शिक्षक दिवस 2026 : बिहार के छात्रों को शिक्षा मंत्री का संदेश, बोले- ज्ञान व संस्कार से बनेगा बिहार का उज्ज्वल भविष्य

शिक्षक दिवस

शिक्षक दिवस पर मिथिलेश तिवारी ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का संकल्प दोहराया

निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना। शिक्षक दिवस के अवसर पर बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने प्रदेश के शिक्षकों के नाम संदेश जारी कर उन्हें बिहार और देश के भविष्य का निर्माता बताया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने में शिक्षा की सबसे अहम भूमिका है और इस लक्ष्य को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी शिक्षकों के कंधों पर है। शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को हर बच्चे तक पहुंचाने और नई पीढ़ी को ज्ञान, कौशल, संस्कार तथा आत्मविश्वास से जोड़ने का आह्वान किया।

शिक्षक दिवस पर विकसित भारत का लक्ष्य और शिक्षा

शिक्षा मंत्री ने शिक्षक दिवस पर संदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा गया कि भारत को ज्ञान, नवाचार, कौशल, अनुसंधान और मानवीय मूल्यों के आधार पर विश्व का नेतृत्व करने वाला देश बनाने में शिक्षा निर्णायक भूमिका निभाएगी। इस लक्ष्य की सफलता केवल नीतियां बनाने से संभव नहीं है, बल्कि स्कूलों में उन नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने वाले शिक्षक ही इसकी वास्तविक कड़ी हैं।

उन्शिहोंने क्षक दिवस पर संदेश में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के शिक्षा के क्षेत्र में राज्य को आगे बढ़ाने के संकल्प को भी प्रमुखता से रखा गया है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि बिहार के प्रत्येक बच्चे को ऐसी शिक्षा मिलनी चाहिए, जिससे वह ज्ञानवान होने के साथ कुशल, संस्कारयुक्त, आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बन सके।

शिक्षक दिवस पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर

शिक्षा मंत्री ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए कई प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। इनमें बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना, विज्ञान, गणित, तकनीक और अनुसंधान के प्रति रुचि पैदा करना तथा कौशल और व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देना शामिल है।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबों और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रह सकता। विद्यार्थियों को बदलती दुनिया की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना होगा। इसके लिए उनमें सवाल पूछने, नई चीजें सीखने, प्रयोग करने और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विकसित करना जरूरी है।

शिक्षक दिवस के में उन्होंने देश में विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। शिक्षा मंत्री के मुताबिक आधुनिक शिक्षा और भारतीय मूल्यों के बीच संतुलन बनाकर ही ऐसी पीढ़ी तैयार की जा सकती है, जो तकनीकी रूप से सक्षम होने के साथ अपनी जड़ों से भी जुड़ी रहे।

हर बच्चे की प्रतिभा पहचानने की जिम्मेदारी

शिक्षक दिवस पर मिथिलेश तिवारी ने शिक्षकों को शिक्षा व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे में अलग क्षमता और प्रतिभा होती है। शिक्षक की जिम्मेदारी है कि वह उस प्रतिभा को पहचाने, विद्यार्थी को सही दिशा दे और उसके भीतर आत्मविश्वास पैदा करे।

उन्होंने आगे कहा कि कक्षा में बैठा हर विद्यार्थी भविष्य में बिहार और देश के निर्माण में योगदान दे सकता है। ऐसे में शिक्षक का काम केवल पाठ पढ़ाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सपनों को सही दिशा देना भी है। बच्चे को अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।

शिक्षा मंत्री ने नवाचार और रचनात्मकता को बढ़ावा देने की जरूरत भी बताई। उनका कहना है कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जिसमें विद्यार्थी केवल जानकारी हासिल न करे, बल्कि उस जानकारी का उपयोग नई सोच और नए समाधान विकसित करने में भी कर सके।

शिक्षक के आचरण से भी सीखता है विद्यार्थी

शिक्षक दिवस पर शिक्षा मंत्री ने अपने संदेश में शिक्षक की भूमिका को पाठ्यक्रम और विषय ज्ञान से कहीं व्यापक बताया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने शिक्षक से केवल किताबों का ज्ञान नहीं सीखता, बल्कि शिक्षक के व्यवहार, विचार, अनुशासन, संवेदनशीलता और व्यक्तित्व से भी प्रभावित होता है।

शिक्षक का प्रत्येक शब्द और व्यवहार विद्यार्थी के जीवन पर लंबे समय तक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए शिक्षकों की जिम्मेदारी केवल कक्षा तक सीमित नहीं है। उनके आचरण और व्यक्तित्व से विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी जैसे गुण विकसित होते हैं।

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मिथिलेश तिवारी ने शिक्षकों के त्याग, तपस्या, परिश्रम और समर्पण को नमन करते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में निर्धारित लक्ष्यों को जमीन पर उतारने में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

शिक्षक दिवस पर गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख

शिक्षा मंत्री ने शिक्षक दिवस पर भारतीय संस्कृति में गुरु के स्थान को सर्वोच्च बताते हुए गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह जीवन को दिशा देने वाला, संस्कारों का संवाहक, व्यक्तित्व का निर्माता और राष्ट्र निर्माण का प्रथम शिल्पकार भी होता है।

उन्होंने शिक्षक दिवस को केवल एक आयोजन या उत्सव के रूप में देखने के बजाय इसे कृतज्ञता, सम्मान और आत्ममंथन का अवसर बताया। इस अवसर पर उन्होंने महान दार्शनिक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की स्मृति को नमन करते हुए देश के सभी शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।

बिहार की ज्ञान परंपरा को फिर से मजबूत करने का संकल्प

शिक्षा मंत्री ने बिहार की ऐतिहासिक ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रदेश केवल भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि भारत की महान ज्ञान परंपरा की भूमि रहा है। नालंदा विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि बिहार की धरती सदियों से शिक्षा, दर्शन, अध्यात्म और ज्ञान का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाती रही है।

उन्होंने कहा कि नालंदा कभी विश्व के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में शामिल था और देश-विदेश से विद्यार्थी यहां ज्ञान प्राप्त करने आते थे। अब आवश्यकता है कि आधुनिक युग की जरूरतों के अनुरूप बिहार की उस गौरवशाली ज्ञान परंपरा को नए स्वरूप में मजबूत किया जाए।

संदेश में भगवान श्रीराम और बक्सर से जुड़े संदर्भ का भी उल्लेख किया गया। शिक्षा मंत्री ने शिक्षक दिवस पर बिहार की मिट्टी को भारतीय ज्ञान परंपरा की मूल चेतना से जुड़ा बताते हुए कहा कि प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के साथ जोड़ने की जरूरत है।

आधुनिकता के साथ संस्कार का समन्वय

शिक्षा मंत्री ने ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया, जिसमें ज्ञान के साथ संस्कार, विज्ञान के साथ विवेक, तकनीक के साथ मानवीय संवेदना और आधुनिकता के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा का सम्मान कायम रहे।

उनके संदेश का मूल भाव यही रहा कि शिक्षा का अंतिम उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना है जो अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज तथा देश के विकास में कर सकें।

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उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे मिलकर हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने का संकल्प लें। शिक्षक दिवस पर साथ ही विद्यार्थियों में कौशल, नवाचार, रचनात्मकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में अपनी भूमिका निभाएं।

शिक्षक ही बिहार के भविष्य के निर्माता

शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षक ही बिहार के भविष्य के निर्माता हैं। आज कक्षा में बैठा विद्यार्थी आने वाले समय में राज्य और देश के विकास की जिम्मेदारी संभाल सकता है। उसकी प्रतिभा को पहचानना, उसे सही दिशा देना, आत्मविश्वास जगाना और उसके सपनों को उड़ान देना शिक्षक की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

उन्होंने शिक्षकों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनके मान-सम्मान, गरिमा और आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील है। साथ ही उम्मीद जताई कि बिहार के शिक्षक अपने ज्ञान, मेहनत और समर्पण के जरिए आने वाली पीढ़ियों का भविष्य उज्ज्वल बनाएंगे।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि गुरु का सम्मान वास्तव में ज्ञान का सम्मान है। उन्होंने बिहार के सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को राज्य के हर बच्चे तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया। सरकार के संदेश में शिक्षा के साथ कौशल, तकनीक, नवाचार, संस्कार और भारतीय ज्ञान परंपरा को जोड़ने की प्राथमिकता भी स्पष्ट रूप से सामने आई।

Nishkarsh Bharat

अमन कुमार की रिपोर्ट