पटना में अवैध पार्किंग वालों की खैर नहीं, गाड़ी खड़ी करते ही मिलेगा अलर्ट, रियल टाइम से होगी निगरानी

अवैध पार्किंग

पटना में अवैध पार्किंग पर अब तकनीक की नजर, रियल टाइम में होगी निगरानी

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (पटना)। राजधानी में अवैध पार्किंग और बेतरतीब तरीके से सड़क पर वाहन खड़ा करने वालों पर अब तकनीक के जरिए निगरानी बढ़ाई जाएगी। प्रतिबंधित जगह पर अवैध पार्किंग होते ही सिस्टम संबंधित इलाके के कंट्रोल रूम को तत्काल अलर्ट भेजेगा। इसके बाद मौके पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मी से संपर्क कर कार्रवाई की जानकारी ली जाएगी।

नई व्यवस्था का उद्देश्य सिर्फ अवैध पार्किंग पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि शहर में ट्रैफिक जाम की वास्तविक स्थिति पर रियल टाइम नजर रखना और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय करना भी है।

अवैध पार्किंग की पहचान होते ही मिलेगा अलर्ट

राजधानी में अवैध पार्किंग की समस्या को कम करने के लिए तैयार की जा रही तकनीकी व्यवस्था में सड़क पर वाहनों की स्थिति की निगरानी की जाएगी। यदि किसी ऐसे स्थान पर वाहन खड़ा मिलता है, जहां पार्किंग प्रतिबंधित है, तो संबंधित सिस्टम इसकी सूचना इलाके के कंट्रोल रूम तक पहुंचाएगा।

कंट्रोल रूम से तत्काल मौके पर मौजूद ट्रैफिक पुलिसकर्मी से संपर्क किया जाएगा। पुलिसकर्मी को वाहन हटाने या नियमानुसार कार्रवाई करने के संबंध में जानकारी देनी होगी। इस पूरी प्रक्रिया को तकनीकी सिस्टम में दर्ज किए जाने की योजना है, ताकि यह भी पता चल सके कि सूचना मिलने के बाद मौके पर क्या कार्रवाई हुई।

रियल टाइम निगरानी से जाम की स्थिति पर नजर

पटना में कई प्रमुख सड़कों और व्यस्त इलाकों में जाम की समस्या दिनभर बनी रहती है। कई जगह सड़क किनारे वाहन खड़े होने, ऑटो-ई-रिक्शा के अनधिकृत ठहराव और निर्धारित स्थानों पर सार्वजनिक परिवहन के नहीं रुकने से यातायात प्रभावित होता है।

नई तकनीकी व्यवस्था के जरिए अलग-अलग इलाकों की ट्रैफिक स्थिति पर रियल टाइम नजर रखने की योजना है। इससे अधिकारियों को यह जानकारी मिल सकेगी कि किस इलाके में जाम कितना गंभीर है और वहां तैनात ट्रैफिक कर्मी अपनी निर्धारित ड्यूटी वाली जगह पर मौजूद हैं या नहीं।

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इस व्यवस्था से कंट्रोल रूम और मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों के बीच सूचना का आदान-प्रदान भी तेज होगा। अधिकारियों को जाम की स्थिति और उसके समाधान के लिए की गई कार्रवाई की जानकारी जल्द मिल सकेगी।

बस स्टॉपेज के बावजूद सड़क पर रुकती हैं बसें

पटना में अवैध पार्किंग के कारण ट्रैफिक जाम की एक बड़ी वजह निर्धारित स्टॉपेज का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल नहीं होना भी माना जा रहा है। शहर में सिटी सर्विस बसों के लिए आधुनिक बस स्टॉपेज तैयार करने पर पहले भी बड़ी राशि खर्च की जा चुकी है। इसके बावजूद कई स्थानों पर बसें निर्धारित स्टॉपेज पर रुकने के बजाय यात्रियों को देखते ही सड़क पर खड़ी हो जाती हैं।

बस के अचानक सड़क पर रुकने से पीछे चल रहे वाहनों की रफ्तार प्रभावित होती है और कई बार कुछ ही समय में लंबा जाम लग जाता है। व्यस्त सड़कों पर यह समस्या और गंभीर हो जाती है। ऐसे में सिर्फ पार्किंग पर कार्रवाई करने से पूरी समस्या का समाधान संभव नहीं है। सार्वजनिक परिवहन के निर्धारित स्थानों पर रुकने की व्यवस्था को भी प्रभावी बनाना जरूरी माना जा रहा है।

ऑटो-ई-रिक्शा के अनधिकृत स्टॉपेज भी चुनौती

पटना के कई हिस्सों में ऑटो और ई-रिक्शा चालकों ने यात्रियों की सुविधा और अपनी जरूरत के अनुसार अनधिकृत स्टॉपेज बना लिए हैं। इन जगहों पर अक्सर कई वाहन एक साथ खड़े हो जाते हैं। यात्रियों के चढ़ने-उतरने के दौरान सड़क का बड़ा हिस्सा घिर जाता है और यातायात की रफ्तार धीमी पड़ जाती है।

कई स्थानों पर ट्रैफिक पुलिसकर्मियों और अधिकारियों की तैनाती के बावजूद इस समस्या पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं हो सका है। यही वजह है कि अब निगरानी व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। इससे सिर्फ मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी की कार्रवाई ही नहीं, बल्कि उस क्षेत्र में बार-बार बनने वाले जाम के कारणों की भी पहचान करने में मदद मिल सकती है।

सीआरआरआई के साथ ट्रैफिक सुधार की योजना

पटना अवैध पार्किंग जाम को नियंत्रित करने के लिए पथ निर्माण विभाग ने केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान के साथ मिलकर योजना पर काम शुरू किया है। अध्ययन के दौरान शहर में यातायात प्रभावित करने वाले अलग-अलग कारणों को देखा जा रहा है।

इस प्रक्रिया में ऑटो और ई-रिक्शा के अनियमित ठहराव को जाम के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है। इसके अलावा सड़क किनारे वाहनों की पार्किंग और निर्धारित स्टॉपेज के इस्तेमाल से जुड़ी समस्याओं का भी आकलन किया जा रहा है।

योजना का मकसद केवल अवैध पार्किंग लगने के बाद उसे हटाना नहीं है, बल्कि ऐसे स्थानों की पहचान करना भी है जहां लगातार यातायात बाधित होता है। तकनीकी निगरानी से इन स्थानों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।

अधिकारियों की भी तय होगी जवाबदेही

नई व्यवस्था का एक अहम पहलू ट्रैफिक ड्यूटी में तैनात कर्मियों की जवाबदेही तय करना है। जाम नियंत्रित करने के लिए संबंधित क्षेत्रों में पहले से मजिस्ट्रेट और डीएसपी स्तर के अधिकारियों की तैनाती की गई है। तकनीकी सिस्टम के जरिए अधिकारियों को मौके की स्थिति और वहां की गई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

यदि किसी स्थान से अवैध पार्किंग या जाम की सूचना आती है, तो कंट्रोल रूम के स्तर से इसकी निगरानी की जा सकेगी। सूचना मिलने के बाद पुलिसकर्मी या अधिकारी ने क्या कदम उठाया, इसकी जानकारी भी सिस्टम में दर्ज रहने की योजना है।

इससे यह पता लगाना आसान होगा कि किसी स्थान पर बार-बार समस्या क्यों उत्पन्न हो रही है और कार्रवाई के बावजूद यदि जाम बना रहता है तो उसके पीछे वास्तविक कारण क्या है।

तकनीक से तेज होगी कार्रवाई

पटना में ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने की इस योजना में तकनीक को निगरानी और जवाबदेही का माध्यम बनाया जा रहा है। अवैध पार्किंग, अनधिकृत स्टॉपेज और बेतरतीब वाहन खड़े करने जैसी समस्याओं की जानकारी अधिकारियों तक तेजी से पहुंचाने पर जोर है।

प्रशासन को उम्मीद है कि रियल टाइम निगरानी और त्वरित कार्रवाई से शहर के व्यस्त इलाकों में यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि, व्यवस्था की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अलर्ट मिलने के बाद मौके पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है और नियमों का पालन कितनी सख्ती से कराया जाता है। यदि नई तकनीकी व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो पटना में अवैध पार्किंग पर नियंत्रण के साथ-साथ ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली में भी अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही आ सकती है।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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