बिहार में बाढ़ से 36 लाख लोग प्रभावित, 14 जिलों में कहर, गंगा ने तोड़े सभी रिकॉर्ड

बाढ़

बिहार बाढ़ से 14 जिलों में 36 लाख प्रभावित, गंगा रिकॉर्ड स्तर पर

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार में बाढ़ ने एक बार फिर राज्य के कई हिस्सों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गंगा समेत आठ प्रमुख नदियां उफान पर हैं और 14 जिलों के दर्जनों प्रखंड बाढ़ की चपेट में हैं। करीब 35.89 लाख लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं। भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा ने पांच साल पुराना जलस्तर का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। मंगलवार को यहां नदी का जलस्तर 36.81 मीटर दर्ज किया गया, जबकि 2021 में यह 36.75 मीटर था।

पटना समेत कई जिलों में बाढ़ का असर

पटना में गंगा का जलस्तर फिलहाल धीरे-धीरे घट रहा है, लेकिन यह खतरे के निशान से करीब दो सेंटीमीटर ऊपर है। वहीं पुनपुन नदी का जलस्तर 24 घंटे में नौ सेंटीमीटर बढ़ा है। श्रीपालपुर में पुनपुन खतरे के निशान से करीब 2.95 मीटर ऊपर बह रही है। दरधा और महतमाइन नदियों के जलस्तर में भी बढ़ोतरी से आसपास के इलाकों में चिंता बनी हुई है।

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बिहार बाढ़ का असर सारण, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर, बेगूसराय और पश्चिम चंपारण समेत कई जिलों में दिखाई दे रहा है। सारण में माही नदी पर बना जमींदारी बांध टूटने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। जिले के सात प्रखंडों के 109 गांवों में करीब 2.12 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं।

गंगा ने भागलपुर में बढ़ाई परेशानी

भागलपुर में गंगा का पानी तिलकामांझी भागलपुर यूनिवर्सिटी के परिसर में प्रवेश कर गया है। प्रशासनिक भवन, सीनेट हॉल, महिला छात्रावास, कैंटीन और प्रोफेसर्स कॉलोनी समेत कई हिस्सों में पानी जमा है। बाढ़ के कारण विश्वविद्यालय का सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ है।

जरूरी प्रशासनिक कार्यों के लिए कर्मचारी परिसर पहुंच रहे हैं, लेकिन डिग्री और माइग्रेशन सर्टिफिकेट लेने आने वाले छात्रों को काफी परेशानी हो रही है। कई छात्र घुटने से अधिक गहरे पानी को पार कर विभागों तक पहुंच रहे हैं। छात्रों का कहना है कि हर मानसून में गंगा का पानी परिसर में घुसता है और जलस्तर बढ़ने पर नाव का सहारा लेना पड़ता है।

मुंगेर और खगड़िया में भी हालात गंभीर

मुंगेर के तारापुर दियारा पंचायत के मनियारचक गांव में छाती तक पानी जमा होने की स्थिति बताई जा रही है। ग्रामीणों को इसी पानी से होकर आवागमन करना पड़ रहा है। खगड़िया के कई गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। पानी से बचने के लिए कुछ परिवार घरों में मचान बनाकर रहने को मजबूर हैं।

नाथनगर के कई सरकारी स्कूलों में भी बाढ़ और बारिश का पानी घुस गया है। बेलखुरिया, मनिहारी और मनियारपुर के स्कूलों में पानी जमा होने से बच्चों के स्कूल पहुंचने में परेशानी हो रही है। अभिभावकों ने जल निकासी और जरूरत पड़ने पर स्कूलों में छुट्टी की मांग की है।

गंडक का कटाव, दर्जनों घर और स्कूल प्रभावित

पश्चिम चंपारण के बगहा में गंडक नदी का कटाव लगातार जारी है। मधुबनी प्रखंड के रेवहिया इलाके में नदी अब तक करीब 70 घरों और एक प्राथमिक विद्यालय समेत सैकड़ों एकड़ फसल और जमीन को नुकसान पहुंचा चुकी है। ग्रामीणों के सामने घर और खेती की जमीन बचाने की चुनौती बनी हुई है।

बेगूसराय में नाव से पहुंच रहे गैस सिलेंडर

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी सामान की आपूर्ति भी चुनौती बनी हुई है। बेगूसराय में इंडियन ऑयल की ओर से नाव के जरिए बाढ़ प्रभावित इलाकों में घर-घर गैस सिलेंडर पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। पानी से घिरे क्षेत्रों में यह व्यवस्था लोगों के लिए राहत देने वाली साबित हो रही है।

राहत शिविरों में जरूरी सामान की कमी

सरकार की ओर से बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर और सामुदायिक रसोई संचालित करने की बात कही जा रही है, लेकिन कई जगहों पर लोगों को जरूरी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। राहत शिविरों में दाल-भात और सब्जी मिल रही है, लेकिन बच्चों के लिए दूध, महिलाओं के लिए सैनिटरी पैड और चेंजिंग रूम जैसी सुविधाओं की कमी बताई जा रही है। मवेशियों के चारे की समस्या भी गंभीर बनी हुई है।

पप्पू यादव ने हाजीपुर में सुनीं पीड़ितों की समस्याएं

वैशाली के हाजीपुर में बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच पूर्णिया सांसद पप्पू यादव पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और मदद का भरोसा दिया। इस दौरान जरूरतमंदों के बीच नकद आर्थिक सहायता भी बांटी गई। बड़ी संख्या में लोगों ने सांसद के सामने राहत और दूसरी परेशानियों से जुड़ी समस्याएं रखीं।

आठ नदियां खतरे के निशान से ऊपर

बिहार में गंगा, कोसी, गंडक, बागमती, पुनपुन, घाघरा, माही और सोन नदियों की स्थिति चिंता बढ़ा रही है। गंगा गांधीघाट और कहलगांव में खतरे के निशान से ऊपर है। कोसी कटिहार और खगड़िया में लाल निशान से ऊपर बह रही है। गोपालगंज के डुमरिया में गंडक, मुजफ्फरपुर के बेनीबाद में बागमती और सीवान में घाघरा का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर है। सोन नदी का पानी घट रहा है, लेकिन यह अभी भी खतरे के निशान से ऊपर है।

बारिश ने फिर बढ़ाई बाढ़ की चिंता

इस मानसून सीजन में बिहार में सामान्य से कम बारिश हुई है। अब तक करीब 837.1 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, जबकि 541 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यह सामान्य से करीब 35 प्रतिशत कम है। इसके बावजूद पिछले 24 घंटे में कई जिलों में अच्छी बारिश हुई। मुजफ्फरपुर में 62, गया में 58, मधुबनी में 54, रोहतास में 42 और नवादा में 38 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

मौसम विभाग के अनुसार, 9 सितंबर को गरज-चमक के साथ बारिश, 10 सितंबर को मध्यम बारिश और 11-12 सितंबर को भी बारिश की संभावना है। 11 सितंबर के आसपास बंगाल की खाड़ी में नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इससे बिहार समेत पूर्वी भारत में बारिश बढ़ सकती है।

मानसून सिस्टम से फिर सक्रिय हो सकती है बारिश

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के आसपास चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। मानसून ट्रफ भी बिहार के आसपास सक्रिय है। इन मौसमी प्रणालियों के कारण नमी वाली हवाएं राज्य की ओर पहुंच रही हैं, जिससे कई हिस्सों में बादल और बारिश बन रही है।

ऐसे में आने वाले दिनों में बिहार बाढ़ की स्थिति पर मौसम का असर महत्वपूर्ण रहेगा। नदियों के जलस्तर, बारिश और कटाव पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित आवागमन, जरूरी सामान और राहत सुविधाओं की उपलब्धता बनी हुई है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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