अशोकधाम मंदिर में सावन की तीसरी सोमवारी पर भगदड़, 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत; 24 घायल, जानिए कैसे हुआ हादसा

अशोकधाम

अशोकधाम मंदिर

निष्कर्ष भारत- संवाददाता- लखीसराय: सावन की तीसरी सोमवारी की सुबह लखीसराय स्थित प्रसिद्ध इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर अशोकधाम में आस्था का सैलाब अचानक मातम में बदल गया। भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए उमड़ी भारी भीड़ के बीच मंदिर के दक्षिणी द्वार से अशोकधाम स्टेशन मार्ग के बीच अचानक भगदड़ मच गई। इस दर्दनाक हादसे में सात महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 24 श्रद्धालु घायल हुए हैं। घायलों में 19 का इलाज सदर अस्पताल में, जबकि पांच का इलाज शहर के निजी अस्पतालों में कराया जा रहा है।

मृतकों में लखीसराय, मुंगेर और पटना जिले की महिलाएं शामिल हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरातफरी का माहौल बन गया। पुलिस और प्रशासन की टीम ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया।

सुबह से ही अशोकधाम में उमड़ी थी श्रद्धालुओं की भीड़

सावन की सोमवारी को लेकर अशोकधाम मंदिर में सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंदिर के मुख्य गेट से लेकर दृष्टिकिरण के आसपास तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जमा थी। मंदिर में पूजा और जलाभिषेक के लिए आने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही थी।

इसी बीच सोमवार सुबह करीब 5:42 बजे अशोकधाम स्टेशन पर मोकामा-बैद्यनाथधाम मेला स्पेशल ट्रेन आकर रुकी। ट्रेन से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उतरे। बोलबम का जयघोष करते हुए श्रद्धालु मंदिर की ओर बढ़ने लगे। पहले से मौजूद भीड़ में जब ट्रेन से उतरे सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए तो मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर अचानक भीड़ का दबाव बढ़ गया।

जर्जर विद्युत पोल गिरने से मची अफरातफरी

बताया जा रहा है कि इसी दौरान दृष्टिकिरण के आसपास लगा एक जर्जर विद्युत पोल भीड़ के दबाव में गिर गया। पोल से जुड़े केबल तार से चिंगारी निकलने लगी। अचानक तार से चिंगारी निकलते देखकर वहां मौजूद श्रद्धालुओं में करंट फैलने की अफवाह फैल गई।

अफवाह फैलते ही भीड़ में अचानक डर का माहौल बन गया। लोग खुद को सुरक्षित करने के लिए इधर-उधर भागने लगे। देखते ही देखते श्रद्धालुओं की भीड़ बेकाबू हो गई और भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई। अचानक हुई इस अफरातफरी में कई महिलाएं नीचे गिर गईं और भीड़ के दबाव में दब गईं।

भगदड़ के दौरान कई श्रद्धालुओं को चोटें आईं। गंभीर रूप से घायल महिलाओं को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन सात महिला श्रद्धालुओं को बचाया नहीं जा सका।

7 महिलाओं की मौत, 24 श्रद्धालु घायल

हादसे में जान गंवाने वाली सभी सात श्रद्धालु महिलाएं हैं। मृतकों में लखीसराय जिले की छह और मुंगेर तथा पटना जिले की एक-एक महिला शामिल होने की जानकारी सामने आई है।

मृतकों की पहचान मनमाला देवी (44), रिंकू देवी (50), हेमलता देवी (55), ललिता देवी (50), सविता कुमारी (35), सरोज देवी (65) और सावित्री देवी (49) के रूप में हुई है।

हादसे में कुल 24 श्रद्धालुओं के घायल होने की जानकारी है। इनमें 19 घायलों का इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है, जबकि पांच श्रद्धालुओं को शहर के निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। अस्पताल प्रशासन ने घायलों के इलाज के लिए चिकित्सकों और मेडिकल टीम को अलर्ट किया।

डीएम से लेकर प्रमंडलीय आयुक्त और डीआईजी पहुंचे मौके पर

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। लखीसराय के जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार प्रशासनिक अधिकारियों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और राहत एवं बचाव कार्य का जायजा लिया।

इसके बाद डीएम सदर अस्पताल पहुंचे और वहां भर्ती घायलों के इलाज की स्थिति की जानकारी ली। चिकित्सकों से घायलों की हालत और इलाज की व्यवस्था के बारे में जानकारी ली गई।

मुंगेर के प्रमंडलीय आयुक्त प्रेम सिंह मीणा और डीआईजी राकेश कुमार ने भी घटनास्थल और सदर अस्पताल पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। स्थानीय विधायक रामानंद मंडल भी मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली।

बैरिकेडिंग भी टूटी, दो एसएसबी जवान बाल-बाल बचे

भगदड़ के दौरान घटनास्थल पर लगाई गई कमजोर बैरिकेडिंग भी भीड़ के दबाव को नहीं झेल सकी और टूटकर क्षतिग्रस्त हो गई। बताया जा रहा है कि इस दौरान वहां तैनात एसएसबी के दो जवान भी बाल-बाल बच गए।

घटना के बाद मंदिर के अंदर और बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। पुलिस और प्रशासन की टीम स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

ट्रेन से आने वाली भीड़ ने बढ़ाया दबाव

अशोकधाम मंदिर में सावन की सोमवारी पर हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार सुबह मेला स्पेशल ट्रेन के पहुंचने के बाद अचानक बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के मंदिर की ओर बढ़ने से पहले से मौजूद भीड़ पर अतिरिक्त दबाव पड़ा। इसी बीच विद्युत पोल गिरने और तार से चिंगारी निकलने की घटना ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।

अफवाह के कारण श्रद्धालुओं में अचानक भगदड़ मची और लोगों को सुरक्षित स्थान की ओर भागने का मौका तक नहीं मिला। इस घटना ने धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, बैरिकेडिंग, बिजली के तारों की सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई

भगदड़ के बाद प्रशासन ने अशोकधाम मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रशासन की प्राथमिकता घायलों का बेहतर इलाज और मंदिर परिसर में कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।

अशोकधाम की यह घटना सावन जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम की जरूरत को सामने लाती है। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि आगे मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित दर्शन मिल सके और ऐसी दर्दनाक घटना दोबारा न हो।

Nishkarsh Bharat

भूमि आर्या की रिपोर्ट

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