शराबबंदी के बाद सूखे नशे के चपेट में बिहार, युवाओं में बढ़ी लत, स्मैक-सुई बनी चिंता
बाढ़ में स्मैक और नशे की सुई से बढ़ी परिवारों की चिंता
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। राजधानी पटना के बाढ़ में स्मैक का जाल तेजी से फैलने की चर्चा ने परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। बाढ़ प्रखंड क्षेत्र में सूखे नशे के बढ़ते चलन को लेकर स्थानीय लोग और अभिभावक परेशान हैं। खासकर युवा वर्ग के बीच स्मैक और नशे की सुई के इस्तेमाल की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि कई युवा शुरुआत में शौक के तौर पर नशा करते हैं, लेकिन धीरे-धीरे इसकी गिरफ्त में चले जाते हैं।
नशे की आदत बढ़ने के बाद इसका असर सिर्फ संबंधित युवक तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार पर पड़ता है। नशे की जरूरत पूरी करने के लिए आर्थिक दबाव बढ़ता है और कई घरों में विवाद की स्थिति पैदा होने लगती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते इस समस्या पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में इसका असर समाज के बड़े हिस्से पर पड़ सकता है।
बाढ़ में युवाओं के बीच बढ़ रहा सूखे नशे का चलन
स्थानीय लोगों के अनुसार, बाढ़ प्रखंड के कुछ इलाकों में सूखे नशे का इस्तेमाल युवाओं के बीच बढ़ रहा है। इसमें स्मैक और नशे की सुई जैसे पदार्थों के सेवन की बात सामने आ रही है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इलाके की महिलाओं का कहना है कि नशे की शुरुआत कई बार सामान्य जिज्ञासा या दोस्तों के दबाव में होती है। शुरुआत में युवा इसे केवल शौक मानते हैं, लेकिन बाद में धीरे-धीरे नशे की आदत मजबूत होती जाती है। इसके बाद नशे के बिना रहना मुश्किल होने लगता है।

परिजनों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि नशे की लत युवाओं के स्वास्थ्य, पढ़ाई, रोजगार और पारिवारिक जीवन को प्रभावित कर सकती है। कई अभिभावक अपने बच्चों को इस रास्ते से दूर रखने को लेकर चिंतित हैं।
नशे की लत से परिवार पर बढ़ रहा आर्थिक दबाव
बाढ़ में नशे की आदत का असर घर के आर्थिक हालात पर भी पड़ने की बात स्थानीय लोगों ने कही है। नशे के आदी व्यक्ति को बार-बार नशीले पदार्थ की जरूरत महसूस होती है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए परिवार से पैसे मांगने का सिलसिला शुरू हो जाता है।
जब परिवार पैसे देने से इनकार करता है तो कई बार घर में विवाद की स्थिति बन जाती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुछ परिवारों में नशे की वजह से तनाव लगातार बढ़ रहा है। अभिभावकों को इस बात की चिंता रहती है कि कहीं उनके बच्चे पूरी तरह नशे की गिरफ्त में न चले जाएं।
बाढ़ में नशे की समस्या से जूझ रहे परिवारों के लिए इलाज और नशामुक्ति की सुविधा तक पहुंच भी महत्वपूर्ण है। समय पर उचित उपचार नहीं मिलने पर समस्या और गंभीर हो सकती है।
बाढ़ में सुनीता देवी ने बताई परिवार की परेशानी
शुक्रवार को मिली जानकारी के अनुसार, इलाके की रहने वाली सुनीता देवी ने सूखे नशे को लेकर अपने परिवार की परेशानी साझा की। उन्होंने बताया कि ढेलवा गोसाईं इलाके में सूखे नशे का कारोबार होने की बात सामने आती है। उनके अनुसार, नशे का कारोबार करने वाले लोग उनके पति को फोन करके बुलाते हैं।
सुनीता देवी के मुताबिक, बाढ़ में स्मैक और नशे की सुई के आदी हैं। उन्होंने बताया कि करीब पांच दिन पहले उनके पति को नशामुक्ति केंद्र ले जाया गया था, लेकिन वहां उन्हें भर्ती नहीं किया गया। इसके बाद उन्हें इमरजेंसी में भर्ती कराया गया।
परिजन को उम्मीद थी कि इलाज के बाद स्थिति में सुधार होगा और वह नशे से दूर रह पाएंगे। लेकिन सुनीता देवी का कहना है कि ठीक होकर घर लौटने के बाद उनके पति ने दोबारा नशे की सुई ले ली। इससे परिवार की चिंता और बढ़ गई है।
शराबबंदी के बीच नशामुक्ति पर भी जोर
बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद नशे से जुड़ी दूसरी समस्याओं को लेकर भी लगातार जागरूकता और कार्रवाई की जरूरत महसूस की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल शराब या किसी एक प्रकार के नशे पर नियंत्रण पर्याप्त नहीं है। युवाओं को हर तरह के नशीले पदार्थों के नुकसान के बारे में जागरूक करना जरूरी है।
लोगों का मानना है कि बाढ़ में नशे की समस्या से निपटने के लिए पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ परिवार, समाज और प्रशासन को मिलकर काम करना होगा। नशे के आदी लोगों के लिए उचित इलाज और काउंसिलिंग की सुविधा उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
शराबबंदी के साथ नशे के खिलाफ जागरूकता जरूरी
स्थानीय लोगों का कहना है कि युवाओं को बाढ़ में नशे के दुष्परिणामों के बारे में समय रहते जानकारी दी जानी चाहिए। स्कूल, कॉलेज और स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर युवाओं को नशे से होने वाले नुकसान के बारे में बताया जा सकता है।
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परिजनों की भूमिका भी इसमें महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई देने पर उनसे बातचीत करना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेना जरूरी है। नशे की समस्या को केवल अनुशासन या पारिवारिक विवाद के रूप में देखने के बजाय इसे उपचार और परामर्श की जरूरत वाली समस्या के तौर पर भी समझने की आवश्यकता है।
कारोबार पर कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सूखे नशे के कथित कारोबार पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर नशीले पदार्थ आसानी से उपलब्ध होते रहे तो युवाओं को इससे दूर रखना मुश्किल होगा।

लोगों का यह भी कहना है कि नशे के कारोबार से जुड़े लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, नशे की गिरफ्त में आ चुके युवाओं के लिए नशामुक्ति केंद्रों और उपचार की सुविधाओं को मजबूत करने की जरूरत है।
फिलहाल बाढ़ प्रखंड क्षेत्र में सूखे नशे के बढ़ते कथित चलन को लेकर स्थानीय परिवारों की चिंता सामने आई है। लोगों की मांग है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले और नशीले पदार्थों की उपलब्धता रोकने के साथ युवाओं के बीच जागरूकता अभियान चलाए। समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाने पर ही युवाओं को नशे की बढ़ती गिरफ्त से बचाने में मदद मिल सकती है।
अमन कुमार की रिपोर्ट
