सहरसा पत्रकार मारपीट मामले में विधायक आईपी गुप्ता बोले- मीडियाकर्मियों से इस तरह का व्यवहार निंदनीय

सहरसा में पत्रकार से मारपीट पर सियासत

सहरसा सदर अस्पताल में पत्रकार से मारपीट पर विधायक ने जताई नाराजगी

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (सहरसा)। सहरसा में पत्रकार से मारपीट का मामला अब राजनीतिक रंग लेने लगा है। सहरसा सदर अस्पताल में प्रभात खबर डिजिटल के पत्रकार के साथ कथित मारपीट को लेकर विधायक इंजीनियर आईपी गुप्ता ने घटना पर दुख जताते हुए कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि पत्रकार की रिपोर्टिंग से किसी को आपत्ति हो तो शिकायत की जा सकती है या पुलिस को बुलाया जा सकता है, लेकिन हाथापाई और मारपीट किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अस्पताल की व्यवस्था और डॉक्टरों के व्यवहार को लेकर सवाल उठाए हैं।

सहरसा की घटना को लेकर पत्रकार की ओर से दिए गए आवेदन में अस्पताल के चिकित्सकों और अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, आवेदन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।

बच्चों की रिपोर्टिंग के लिए अस्पताल पहुंचे थे पत्रकार

बताया गया है कि पत्रकार मिड डे मील खाने के बाद बीमार हुए बच्चों की रिपोर्टिंग के लिए सहरसा सदर अस्पताल की आपातकालीन सेवा में पहुंचे थे। पत्रकार के अनुसार, उन्होंने अस्पताल में भर्ती बच्चों से जुड़ी जानकारी जुटाई और उनका वीडियो बनाया।

इसके बाद वह अस्पताल के बाहर बरामदे में खबर के लिए पीटीसी कर रहे थे। इसी दौरान विवाद की स्थिति उत्पन्न होने का आरोप लगाया गया है। पत्रकार की ओर से दिए गए आवेदन के मुताबिक, अस्पताल प्रबंधन की ओर से उनके अस्पताल में रिपोर्टिंग करने को लेकर चिकित्सकों से शिकायत की गई थी।

सहरसा सदर अस्पताल में विवाद बढ़ने का आरोप

आवेदन में आरोप लगाया गया है कि अस्पताल प्रबंधक सिंपी कुमारी की ओर से अस्पताल प्रभारी डॉ. अजीत और डॉ. एसके आजाद से शिकायत की गई। इसके बाद दोनों चिकित्सकों की ओर से कथित तौर पर गाली-गलौज और मारपीट की गई।

पत्रकार ने आवेदन में जान से मारने की धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया है। उनका दावा है कि विवाद इसके बाद और बढ़ गया तथा कई अन्य लोगों को भी मौके पर बुलाया गया।

हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। मामले में संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष और प्रशासनिक जांच की रिपोर्ट सामने आना महत्वपूर्ण होगा।

20 से 25 लोगों को बुलाने का आरोप

पत्रकार की ओर से दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि डॉ. एसके आजाद और अन्य लोगों के उकसाने पर करीब 20 से 25 लोगों को बुलाया गया। इसके बाद उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई।

आवेदन के मुताबिक, पत्रकार को जबरन अस्पताल के ओटी की ओर ले जाया गया और वहां एक कमरे में बंद कर दिया गया। पत्रकार ने कमरे के अंदर गला दबाने तथा शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर प्रहार किए जाने का आरोप भी लगाया है।

सहरसा मामले में लगाए गए इन गंभीर आरोपों की जांच अब पुलिस और प्रशासन के लिए अहम होगी। जांच के दौरान घटनास्थल, प्रत्यक्षदर्शियों और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

CCTV फुटेज सुरक्षित कराने की मांग

पत्रकार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने सहरसा सदर अस्पताल परिसर और ओटी के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज सुरक्षित कराने की मांग की है।

CCTV फुटेज से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि विवाद की शुरुआत कैसे हुई, मौके पर कौन-कौन लोग मौजूद थे और घटनाक्रम के दौरान क्या हुआ। ऐसे में फुटेज को सुरक्षित रखना जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सहरसा में प्रशासन की कार्रवाई पर नजर

घटना के बाद अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। पत्रकार की ओर से लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।

मामले में यदि CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान या अन्य साक्ष्यों से आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है।

विधायक आईपी गुप्ता ने कहा- हाथापाई बर्दाश्त नहीं

घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक इंजीनियर आईपी गुप्ता ने पत्रकार के साथ कथित मारपीट को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि पत्रकार अगर किसी विषय पर रिपोर्टिंग कर रहा है और उससे किसी को आपत्ति है तो संबंधित व्यक्ति शिकायत कर सकता है।

विधायक के अनुसार, जरूरत पड़ने पर पुलिस को भी बुलाया जा सकता है, लेकिन हाथापाई और मारपीट का रास्ता नहीं अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने घटना को अशोभनीय बताते हुए प्रशासन से दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की।

उन्होंने पत्रकारों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि पत्रकारों को अपना काम करने के दौरान सुरक्षा का माहौल मिलना जरूरी है।

RJD ने भी अस्पताल की व्यवस्था पर उठाए सवाल

मामले को लेकर RJD की ओर से भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया सामने आई है। पार्टी ने अपनी पोस्ट में अस्पतालों की व्यवस्था और डॉक्टरों के कथित व्यवहार पर सवाल उठाए।

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RJD ने तीखी टिप्पणी करते हुए डॉक्टर और पत्रकार के बीच कथित विवाद को लेकर सवाल खड़े किए। पार्टी ने आरोप लगाया कि बिहार में अस्पताल इलाज की व्यवस्था के बजाय डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों की कथित गुंडागर्दी को लेकर अधिक चर्चा में रहते हैं।

हालांकि, RJD की ओर से लगाए गए आरोप राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं। पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

सहरसा सदर अस्पताल में पत्रकार से कथित मारपीट का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा में है। एक ओर विधायक ने घटना की निंदा करते हुए कार्रवाई की मांग की है, वहीं RJD ने अस्पताल की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं।

दूसरी ओर, पत्रकार के आवेदन में मारपीट, धमकी और कमरे में बंद किए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अब CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ने की उम्मीद है।

फिलहाल पूरे मामले में आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। प्रशासन की जांच और कार्रवाई से ही यह साफ होगा कि सहरसा सदर अस्पताल में उस दिन घटनाक्रम किस तरह हुआ और कथित मारपीट के लिए कौन जिम्मेदार है।

Nishkarsh Bharat

अमन कुमार की रिपोर्ट

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