ससुराल में युवक की संदिग्ध मौत से हड़कंप… राजधानी की घटना, परिजनों का बड़ा आरोप, पोस्टमार्टम से खुलेगा राज
पटना के ससुराल में युवक की मौत, रात की कॉल और गायब मोबाइल से सवाल
निष्कर्ष भारत, संवाददाता पटना। राजधानी पटना के दीघा थाना क्षेत्र में गुरुवार को ससुराल में रह रहे एक युवक की संदिग्ध मौत से इलाके में सनसनी मच गई। मेरी जानकारी के अनुसार घटना बुधवार देर रात की बताई जा रही है। मृतक की पहचान समस्तीपुर जिले के निवासी गोलू कुमार उर्फ सोनू के रूप में हुई है। सोनू पिछले करीब डेढ़ महीने से पटना स्थित अपने ससुराल में रह रहा था। घटना के बाद उसके परिजनों ने ससुराल पक्ष पर मारपीट समेत कई गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है और मामले की जांच सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है।
रात में भाई को किया फोन, मदद की लगाई गुहार
परिजनों के अनुसार, ससुराल से घटना से कुछ घंटे पहले सोनू ने अपने बड़े भाई सचिन कुमार को रात करीब 12:30 बजे फोन किया था। सचिन का दावा है कि बातचीत के दौरान सोनू ने बताया था कि ससुराल पक्ष के कुछ लोग उसके साथ मारपीट कर रहे हैं। उसने अपने भाई से मौके पर पहुंचकर उसे बचाने की गुहार भी लगाई थी।
सचिन के मुताबिक, फोन पर बातचीत के दौरान सोनू ने एक और महत्वपूर्ण बात बताई। उसने कथित तौर पर कहा कि उसके पास मौजूद मोबाइल फोन को पास के एक कुएं में फेंक दिया गया है। परिवार का आरोप है कि मोबाइल को सबूत मिटाने की नीयत से ससुरालवालों ने कुएं में फेंके जाने की बात कही गई थी। हालांकि, इस दावे की भी पुलिस ने अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है।
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रात काफी होने के कारण सचिन तत्काल घटनास्थल पर नहीं पहुंच सके। उन्होंने सोनू को सुबह वहां पहुंचने की बात कही। परिवार को उस समय अंदाजा नहीं था कि कुछ घंटे बाद उन्हें सोनू की मौत की खबर मिलेगी।
ससुराल पक्ष ने दी फांसी लगाने की जानकारी
परिजनों के अनुसार, सुबह करीब पांच बजे सोनू के ससुराल से उसके ससुर ने फोन कर बताया कि सोनू ने फांसी लगा ली है। सूचना मिलते ही सचिन स्कूटी से दीघा स्थित ससुराल के लिए रवाना हो गए। उनका कहना है कि वह करीब 10 से 15 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंच गए थे।
घटनास्थल पर पहुंचने के बाद सोनू की मौत की परिस्थितियों को लेकर परिवार के मन में कई सवाल उठने लगे। सबसे बड़ा सवाल उस मोबाइल फोन को लेकर है, जिससे सोनू ने रात में अपने भाई से संपर्क किया था। परिजनों का कहना है कि घटना के बाद वह मोबाइल फोन और जिस नंबर से सोनू ने बातचीत की थी, दोनों का पता नहीं चल पाया है।
परिजनों ने यह भी दावा किया कि सोनू के ससुराल से उसके ससुर और उसका बड़ा साला सुबह के समय वहां मौजूद नहीं थे। इन परिस्थितियों को देखते हुए परिवार ने मामले की गहराई से जांच कराने की मांग की है।
ससुराल पक्ष पर परिजनों के गंभीर आरोप
सोनू के बड़े भाई सचिन ने अपने भाई और उसकी पत्नी के बीच पारिवारिक विवाद का भी जिक्र किया है। उनका आरोप है कि विवाद के दौरान सोनू की पत्नी कथित तौर पर उसके साथ अपमानजनक व्यवहार करती थी। सचिन का यह भी दावा है कि सोनू को कथित तौर पर मर जाने तक की बातें कही जाती थीं।

हालांकि, ये सभी आरोप मृतक के परिजनों की ओर से लगाए गए हैं। पुलिस ने अभी इन आरोपों को सही या गलत नहीं माना है। जांच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पारिवारिक विवाद की इस घटना से सोनू की मौत का कोई संबंध था या नहीं।
डेढ़ महीने से ससुराल में रह रहा था सोनू
जानकारी के अनुसार, सोनू मूल रूप से समस्तीपुर जिले का रहने वाला था और फर्नीचर बनाने का काम करता था। पिछले कुछ समय से उसका काम ठीक नहीं चल रहा था। इसके बाद उसके ससुर ने उसे पटना बुलाया था। बताया जा रहा है कि ससुर ने सोनू को अपने साथ ई-रिक्शा चलाने के काम में लगाने की बात कही थी।
इसी वजह से सोनू करीब डेढ़ महीने से अपने ससुराल में रह रहा था। शुरुआत में यह उसके लिए रोजगार से जुड़ा सामान्य बदलाव माना जा रहा था, लेकिन अब उसकी संदिग्ध मौत के बाद पूरा मामला सवालों के घेरे में आ गया है।
परिजनों का कहना है कि यदि सोनू ने वास्तव में रात में मारपीट की शिकायत करते हुए अपने भाई को फोन किया था, तो उसके बाद कुछ ही घंटों में उसकी मौत कैसे हुई, इसकी जांच जरूरी है। वहीं पुलिस के लिए यह भी पता लगाना महत्वपूर्ण है कि रात की फोन कॉल और सुबह मिली मौत की सूचना के बीच वास्तव में क्या घटनाक्रम हुआ।
पुलिस ने घटनास्थल से जुटाए वैज्ञानिक साक्ष्य
घटना की सूचना मिलने के बाद दीघा थानेदार अवनीश कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास मौजूद लोगों से भी जानकारी जुटाई। मौत की परिस्थितियां संदिग्ध होने के कारण पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विधि विज्ञान प्रयोगशाला की टीम को भी बुलाया।
एफएसएल टीम ने घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य एकत्र किए हैं। इन साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच के बाद पुलिस को घटना से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है। घटनास्थल की स्थिति, उपलब्ध भौतिक साक्ष्य और अन्य परिस्थितियों का मिलान पुलिस की जांच में अहम भूमिका निभा सकता है।
पुलिस के सामने फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि सोनू की मौत वास्तव में आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई अन्य परिस्थिति थी। इसका जवाब केवल आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और कानूनी साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।
गायब मोबाइल फोन भी जांच का अहम हिस्सा
इस पूरे मामले में मोबाइल फोन का गायब होना जांच का महत्वपूर्ण पहलू बन गया है। मृतक के भाई का दावा है कि सोनू ने रात में जिस फोन से उसे कॉल किया था, वह फोन बाद में नहीं मिला। यदि जांच में यह बात पुष्ट होती है कि फोन जानबूझकर गायब किया गया था, तो इससे घटना की परिस्थितियों को समझने में महत्वपूर्ण सुराग मिल सकता है।
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि सोनू के पास कितने मोबाइल फोन थे, रात में किस नंबर से कॉल की गई थी और घटना के बाद उस नंबर की स्थिति क्या रही। जरूरत पड़ने पर कॉल डिटेल, तकनीकी जानकारी और मोबाइल से जुड़े अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा सकती है।
रात में हुई बातचीत इस मामले की कड़ी जोड़ने में अहम हो सकती है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि फोन कॉल के समय सोनू कहां था, उसके आसपास कौन लोग मौजूद थे और फोन कटने के बाद क्या हुआ।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज
सोनू की मौत का वास्तविक कारण जानने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पोस्टमार्टम से मौत की परिस्थितियों को समझने में पुलिस को चिकित्सकीय आधार पर महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। इसके साथ ही एफएसएल की रिपोर्ट भी जांच को आगे बढ़ाने में मदद करेगी। पुलिस फिलहाल किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ससुराल में मौत से उठे कई सवाल
दीघा में सोनू की मौत ने उसके परिवार के साथ-साथ पूरे मामले को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ परिजन ससुराल पक्ष पर मारपीट और पारिवारिक विवाद से जुड़े गंभीर आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर घटना की वास्तविक तस्वीर सामने लाने में जुटी है।
रात में भाई को किया गया फोन, मारपीट की कथित शिकायत, मोबाइल फोन के गायब होने की बात और कुछ घंटों बाद फांसी लगाने की सूचना—इन सभी घटनाओं के बीच की कड़ी अभी स्पष्ट नहीं है। यही वजह है कि पुलिस के लिए घटनाक्रम की समय-रेखा तैयार करना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। फिलहाल इस मामले में किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी। जांच, पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सोनू की मौत किन परिस्थितियों में हुई। अब सभी की नजर पुलिस जांच के अगले चरण और उन साक्ष्यों पर है, जो इस संदिग्ध मौत की पूरी कहानी सामने ला सकते हैं।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
