पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर के पहले CEO, ट्रस्ट की बैठक में लगी मुहर
अयोध्या राम मंदिर को मिला पहला CEO
निष्कर्ष भारत संवाददाता-अयोध्या: राम नगरी अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में राम मंदिर के पहले मुख्य कार्यपालक अधिकारी यानी CEO (Chief Executive Officer) के नाम पर मुहर लग गई है। ट्रस्ट ने भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अयोध्या राम मंदिर का पहला CEO नियुक्त किया है। बुधवार को हुई ट्रस्ट की बैठक में उनके नाम का आधिकारिक फैसला लिया गया।
पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को राम मंदिर के प्रशासनिक ढांचे के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अयोध्या में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या, मंदिर परिसर की व्यवस्थाएं, प्रशासनिक समन्वय और भविष्य की योजनाओं को देखते हुए CEO का पद अहम भूमिका निभाएगा।
देवरिया के रहने वाले जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के अनुभवी अधिकारी और वरिष्ठ फाइटर पायलट रहे हैं। उन्होंने अपने लंबे सैन्य करियर में कई महत्वपूर्ण कमांड और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाली हैं। हाल ही में अप्रैल 2026 में भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद अब उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।
5,585 आवेदनों में से हुआ चयन
राम मंदिर के CEO पद के लिए देशभर से बड़ी संख्या में आवेदन आए थे। जानकारी के अनुसार, कुल 5,585 आवेदनों की गहन जांच और स्क्रूटनी के बाद तीन योग्य उम्मीदवारों का अंतिम पैनल तैयार किया गया।
तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने उम्मीदवारों के अनुभव, प्रशासनिक क्षमता और अन्य योग्यताओं का आकलन करने के बाद तीन नामों का पैनल श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपा।
इस चयन समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल वी.के. चतुर्वेदी और पूर्व परमाणु वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हावड़े शामिल थे।
मंगलवार को समिति ने अंतिम पैनल ट्रस्ट को सौंपा था। इसके बाद बुधवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम पर सहमति बनी और उन्हें राम मंदिर का पहला CEO नियुक्त कर दिया गया।
कौन हैं एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा?
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों में शामिल रहे हैं। उन्हें 6 दिसंबर 1986 को एयर फोर्स अकादमी से भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था।
वह एक अनुभवी लड़ाकू पायलट रहे हैं और अपने सैन्य करियर के दौरान 3,000 घंटे से अधिक उड़ान अनुभव हासिल किया। उन्होंने भारतीय वायुसेना में कई महत्वपूर्ण कमांड और स्टाफ पदों पर जिम्मेदारी संभाली।
जितेंद्र मिश्रा NDA पुणे और एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल के पूर्व छात्र भी रहे हैं। सैन्य सेवा के दौरान उनके अनुभव में ऑपरेशनल और प्रशासनिक दोनों तरह की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां शामिल रही हैं।
उन्होंने Deputy Chief of Integrated Defence Staff (Operations) के पद पर भी जिम्मेदारी निभाई। इसके अलावा उन्होंने भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान यानी Western Air Command का नेतृत्व किया।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संभाली पश्चिमी वायु कमान
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने 1 जनवरी 2025 को भारतीय वायुसेना की Western Air Command की कमान संभाली थी। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी वह पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे थे।
उनके सैन्य अनुभव और बड़े स्तर की प्रशासनिक एवं ऑपरेशनल जिम्मेदारियों को देखते हुए राम मंदिर CEO पद के लिए उनकी नियुक्ति को खास माना जा रहा है।
सेना में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) से भी सम्मानित किया जा चुका है।
30 अप्रैल 2026 को भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद अब वह अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था का अहम हिस्सा बनेंगे।
राम मंदिर के CEO की क्या होगी जिम्मेदारी?
राम मंदिर के CEO का पद केवल प्रशासनिक औपचारिकता तक सीमित नहीं होगा। अयोध्या भारत के सबसे बड़े धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्रों में तेजी से उभर रहा है। हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
ऐसे में मंदिर परिसर और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करना बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी है।
CEO मंदिर के रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्यों की निगरानी करेंगे। इसके अलावा विभिन्न सरकारी एजेंसियों और प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करना भी उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल होगा।
श्रद्धालुओं की सुविधाएं, व्यवस्था, सुरक्षा से जुड़े प्रशासनिक समन्वय और मंदिर ट्रस्ट की विभिन्न परियोजनाओं के संचालन में CEO की भूमिका अहम हो सकती है।
अयोध्या में लगातार बढ़ रहे धार्मिक पर्यटन और श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए एक पेशेवर और संगठित प्रशासनिक ढांचे की जरूरत महसूस की जा रही थी। ऐसे में CEO की नियुक्ति को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
प्रशासनिक व्यवस्था को मिलेगा नया ढांचा
राम मंदिर के निर्माण के बाद अयोध्या में धार्मिक पर्यटन का विस्तार तेजी से हुआ है। देश और विदेश से श्रद्धालु लगातार रामलला के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
बढ़ती भीड़ और बड़े स्तर की व्यवस्थाओं के कारण मंदिर प्रशासन को अब अधिक व्यवस्थित और पेशेवर ढंग से संचालित करने की जरूरत है।
CEO की नियुक्ति से ट्रस्ट और विभिन्न प्रशासनिक एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की उम्मीद है। एक अनुभवी पूर्व सैन्य अधिकारी के प्रशासनिक अनुभव का उपयोग मंदिर की व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने में किया जा सकता है।
SIT की सिफारिश के बाद लिया गया फैसला
राम मंदिर के प्रशासनिक ढांचे में CEO पद की नियुक्ति का फैसला उस समय महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब मंदिर से जुड़े दान और वित्तीय मामलों की जांच को लेकर भी चर्चाएं सामने आई हैं।
बताया गया है कि राम मंदिर दान चोरी मामले की जांच कर रही SIT की सिफारिश के बाद CEO पद सृजित करने और नियुक्ति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
CEO की नियुक्ति से प्रशासनिक जवाबदेही और कार्यों की निगरानी के लिए एक स्पष्ट जिम्मेदारी तय होने की संभावना है।
अयोध्या के लिए नई जिम्मेदारी, राम मंदिर प्रशासन में नया अध्याय
पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति के साथ अयोध्या राम मंदिर के प्रशासनिक इतिहास में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। भारतीय वायुसेना में दशकों तक सेवा देने के बाद अब उनके सामने देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक की प्रशासनिक व्यवस्था संभालने की चुनौती होगी।
देखिये ख़बर हमारे यूट्यूब चैनल पर भी: अमर शहीद रामफल मंडल को बड़ा सम्मान : हर साल 23 अगस्त को राजकीय समारोह मनाने का सम्राट चौधरी का ऐलान
उनका सैन्य अनुभव, नेतृत्व क्षमता और बड़े संगठनों के संचालन का अनुभव राम मंदिर ट्रस्ट के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि नए CEO के नेतृत्व में राम मंदिर की व्यवस्थाओं, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और विभिन्न प्रशासनिक परियोजनाओं को किस तरह आगे बढ़ाया जाता है।
पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति के साथ अयोध्या राम मंदिर को उसका पहला CEO मिल गया है और ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था अब एक नए और अधिक संगठित ढांचे की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है।
भूमि आर्या की रिपोर्ट
