मुजफ्फरपुर में दर्दनाक हादसा, सेप्टिक टैंक में जहरीली गैस से 2 मजदूरों की मौत, तीसरा घायल
सेप्टिक टैंक में जहरीली गैस से दो मजदूरों की दर्दनाक मौत
निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। सेप्टिक टैंक में जहरीली गैस ने मुजफ्फरपुर में दो मजदूरों की जान ले ली। सिकंदरपुर थाना क्षेत्र में सोमवार को एक निर्माणाधीन मकान के सेप्टिक टैंक की बंद टंकी में शटरिंग खोलने उतरे मजदूर की दम घुटने से मौत हो गई। उसे बचाने के लिए टंकी में उतरा ठेकेदार भी जहरीली गैस की चपेट में आ गया और उसकी भी जान चली गई। दोनों को बचाने के प्रयास में तीसरा मजदूर भी गैस की चपेट में आकर बीमार हो गया। उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
सेप्टिक टैंक हादसा शहर के सिकंदरपुर इलाके में एसएसपी कांतेश मिश्रा के आवास से करीब 200 मीटर की दूरी पर स्थित एक मकान में हुआ। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए एसकेएमएच भेज दिया।
सेप्टिक टैंक कई दिनों से था बंद
जानकारी के अनुसार, सिकंदरपुर निवासी मुन्ना गुप्ता के मकान में सेप्टिक टैंक की ढलाई का काम करीब 15 दिन पहले पूरा हुआ था। ढलाई के बाद टंकी को बंद कर दिया गया था। लंबे समय तक बंद रहने के कारण टंकी के भीतर गैस जमा होने की आशंका जताई जा रही है।
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सोमवार सुबह सेप्टिक टैंक के अंदर लगी लकड़ी और प्लाई की शटरिंग हटाने का काम शुरू किया गया। इसी काम के लिए अली नेउरा, मीनापुर निवासी मजदूर सोनू कुमार टंकी के छोटे गड्ढे में नीचे उतरा। बताया जा रहा है कि टंकी में उतरने से पहले किसी तरह के सुरक्षा उपकरण का इस्तेमाल नहीं किया गया था। जैसे ही सोनू नीचे पहुंचा, उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी। कुछ ही देर में उसका दम घुटने लगा और वह मदद के लिए चिल्लाने लगा।
सोनू को बचाने टंकी में उतरा ठेकेदार
सोनू की हालत देखकर ऊपर मौजूद ठेकेदार मोहम्मद जहांगीर घबरा गया। उसने मजदूर को बचाने के लिए बिना देर किए सेप्टिक टैंक में उतरने का फैसला किया। लेकिन नीचे जहरीली गैस का प्रभाव इतना ज्यादा था कि टंकी में उतरते ही जहांगीर भी बेहोश हो गया। दोनों मजदूरों के अंदर गिरते ही वहां मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। आसपास मौजूद लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि बंद टंकी में उतरकर दोनों को किस तरह बाहर निकाला जाए।
इस दौरान यह भी सामने आया कि सेप्टिक टैंक में पर्याप्त हवा नहीं थी। लंबे समय तक बंद रहने के कारण अंदर ऑक्सीजन की कमी और जहरीली गैस जमा होने की आशंका ने स्थिति को बेहद खतरनाक बना दिया था।
बचाने उतरा तीसरा मजदूर भी गैस की चपेट में
सोनू और जहांगीर को टंकी के अंदर बेहोश पड़ा देखकर वहां मौजूद तीसरे मजदूर दिनेश कुमार ने मदद के लिए शोर मचाया। दिनेश, सरवदीपुर, बोचहां का रहने वाला बताया गया है। दिनेश ने दोनों को बाहर निकालने का प्रयास किया। लेकिन रेस्क्यू के दौरान वह भी जहरीली गैस की चपेट में आ गया। कुछ ही समय में उसकी तबीयत बिगड़ने लगी।

इसके बाद स्थानीय लोगों और आसपास मौजूद श्रमिकों ने मिलकर तीनों को टंकी से बाहर निकालने की कोशिश शुरू की। काफी मशक्कत के बाद तीनों को बाहर निकाला गया। लेकिन तब तक सोनू और जहांगीर की हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी।
दो की मौत, तीसरे का अस्पताल में इलाज
सेप्टिक टैंक से बाहर निकालने के बाद सोनू कुमार और मोहम्मद जहांगीर को अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। वहीं दिनेश कुमार का इलाज शुरू किया गया। उसकी स्थिति अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।
इस दर्दनाक घटना ने निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बंद टंकी या सेप्टिक टैंक में जमा गैस बाहर से दिखाई नहीं देती, लेकिन अंदर मौजूद व्यक्ति के लिए कुछ ही क्षणों में जानलेवा साबित हो सकती है।
सेप्टिक टैंक हादसे में साला-बहनोई की मौत
पुलिस और स्थानीय लोगों के अनुसार, मृतक सोनू कुमार और ठेकेदार मोहम्मद जहांगीर आपस में साला-बहनोई थे। दोनों की एक साथ मौत की खबर जब उनके पैतृक गांव अली नेउरा, मीनापुर पहुंची तो परिवार में कोहराम मच गया।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। एक ही परिवार के दो कमाऊ सदस्यों की अचानक मौत से गांव में मातम का माहौल है। परिवार के लोगों को इस हादसे पर विश्वास नहीं हो रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, दोनों रोजी-रोटी के लिए निर्माण कार्य से जुड़े हुए थे। काम के दौरान हुई इस घटना ने परिवार के सामने अचानक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
एसएसपी आवास के पास हुआ हादसा
घटना की लोकेशन भी इस हादसे को लेकर चर्चा में है। जिस मकान में घटना हुई, वह सिकंदरपुर क्षेत्र में एसएसपी कांतेश मिश्रा के आवास से करीब 200 मीटर की दूरी पर बताया जा रहा है। हादसे की जानकारी मिलते ही सिकंदरपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। पुलिस ने स्थिति को संभाला और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर कागजी प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल भेज दिया गया।
पुलिस ने शुरू की जांच
सिकंदरपुर थानाध्यक्ष रविभूषण के अनुसार, प्रथमदृष्टया मामला बंद सेप्टिक टैंक के भीतर जहरीली गैस के कारण दम घुटने का प्रतीत हो रहा है। पुलिस घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। पुलिस यह भी देख रही है कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा के क्या इंतजाम थे और मजदूर को टंकी में उतारने से पहले आवश्यक सावधानियां बरती गई थीं या नहीं।
बंद टंकी में मीथेन या कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी गैसों के जमा होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, घटना में वास्तव में कौन-सी गैस मौजूद थी और मौत का सटीक कारण क्या रहा, इसकी पुष्टि जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।
नगर डीएसपी ने भी लिया घटनास्थल का जायजा
घटना की सूचना के बाद नगर डीएसपी सुरेश कुमार भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल की स्थिति का जायजा लिया और पुलिस अधिकारियों से घटना की जानकारी ली। डीएसपी के मुताबिक, निर्माणाधीन मकान में सेंटरिंग खोलने के दौरान बाथरूम की टंकी में दम घुटने से दो मजदूरों की हालत गंभीर हुई थी। पुलिस ने दोनों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस अब घटना से जुड़े दूसरे पहलुओं की भी जांच कर रही है।
सुरक्षा में लापरवाही पर उठे सवाल
इस हादसे ने सेप्टिक टैंक और बंद भूमिगत टैंकों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे स्थानों में उतरने से पहले अंदर की हवा की जांच, गैस की मौजूदगी का पता लगाना, पर्याप्त वेंटिलेशन और आवश्यक सुरक्षा उपकरण बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि जहरीली गैस दिखाई नहीं देती। अंदर जाने वाला व्यक्ति कुछ ही समय में सांस लेने में असमर्थ हो सकता है और बेहोश होकर गिर सकता है। इसके बाद उसे बचाने के लिए बिना सुरक्षा इंतजाम के अंदर जाने वाला दूसरा व्यक्ति भी उसी खतरे में फंस सकता है।

मुजफ्फरपुर की इस घटना में भी यही स्थिति सामने आई। पहले सोनू गैस की चपेट में आया, फिर उसे बचाने उतरे जहांगीर की जान चली गई और तीसरे मजदूर दिनेश को भी रेस्क्यू के दौरान अस्पताल पहुंचाना पड़ा।
एक हादसा, कई सवाल
पुलिस मामले की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि टंकी के अंदर कौन-सी गैस जमा थी और सुरक्षा व्यवस्था में किस स्तर पर लापरवाही हुई।
मुजफ्फरपुर में हुई यह घटना केवल दो परिवारों के लिए बड़ी त्रासदी नहीं है, बल्कि निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चेतावनी है। बंद सेप्टिक टैंक या भूमिगत टंकी में बिना सुरक्षा व्यवस्था के उतरना कितना घातक हो सकता है, इस हादसे ने इसे एक बार फिर सामने ला दिया है।
राजकुमार सिंह की रिपोर्ट
