लोकसभा से पास हुआ एंटी पेपर लीक बिल 2026, राहुल गांधी के बयान पर सदन में भारी हंगामा
Anti Paper Leak Bill 2026: लोकसभा से ध्वनि मत से पास हुआ बिल
देशभर में सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई के उद्देश्य से लाया गया सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, (एंटी पेपर लीक बिल) 2026 बुधवार को लोकसभा से ध्वनि मत के जरिए पारित हो गया। हालांकि इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के दौरान सदन में जमकर हंगामा देखने को मिला। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसका केंद्र कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का भाषण रहा।
अब इस विधेयक को आगे की मंजूरी के लिए राज्यसभा में पेश किया जाएगा। यदि वहां भी इसे पारित कर दिया जाता है और राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाती है, तो यह कानून के रूप में लागू हो जाएगा।
ध्वनि मत से पारित हुआ एंटी पेपर लीक बिल
लोकसभा में केंद्रीय सरकार की ओर से प्रस्तुत सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर विस्तृत चर्चा के बाद इसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।
सरकार का कहना है कि यह संशोधन सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने, पेपर लीक, नकल, संगठित परीक्षा माफिया और तकनीक के दुरुपयोग जैसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से लाया गया है। हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में सामने आए पेपर लीक मामलों को देखते हुए इस कानून को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता महसूस की गई।
सरकार का दावा है कि संशोधित कानून परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
राहुल गांधी के भाषण पर शुरू हुआ विवाद
विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार की नीतियों और परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनके भाषण के दौरान सत्ता पक्ष के सांसदों ने उनके कुछ बयानों पर आपत्ति जताई और उनसे तथ्यों के साथ अपने आरोपों को स्पष्ट करने की मांग की।

इसी दौरान सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच तीखी बहस हुई, जिसके कारण कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित रही।
राजनाथ सिंह ने कराया माहौल शांत
सदन में बढ़ते हंगामे के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने सत्ता पक्ष के सांसदों से शांत रहने की अपील की और कहा कि विपक्ष के नेता को अपनी बात पूरी करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
राजनाथ सिंह की अपील के बाद राहुल गांधी ने दोबारा अपना भाषण शुरू किया। हालांकि उनके अगले बयान के बाद सदन में एक बार फिर हंगामा शुरू हो गया।
बयान के बाद माफी की मांग
अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि बल प्रयोग की मंजूरी केवल गृह मंत्री या प्रधानमंत्री दे सकते हैं। इस बयान पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई।
सत्ता पक्ष का आरोप था कि राहुल गांधी ने तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक टिप्पणी की है। इसके बाद कई सांसदों ने उनसे सदन में माफी मांगने की मांग की। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक तीखी बहस चलती रही।
हंगामे के बावजूद लोकसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही आगे बढ़ाई और अंततः विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह का विपक्ष पर हमला
चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब देश के युवाओं और परीक्षा प्रणाली से जुड़े इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा हो रही थी, तब विपक्ष रचनात्मक सुझाव देने के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में लगा रहा।

उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील विषय पर संसद में सकारात्मक बहस होनी चाहिए थी, लेकिन विपक्ष ने इसे भी राजनीतिक विवाद का विषय बना दिया।
जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के भाषण पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष के नेता द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं थी।
युवाओं को लेकर भी की टिप्पणी
जितेंद्र सिंह ने अपने भाषण में कहा कि देश के करोड़ों युवा निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की उम्मीद करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता ने अपने भाषण में युवाओं के संदर्भ में जिस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल किया, वह दुर्भाग्यपूर्ण है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संसद में चर्चा का उद्देश्य कानून को मजबूत बनाना होना चाहिए, न कि राजनीतिक टकराव पैदा करना।
क्यों महत्वपूर्ण है यह विधेयक?
पिछले कुछ वर्षों में देश के कई राज्यों में प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं के कारण लाखों अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ी और उनकी तैयारी, समय तथा आर्थिक संसाधनों पर भी असर पड़ा।
सरकार का कहना है कि संशोधित कानून का उद्देश्य ऐसे अपराधों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करना, संगठित गिरोहों पर लगाम लगाना और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना है।
यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल, प्रश्नपत्र लीक, तकनीकी छेड़छाड़ और अन्य धोखाधड़ी से जुड़े मामलों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को और मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
अब राज्यसभा में होगी अगली परीक्षा
लोकसभा से पारित होने के बाद अब यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा। वहां चर्चा और मतदान के बाद यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो विधेयक राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह कानून पूरे देश में लागू हो सकेगा।
इस विधेयक को लेकर सरकार का कहना है कि इससे परीक्षा प्रणाली में विश्वास बढ़ेगा और युवाओं को निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का माहौल मिलेगा। वहीं विपक्ष का कहना है कि कानून के साथ-साथ उसकी प्रभावी और निष्पक्ष क्रियान्वयन व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है।
एंटी पेपर लीक बिल 2026 का लोकसभा से पारित होना परीक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण संसदीय कदम माना जा रहा है। हालांकि इस विधेयक पर चर्चा के दौरान राजनीतिक टकराव और राहुल गांधी के बयान को लेकर हुए हंगामे ने पूरे घटनाक्रम को और अधिक चर्चा में ला दिया। अब सभी की नजरें राज्यसभा पर टिकी हैं, जहां इस विधेयक पर अगली अहम बहस और फैसला होना बाकी है।
