दारोगा भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी की जांच अब EOU के हवाले, 1,799 पदों के लिए हुई थी बहाली परीक्षा
दारोगा भर्ती परीक्षा में धांधली की जांच अब EOU की SIT करेगी
निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना। दारोगा भर्ती परीक्षा में कथित धांधली की शिकायतों की जांच अब आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU करेगी। बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग की ओर से दारोगा के 1,799 पदों के लिए मई में आयोजित मुख्य लिखित परीक्षा को लेकर सामने आई शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए EOU ने विशेष जांच टीम यानी SIT का गठन किया है। टीम अब परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी।
EOU की SIT ने गया और पूर्णिया में दर्ज दो प्राथमिकी को अपने हाथ में ले लिया है। ये मामले गया के रामपुर थाना और पूर्णिया में दर्ज किए गए थे। जांच एजेंसी अब दोनों मामलों में सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों का अध्ययन करते हुए यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि परीक्षा में गड़बड़ी स्थानीय स्तर तक सीमित थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था।
परीक्षा धांधली की जांच के लिए बनी विशेष टीम
दारोगा भर्ती परीक्षा से जुड़ी शिकायतों की जांच के लिए EOU ने SIT गठित करने के बाद जांच का दायरा भी तय कर दिया है। सोमवार को EOU के अधिकारियों ने बैठक कर विस्तृत जांच कार्ययोजना तैयार की। बैठक में अब तक पुलिस जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों, दोनों प्राथमिकी और उनसे जुड़े तथ्यों का अध्ययन किया गया।
जांच टीम अब आरोपों की अलग-अलग कड़ियों को जोड़ने का प्रयास करेगी। खास तौर पर गया और पूर्णिया में सामने आए मामलों में अपनाए गए कथित तरीके की जांच की जाएगी। इसके आधार पर यह भी देखा जाएगा कि कहीं इसी तरह की गड़बड़ी दूसरे जिलों या अन्य परीक्षा केंद्रों पर तो नहीं हुई।
गया और पूर्णिया की FIR बनी जांच का आधार
EOU ने फिलहाल गया और पूर्णिया में दर्ज दो प्राथमिकी को टेकओवर किया है। इन मामलों में सामने आए साक्ष्य अब आर्थिक अपराध इकाई की जांच का हिस्सा होंगे। एजेंसी पुलिस की ओर से की गई शुरुआती जांच को भी अपने स्तर पर आगे बढ़ाएगी।

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि दोनों जिलों में सामने आई शिकायतों के बीच कोई समानता है या नहीं। यदि घटनाओं का तरीका एक जैसा पाया जाता है तो जांच का दायरा दूसरे जिलों और परीक्षा केंद्रों तक बढ़ सकता है।
परीक्षा में गड़बड़ी की अन्य शिकायतें भी जांच के दायरे में
EOU को गया और पूर्णिया की प्राथमिकी के अलावा छात्रों और अभिभावकों की ओर से भी परीक्षा में कथित धांधली की आशंका से जुड़ी शिकायतें मिली हैं। जांच एजेंसी इन शिकायतों को भी जांच का हिस्सा बनाएगी।
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इससे जांच केवल पहले से दर्ज मामलों तक सीमित नहीं रहेगी। छात्रों और अभिभावकों की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी को भी सत्यापित किया जाएगा। यदि शिकायतों में तथ्य सामने आते हैं तो उनसे जुड़े लोगों और परीक्षा केंद्रों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।
छात्रों ने शिक्षा विभाग के सामने उठाई थी मांग
दारोगा भर्ती परीक्षा को लेकर शिकायतों का मुद्दा उस समय और प्रमुखता से सामने आया, जब छात्र प्रतिनिधिमंडलों ने पिछले सप्ताह अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शिक्षा विभाग के सचिव से मुलाकात की थी। इस दौरान प्रतिनिधियों ने दारोगा भर्ती परीक्षा में कथित धांधली की जांच कराने की मांग भी रखी।
इसके बाद राज्य सरकार के निर्देश पर EOU ने गया और पूर्णिया में दर्ज मामलों को अपने हाथ में लिया। अब विशेष जांच टीम इन मामलों के साथ-साथ अन्य शिकायतों की भी पड़ताल करेगी।
परीक्षा प्रक्रिया पर पहले ही लग चुका है ब्रेक
कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बीच बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग दारोगा भर्ती परीक्षा की शारीरिक दक्षता परीक्षा और अभिलेख सत्यापन की प्रक्रिया को अगले आदेश तक स्थगित कर चुका है। इससे भर्ती प्रक्रिया फिलहाल आगे नहीं बढ़ रही है।
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इस परीक्षा के प्रारंभिक लिखित चरण में करीब 35,857 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इनमें से 414 अभ्यर्थियों को कदाचार और अन्य कारणों से अयोग्य घोषित किया गया है। ऐसे में परीक्षा से जुड़ी शिकायतों की जांच का असर पूरी भर्ती प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
1,799 पदों पर हुई थी दरोगा की भर्ती
बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग ने दारोगा के कुल 1,799 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के इस परीक्षा में शामिल होने के कारण किसी भी तरह की अनियमितता की शिकायत गंभीर मानी जा रही है।
अब EOU की SIT यह पता लगाने में जुटेगी कि कथित गड़बड़ी किस स्तर पर हुई। जांच में परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था, अभ्यर्थियों से संबंधित शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की जाएगी।
क्या सिर्फ दो जिलों तक सीमित है मामला?
जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि कथित अनियमितता केवल गया और पूर्णिया तक सीमित थी या दूसरे जिलों में भी इसका असर रहा। EOU की टीम दोनों प्राथमिकी में सामने आए पैटर्न का विश्लेषण कर सकती है।

यदि जांच में अलग-अलग जिलों में समान तरीके से गड़बड़ी के संकेत मिलते हैं तो एजेंसी का दायरा और बढ़ सकता है। वहीं, यदि आरोप केवल स्थानीय स्तर की घटनाओं तक सीमित पाए जाते हैं तो जांच उसी आधार पर आगे बढ़ेगी।
SIT की जांच पर टिकी अभ्यर्थियों की नजर
दारोगा भर्ती परीक्षा को लेकर हजारों अभ्यर्थियों की नजर अब EOU की SIT जांच पर है। अभ्यर्थी चाहते हैं कि शिकायतों की निष्पक्ष और विस्तृत जांच हो तथा यदि कहीं अनियमितता साबित होती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
फिलहाल EOU ने जांच की दिशा तय कर दी है। दो प्राथमिकी के टेकओवर, छात्रों और अभिभावकों से मिली शिकायतों तथा पहले से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ेगी। आने वाले दिनों में SIT की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि दारोगा भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी का दायरा कितना बड़ा था और इसके पीछे किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका थी या नहीं।
अमन कुमार की रिपोर्ट
