बिहार में पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार और आयोग से मांगा जवाब
बिहार पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार पंचायत चुनाव को लेकर पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है। समय पर पंचायत चुनाव कराने की मांग को लेकर दायर याचिका पर गुरुवार को जस्टिस ए. अभिषेक रेड्डी की बेंच ने सुनवाई की। कोर्ट ने दोनों पक्षों को नोटिस जारी करते हुए चुनाव की मौजूदा स्थिति स्पष्ट करने के लिए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद बिहार में पंचायत चुनाव की तैयारियों और चुनाव की समयसीमा को लेकर चल रही चर्चा फिर तेज हो गई है।
मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल 2026 के अंत में पूरा होने वाला है। ऐसे में याचिकाकर्ताओं की मांग है कि कार्यकाल खत्म होने से पहले ही नए चुनाव की घोषणा कर दी जाए। उनका कहना है कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार पंचायतों में निर्वाचित व्यवस्था बनी रहनी चाहिए और चुनाव कराने में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
पंचायत चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट की नजर
मोहन प्रसाद चौरसिया और अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील एसबीके मंगलम और अवनीश ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव की प्रक्रिया को लेकर अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई जा रही है। इसी वजह से उन्हें अदालत का रुख करना पड़ा।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी जाए। इसके लिए संविधान और पंचायती राज कानून में दिए गए प्रावधानों का हवाला दिया गया है।
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कोर्ट की ओर से सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब मांगे जाने के बाद अब निगाह उनके हलफनामे पर है। सरकार और आयोग को चुनाव की तैयारी, परिसीमन समेत अन्य प्रक्रियाओं की मौजूदा स्थिति अदालत के सामने रखनी होगी।
पंचायत चुनाव से पहले परिसीमन का पेच
बिहार में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच परिसीमन की प्रक्रिया भी चल रही है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जिलों में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद क्षेत्रों की नई सीमाएं तय की जा रही हैं। इसके लिए वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जा रहा है।

परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होना चुनाव की तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण है। नई सीमाएं तय होने के बाद पंचायत स्तर पर क्षेत्रों की तस्वीर बदलेगी। इसके बाद आरक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अति पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का नया कोटा तय किया जाना है।
आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद मतदाता सूची तैयार करने और मतदान केंद्रों के निर्धारण जैसी प्रक्रियाएं भी पूरी करनी होंगी। यही वजह है कि चुनाव की पूरी प्रक्रिया में कई चरण शामिल हैं और प्रत्येक चरण के लिए समय की आवश्यकता होगी।
पंचायत चुनाव की तैयारी में कई चरण
बिहार में पंचायत चुनाव कराने से पहले परिसीमन, आरक्षण, मतदाता सूची और मतदान केंद्रों से संबंधित तैयारियां पूरी करनी होंगी। प्रशासनिक स्तर पर इन प्रक्रियाओं के बीच तालमेल भी जरूरी है। परिसीमन में किसी पंचायत या निर्वाचन क्षेत्र की सीमा में बदलाव होने पर संबंधित मतदाताओं और सीटों की स्थिति भी बदल सकती है। इसके बाद आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा। आरक्षण तय होने के बाद नई मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
इसके अलावा मतदान केंद्रों का निर्धारण और चुनाव से जुड़े प्रशासनिक इंतजाम भी किए जाएंगे। ऐसे में यदि किसी एक चरण में देरी होती है तो उसका असर पूरी चुनावी प्रक्रिया पर पड़ सकता है। यही वजह है कि समय पर पंचायत चुनाव कराने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में दायर याचिका महत्वपूर्ण हो गई है। अब सरकार और आयोग के जवाब से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि चुनाव की तैयारियां किस स्तर तक पहुंची हैं और निर्धारित समयसीमा में चुनाव कराने के लिए क्या योजना बनाई गई है।
2021 में हुए थे पिछले पंचायत चुनाव
बिहार में पिछला पंचायत चुनाव वर्ष 2021 में कराया गया था। उस समय सितंबर से दिसंबर के बीच अलग-अलग चरणों में मतदान हुआ था। पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। इसी आधार पर वर्तमान पंचायतों का कार्यकाल 2026 के अंत में पूरा होने वाला है।
ऐसे में नए प्रतिनिधियों के चुनाव को लेकर समयसीमा महत्वपूर्ण हो गई है। अगर चुनाव प्रक्रिया समय पर शुरू नहीं होती है तो इसकी तैयारियों के लिए उपलब्ध समय कम हो सकता है। याचिकाकर्ताओं ने इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की है।

हाईकोर्ट के जवाब के बाद साफ होगी तस्वीर
बिहार पंचायत चुनाव को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि चुनाव की घोषणा कब होगी और क्या मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने से पहले पूरी प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। दूसरी ओर परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया भी चुनाव की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम को लेकर तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पंचायत चुनाव की तारीख कब घोषित होगी।
हालांकि हाईकोर्ट की सुनवाई ने सरकार और निर्वाचन आयोग पर चुनाव की समयबद्ध तैयारी को लेकर जवाबदेही जरूर बढ़ा दी है। अब अदालत में दाखिल होने वाले हलफनामे से यह पता चलेगा कि राज्य में पंचायत चुनाव की तैयारी किस चरण में है और समय पर मतदान कराने के लिए आगे क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
