अरविंद केजरीवाल ने CEC ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की मांग की, बोले- कई चुनाव रद्द कर दोबारा कराए जाएं
अरविंद केजरीवाल ने CEC ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की
निष्कर्ष भारत, संवाददाता नई दिल्ली: मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चुनाव आयोग पर जारी राजनीतिक विवाद अब और तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। केजरीवाल ने मांग की कि ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाया जाए। उन्होंने दिल्ली समेत पिछले कुछ वर्षों में CEC हुए कई विधानसभा चुनावों को रद्द कर दोबारा कराने की भी मांग रखी।
केजरीवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये बातें कहीं। उनका यह बयान The Indian Express की उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं।
हालांकि, चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन आरोपों CEC और रिपोर्ट में बताए गए मतभेदों के बीच स्पष्ट किया है कि SIR समेत आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए।
केजरीवाल बोले- ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार किया जाए
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह से चुनावों में कथित वोट चोरी की बात कही जाती रही है, अब सामने आई रिपोर्ट से उनके अनुसार इस पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं और इस पूरी प्रक्रिया में CEC ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठता है। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलना CEC चाहिए।
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ये आरोप केजरीवाल के राजनीतिक दावे हैं। अभी तक ऐसा कोई न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है जिसमें CEC ज्ञानेश कुमार को इन आरोपों का दोषी ठहराया गया हो।
दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार समेत कई चुनाव रद्द करने की मांग
केजरीवाल ने केवल CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग तक अपना बयानCEC सीमित नहीं रखा। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में हुए कई राज्यों के विधानसभा चुनावों को रद्द कर दोबारा कराने की मांग भी की।
उन्होंने दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और मध्य प्रदेश में हुए चुनावों का उल्लेख किया और कहा कि इन चुनावों को रद्द करके दोबारा चुनाव कराए जाने चाहिए।
यह मांग ऐसे समय पर आई है जब SIR के तहत मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने CEC पर बदलाव को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।
‘चुनाव आयोग का मतलब तीनों सदस्य’
AAP नेता ने चुनाव आयोग की संस्थागत संरचना का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव आयोग केवल मुख्य चुनाव आयुक्त का नाम नहीं है। उनके मुताबिक आयोग में CEC के अलावा दो अन्य चुनाव आयुक्त होते हैं और महत्वपूर्ण फैसले आयोग की बैठक में लिए जाते हैं।
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केजरीवाल ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय में ऐसे आदेश जारी किए गए जिनके संबंध में दोनों चुनाव आयुक्तों ने लिखित तौर पर आपत्तियां दर्ज की थीं।
The Indian Express की रिपोर्ट में भी चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर दर्ज आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, आपत्तियों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, Form 6 में बदलाव और चुनावी डेटा के प्रबंधन से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
28 अक्टूबर 2025 और अप्रैल 2026 की चिट्ठियों का जिक्र
केजरीवाल ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की कथित चिट्ठियों का भी जिक्र किया।
उन्होंने दावा किया कि 28 अक्टूबर 2025 को संधू ने चुनाव आयोग के नाम से बिना केंद्रीय चुनाव आयोग की मंजूरी के पत्र और आदेश जारी किए जाने को लेकर आपत्ति जताई थी। इसके बाद 16 अप्रैल 2026 को भी उन्होंने IT से जुड़े मॉड्यूल और आधिकारिक संचार को लेकर सवाल उठाए।
केजरीवाल के मुताबिक, 24 अप्रैल को चुनाव आयुक्त विवेक जोशी की ओर से भी इसी तरह की आपत्ति दर्ज की गई। The Indian Express की रिपोर्ट में भी दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से रिकॉर्ड पर आपत्तियां दर्ज किए जाने का दावा किया गया है।
SIR को लेकर क्या है विवाद?
SIR यानी sir मतदाता सूची के व्यापक पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार से जून 2025 में शुरू हुई प्रक्रिया के बाद 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं।
हालांकि, नाम हटने का मतलब हर मामले में स्थायी रूप से मतदान का अधिकार खत्म होना नहीं है। संबंधित मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दाखिल करने की प्रक्रिया उपलब्ध है। पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान हटाए गए 27.16 लाख नामों में से 22 लाख से अधिक मतदाताओं ने बहाली के लिए अपील की है।

दिल्ली में भी SIR को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है। 22 सितंबर को अदालत ने कुछ नोटिसों को प्रथम दृष्टया ‘mechanical’ बताते हुए चुनाव आयोग से प्रक्रिया पर जवाब मांगा और मतदाताओं के लिए WhatsApp और ईमेल जैसे माध्यमों से जवाब देने की सुविधा पर विचार करने को कहा।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
केजरीवाल और अन्य विपक्षी नेताओं के आरोपों के बीच चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने रिपोर्ट में बताए गए कथित आंतरिक मतभेदों पर सफाई दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग के सूत्रों ने कहा कि SIR समेत चुनाव आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए और निर्णय सर्वसम्मति से हुए।
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इससे विवाद के दो अलग-अलग पक्ष सामने आते हैं। एक ओर मीडिया रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज औपचारिक आपत्तियों का विवरण है, जबकि आयोग का कहना है कि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
राजनीतिक विवाद के और बढ़ने के आसार
SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दल पहले से ही CEC ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस, AAP, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी रिपोर्ट के आधार पर आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
अब अरविंद केजरीवाल की ओर से CEC की गिरफ्तारी, राष्ट्रद्रोह के मुकदमे और कई राज्यों के चुनाव दोबारा कराने की मांग के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया, न्यायिक कार्यवाही और SIR से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई इस विवाद की दिशा तय करने में अहम होगी।
पटना से कीमती कुमारी का रिपोर्ट
