बिहार में नई गाड़ी खरीदना हुआ आसान, रजिस्ट्रेशन नियम बदले, जानें अब क्या करना होगा
बिहार में नई गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया हुई आसान
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। बिहार वाहन रजिस्ट्रेशन को लेकर नई गाड़ी खरीदने वालों और वाहन डीलरों के लिए राहत की खबर है। परिवहन विभाग ने नए मॉडल के वाहनों के निबंधन की प्रक्रिया को सरल कर दिया है। अब किसी नए मॉडल की गाड़ी के रजिस्ट्रेशन के लिए परिवहन विभाग मुख्यालय से अलग से एकीकृत निबंधन की स्वीकृति लेने की जरूरत नहीं होगी। विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है और नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
परिवहन विभाग के इस फैसले का असर सीधे तौर पर वाहन निर्माता कंपनियों और डीलरों पर पड़ेगा। वहीं, इसका अप्रत्यक्ष लाभ उन ग्राहकों को भी मिल सकता है, जो नए मॉडल की गाड़ी खरीदने के बाद उसके रजिस्ट्रेशन का इंतजार करते हैं। अतिरिक्त प्रशासनिक प्रक्रिया खत्म होने से नए मॉडल की गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन अपेक्षाकृत तेजी से पूरा होने की उम्मीद है।
नए मॉडल के रजिस्ट्रेशन में क्या बदला
अब तक किसी नए मॉडल के वाहन को बिहार में निबंधन कराने से पहले परिवहन विभाग मुख्यालय स्तर पर अलग प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। इसके लिए स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी होने तक वाहन निर्माता और डीलरों को इंतजार करना पड़ सकता था। इस वजह से नए मॉडल की बिक्री और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लगता था।
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नई व्यवस्था में विभाग ने इसी अतिरिक्त चरण को हटा दिया है। अब केंद्रीय स्तर पर अधिकृत एजेंसी से वाहन के मॉडल को मंजूरी मिलने के बाद बिहार में उसके रजिस्ट्रेशन के लिए मुख्यालय से अलग अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी।
केंद्रीय टाइप अप्रूवल बनेगा आधार
परिवहन विभाग ने नए मॉडल के वाहनों के रजिस्ट्रेशन के लिए केंद्रीय मोटरयान नियमावली, 1989 के तहत अधिकृत केंद्रीय एजेंसियों की ओर से जारी टाइप अप्रूवल प्रमाणपत्र को आधार बनाया है।
इसका मतलब है कि यदि किसी वाहन मॉडल को केंद्रीय स्तर पर निर्धारित तकनीकी और नियामकीय मानकों के अनुरूप टाइप अप्रूवल मिल चुका है, तो बिहार में उसी आधार पर आगे की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। राज्य स्तर पर दोबारा मुख्यालय की अलग मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
रजिस्ट्रेशन के लिए देने होंगे जरूरी दस्तावेज
नई व्यवस्था के तहत वाहन निर्माता कंपनियों को केंद्रीय एजेंसी की ओर से जारी टाइप अप्रूवल प्रमाणपत्र के साथ फॉर्म-22 जमा करना होगा। इसके बाद संबंधित जिला परिवहन पदाधिकारी दस्तावेजों और नियमों के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी करेंगे।

जिला परिवहन पदाधिकारी की जिम्मेदारी में ट्रेड सर्टिफिकेट जारी करना और वाहनों का रजिस्ट्रेशन करना शामिल होगा। इस तरह नए मॉडल की गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन से जुड़ा काम जिला स्तर पर ही आगे बढ़ सकेगा।
रजिस्ट्रेशन में डीलरों को नहीं करना होगा लंबा इंतजार
परिवहन विभाग के फैसले से वाहन डीलरों के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह है कि उन्हें नए मॉडल की बिक्री शुरू करने से पहले मुख्यालय से अलग स्वीकृति का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। केंद्रीय स्तर पर वैध टाइप अप्रूवल प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध होने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निबंधन का काम शुरू किया जा सकेगा।
इससे वाहन कंपनियों को नए मॉडल बाजार में उतारने में प्रशासनिक देरी कम होने की उम्मीद है। डीलर स्तर पर भी दस्तावेजी प्रक्रिया पहले की तुलना में सरल हो सकती है।
ग्राहकों को भी मिलेगा अप्रत्यक्ष फायदा
बिहार वाहन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में बदलाव का सीधा प्रशासनिक लाभ भले ही वाहन कंपनियों और डीलरों को मिले, लेकिन इसका असर ग्राहकों पर भी पड़ सकता है। नई गाड़ी खरीदने के बाद ग्राहक के लिए रजिस्ट्रेशन और वैध दस्तावेज समय पर मिलना महत्वपूर्ण होता है।

मुख्यालय स्तर की अतिरिक्त अनुमति हटने से नए मॉडल के वाहनों की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में लगने वाला समय कम हो सकता है। इससे ग्राहक को वाहन खरीदने के बाद कागजी प्रक्रिया पूरी होने के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
पुराने नियमों में क्यों किया गया बदलाव
परिवहन विभाग ने नई व्यवस्था को लागू करने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से 24 नवंबर 2020 को जारी पत्र में किए गए प्रावधानों को आधार बनाया है। विभाग ने इसी व्यवस्था के अनुरूप राज्य में नए मॉडल के वाहनों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को सरल किया है।
नए आदेश के बाद इस विषय से संबंधित पहले जारी पत्रों और आदेशों में भी आवश्यक बदलाव प्रभावी माना जाएगा। अब नए मॉडल के वाहनों का निबंधन इसी संशोधित व्यवस्था के अनुसार किया जाएगा।
रजिस्ट्रेशन के नियम पूरी तरह खत्म नहीं हुए
नई व्यवस्था का मतलब यह नहीं है कि वाहनों के रजिस्ट्रेशन से जुड़े सभी नियम समाप्त कर दिए गए हैं। वाहन का निबंधन अभी भी निर्धारित नियमों, प्रमाणपत्रों और जरूरी दस्तावेजों के आधार पर ही होगा।
मुख्य बदलाव सिर्फ इतना है कि केंद्रीय स्तर पर अधिकृत एजेंसी से टाइप अप्रूवल मिलने के बाद उसी मॉडल के लिए बिहार परिवहन विभाग के मुख्यालय से अलग एकीकृत निबंधन की स्वीकृति लेने की जरूरत नहीं होगी।
परिवहन विभाग के इस फैसले से नए मॉडल के वाहनों की बिक्री और बिहार वाहन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है। जिला स्तर पर जिम्मेदारी तय होने से कंपनियों और डीलरों को अतिरिक्त प्रशासनिक इंतजार से राहत मिलेगी। वहीं, ग्राहकों के लिए भी नई गाड़ी खरीदने के बाद रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान और तेज होने की संभावना है।
पटना से राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
