गंगा के बढ़ते पानी से बढ़ी चिंता, सीएम ने तटवर्ती इलाकों का किया निरीक्षण, दिए अहम दिशा-निर्देश

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गंगा के बढ़ते जलस्तर को लेकर बिहार सरकार ने बढ़ाई निगरानी

निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना। गंगा का बढ़ता जलस्तर बिहार में बाढ़ की चुनौती को लगातार गंभीर बना रहा है। नदी के कई स्थानों पर पानी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रशासन को पूरी तरह अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि तटवर्ती जिलों में राहत और बचाव कार्यों में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए और प्रभावित लोगों तक तत्काल मदद पहुंचाई जाए।

गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए राज्य सरकार ने अब निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने का फैसला किया है। प्रभारी मंत्रियों और प्रभारी सचिवों को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के साथ जरूरत पड़ने पर वहीं कैंप करने का निर्देश दिया गया है। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर हालात की निगरानी करना और प्रशासनिक स्तर पर किसी भी तरह की समस्या आने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

गंगा के किनारे बसे जिलों पर विशेष निगरानी

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद बक्सर से कटिहार तक गंगा किनारे बसे जिलों में प्रशासनिक गतिविधियां तेज कर दी गई हैं। इन क्षेत्रों में प्रभारी मंत्री और प्रभारी सचिव स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में रहेंगे। बाढ़ की स्थिति, जलस्तर में बदलाव, राहत सामग्री की उपलब्धता और प्रभावित परिवारों की जरूरतों की जानकारी सीधे जुटाई जाएगी।

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गंगा के तटवर्ती इलाकों में बक्सर, भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, बेगूसराय, समस्तीपुर, लखीसराय, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार समेत अन्य जिलों को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। सरकार का जोर इस बात पर है कि पानी बढ़ने की स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत व्यवस्था को समय रहते सक्रिय किया जा सके।

प्रभारी मंत्रियों और सचिवों की मौजूदगी से स्थानीय प्रशासन के सामने आने वाली समस्याओं का तत्काल समाधान करने में भी मदद मिलेगी। इससे जिला स्तर पर चल रहे राहत और बचाव अभियानों की निगरानी सीधे राज्य सरकार तक पहुंच सकेगी।

गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर

जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार शनिवार सुबह पटना के गांधी घाट गेज स्थल पर गंगा का जलस्तर 50.51 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान से 1.91 मीटर ऊपर था। उस समय भी नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी जारी थी और पानी अपने उच्चतम बाढ़ स्तर यानी HFL 50.52 मीटर के बेहद करीब पहुंच चुका था।

इसके बाद करीब 10 बजे गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.53 मीटर दर्ज किया गया। यानी नदी का पानी अपने उच्चतम बाढ़ स्तर से भी ऊपर निकल गया। जलस्तर में जारी वृद्धि ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि सरकार ने तटवर्ती क्षेत्रों में निगरानी और राहत-बचाव की तैयारियों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है।

गंगा के जलस्तर में वृद्धि का सीधा असर नदी किनारे बसे इलाकों पर पड़ सकता है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा, आवागमन और आवश्यक सेवाओं को बनाए रखना है।

पटना में तटबंधों पर भी बढ़ाई गई निगरानी

राजधानी पटना को लेकर मुख्यमंत्री ने विशेष सावधानी बरतने को कहा है। गंगा का पानी लगातार बढ़ने के कारण पटना शहरी सुरक्षा तटबंध और इसके आसपास के क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने का निर्देश दिया गया है।

पटना नगर निगम, जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग को आपसी समन्वय के साथ काम करने को कहा गया है। तटबंधों की स्थिति पर नजर रखने के साथ जल निकासी और संभावित जलभराव वाले इलाकों की भी निगरानी की जा रही है। प्रशासन को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जरूरी संसाधनों को तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।

राजधानी में स्थिति पर नजर रखना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि गंगा के किनारे कई रिहायशी और महत्वपूर्ण क्षेत्र मौजूद हैं। जलस्तर में अचानक वृद्धि होने पर निचले इलाकों में पानी पहुंचने की आशंका को देखते हुए प्रशासन को पहले से तैयारी रखने को कहा गया है।

पांच विभागों की उच्चस्तरीय बैठक

बाढ़ की स्थिति और तैयारियों की समीक्षा के लिए शनिवार को बिहार सरकार के पांच विभागों ने संयुक्त रूप से उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के मंत्री संजय सिंह, सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव और नगर विकास मंत्री नीतीश मिश्रा शामिल हुए।

बैठक में गंगा के बढ़ते जलस्तर से पैदा हुई स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों और विभागीय स्तर पर चल रही तैयारियों की समीक्षा की गई तथा प्रभावित इलाकों में राहत व्यवस्था को मजबूत रखने पर जोर दिया गया।

बैठक का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल कायम करना रहा, ताकि बाढ़ की स्थिति बिगड़ने पर राहत और बचाव कार्यों में किसी तरह की देरी न हो। पेयजल, स्वच्छता, ग्रामीण क्षेत्रों में राहत, शहरी व्यवस्था और जल संसाधन से जुड़े मुद्दों पर समन्वित तरीके से काम करने की जरूरत पर जोर दिया गया।

राहत-बचाव पर सरकार की सीधी नजर

गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच राज्य सरकार का फोकस अब राहत और बचाव व्यवस्था को जमीन पर प्रभावी बनाए रखने पर है। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, जरूरत के अनुसार राहत सामग्री उपलब्ध कराने और संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रभारी मंत्री और प्रभारी सचिव जब प्रभावित जिलों में कैंप करेंगे तो उन्हें स्थानीय स्तर पर वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सकेगी। इससे जिला प्रशासन की तैयारियों का आकलन करने और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने में भी आसानी होगी।

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सरकार की कोशिश है कि बाढ़ की स्थिति को केवल प्रशासनिक स्तर पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी लगातार मॉनिटर किया जाए। जलस्तर में हर बदलाव पर नजर रखते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि आम लोगों को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े।

फिलहाल गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी ने बिहार के तटवर्ती इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी है। पटना से लेकर गंगा किनारे बसे अन्य जिलों तक प्रशासन को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। आने वाले समय में नदी के जलस्तर में होने वाला बदलाव बेहद महत्वपूर्ण होगा। सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल लोगों की सुरक्षा तथा राहत-बचाव व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना है।

Nishkarsh Bharat

अमन कुमार की रिपोर्ट

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