तीन लोगों की गिरफ्तारी की बात कही है। पुलिस के अनुसार एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में रुदल के बारे में बताया गया है कि वह आलू-प्याज का कारोबार करता है और उसी से शराब आने की बात जांच में सामने आई।

ग्रामीण एसपी के तबादले पर भी उठे सवाल

घटना की जांच के बीच ग्रामीण एसपी कुंदन कुमार का तबादला प्रशासन विभाग में कर दिया गया। ग्रामीणों ने इस तबादले को लेकर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि तबादले और चार युवकों की मौत की जांच के बीच किसी संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

ग्रामीणों की मुख्य मांग अब यही है कि स्थानीय पुलिस की जांच से अलग किसी स्वतंत्र एजेंसी से पूरे मामले की जांच कराई जाए। उनका कहना है कि इससे न केवल मौत की वास्तविक वजह सामने आएगी, बल्कि यह भी पता चलेगा कि जहरीला पदार्थ कहां से आया और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

नेताओं के दौरे के बीच बढ़ा ग्रामीणों का आक्रोश

घटना के बाद कई राजनीतिक नेता मृतकों के परिवारों से मिलने पहुंचे। मोकामा विधायक अनंत सिंह ने प्रत्येक परिवार को 25-25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी। बाढ़ के पूर्व विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू और बख्तियारपुर के लोजपा विधायक अरुण कुमार शाह ने भी परिजनों से मुलाकात कर न्याय का भरोसा दिलाया।

इससे पहले स्थानीय बाढ़ विधायक डॉ. सियाराम सिंह के गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई थी। ग्रामीणों का कहना था कि घटना के बाद वह समय पर परिवारों से मिलने नहीं पहुंचे। विरोध के बाद विधायक वहां से चले गए।

फिलहाल बेढ़ना गांव के चार परिवार अपने लोगों को खोने के बाद न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। पुलिस की जांच, FSL रिपोर्ट और सामने आने वाले साक्ष्यों से ही यह स्पष्ट होगा कि चारों युवकों की मौत जहरीली शराब से हुई, खाने या किसी अन्य माध्यम से जहर दिया गया या इसके पीछे कोई दूसरी साजिश थी। ग्रामीणों की CBI जांच की मांग के बीच अब सभी की नजर सरकारी और पुलिसिया कार्रवाई पर टिकी है।

Nishkarsh Bharat

अमन कुमार की रिपोर्ट

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