जंतर-मंतर आंदोलन के बाद बदली सियासी रणनीति: युवाओं को साधने में जुटी कांग्रेस, राहुल गांधी ने संभाला मोर्चा

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जंतर-मंतर आंदोलन का असर! युवाओं को साधने में जुटी कांग्रेस। क्या युवा आंदोलन 2029 की राजनीति बदलेगा?

निष्कर्ष भारत संवाददाता नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं के आंदोलन ने देश की राजनीति को एक नई दिशा देने का काम किया है। आंदोलन के दौरान युवाओं की बड़ी भागीदारी, सरकार के खिलाफ उठे सवाल और छात्रों की मांगों को लेकर बने दबाव ने राजनीतिक दलों को अपनी रणनीतियों पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। खास तौर पर कांग्रेस ने युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए अब शिक्षा, रोजगार, पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है।

छात्र संगठनों और युवाओं की ओर से उठाए गए सवालों ने यह संकेत दिया है कि आने वाले समय में युवा मतदाता केवल राजनीतिक नारों से प्रभावित होने वाला नहीं है। शिक्षा व्यवस्था, सरकारी नौकरी, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और रोजगार जैसे मुद्दे उसके राजनीतिक फैसलों में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

दिल्ली जंतर मंतर आंदोलन के बाद राजनीतीक को और बढ़ाबा मिला

जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन ने राजनीतिक दलों के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया कि आखिर युवाओं के बीच उनकी मौजूदगी कितनी प्रभावी है। आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में युवाओं की गोलबंदी और उनकी मांगों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी।

आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्ष के सामने भी चुनौती बढ़ी कि वह युवाओं के मुद्दों को किस तरह अपने राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनाए। छात्रों ने जिन मुद्दों को लेकर आवाज उठाई, उनमें परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, रोजगार और सरकारी तंत्र की जवाबदेही जैसे सवाल प्रमुख रहे।

यही वजह है कि कांग्रेस कार्य समिति यानी CWC की बैठक में युवाओं के बीच पार्टी का समर्थन मजबूत करने और छात्र-युवा मुद्दों पर ज्यादा आक्रामक तरीके से मैदान में उतरने पर चर्चा हुई।

दिल्ली जंतर मंतर पर हुए आंदोलन के दौरान छात्रो पर कोंग्रेश राहुल गाँधी का पूरा समर्थन

कांग्रेस की नई रणनीति की झलक राहुल गांधी की सक्रियता में भी दिखाई दे रही है। जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन से घायल हुए एक छात्र को लेकर राहुल गांधी दिल्ली के एक पुलिस थाने पहुंचे। वहां उन्होंने छात्र के मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए धरना दिया।

कांग्रेस का संदेश साफ है कि पार्टी अब छात्रों से जुड़े मामलों को केवल संसद या प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित नहीं रखना चाहती। पार्टी नेता सीधे छात्रों के बीच पहुंचकर उनके मुद्दों को उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

राहुल गांधी के इस कदम को कांग्रेस की उस रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसके तहत पार्टी युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक विश्वसनीयता दोबारा मजबूत करना चाहती है।

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एजुकेशन-टू-एंप्लॉयमेंट रोडमैप पर कांग्रेस का फोकस

कांग्रेस ने युवाओं के लिए एजुकेशन-टू-एंप्लॉयमेंट रोडमैप तैयार करने की दिशा में काम करने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था से लेकर रोजगार तक की पूरी प्रक्रिया में मौजूद समस्याओं की पहचान करना और सुधार का खाका तैयार करना है।

पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। इसके लिए शिक्षा विशेषज्ञों, छात्रों और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव लेने की बात कही गई है।

कांग्रेस का मानना है कि केवल बेरोजगारी का मुद्दा उठाना पर्याप्त नहीं होगा। स्कूल और कॉलेज की शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने तक एक व्यापक नीति की जरूरत है।

800 शहरों तक पहुंचाने की तैयारी

युवाओं से संवाद बढ़ाने के लिए राहुल गांधी के संवाद कार्यक्रमों का विस्तार करने की भी योजना है। कोटा, देहरादून और प्रयागराज जैसे शहरों में हुए कार्यक्रमों के बाद कांग्रेस इस तरह के संवाद को देश के करीब 800 शहरों तक ले जाने की तैयारी में है।

इस रणनीति के पीछे कांग्रेस का उद्देश्य युवाओं की समस्याओं को सीधे सुनना और उन्हें राजनीतिक एजेंडे में शामिल करना है। पार्टी के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बड़ी युवा आबादी वाले देश में युवा मतदाता चुनावी राजनीति की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

पेपर लीक और बेरोजगारी पर केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने युवाओं के असंतोष को सरकार की नीतियों से जोड़ते हुए केंद्र पर निशाना साधा है। कांग्रेस कार्य समिति की ओर से भी पेपर लीक, बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षाओं के रद्द होने जैसे मुद्दों को गंभीर समस्या बताया गया है।

कांग्रेस का आरोप है कि लगातार परीक्षा विवादों और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी से युवाओं का समय और भविष्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। पार्टी ने छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

अब कांग्रेस इन मुद्दों को चुनावी राजनीति के केंद्र में लाने की कोशिश करती दिखाई दे रही है।

झारखंड और राजस्थान से भी मिला राजनीतिक संकेत

झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं से जुड़े विवादों के बीच छात्रों के आंदोलन को लेकर राहुल गांधी की सक्रियता ने यह संकेत दिया कि कांग्रेस अपने सहयोगी राज्यों में भी छात्र मुद्दों से दूरी बनाने के बजाय समाधान की मांग कर सकती है। राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर छात्रों की समस्याओं पर ध्यान देने की अपील की थी।

राजस्थान में भी सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर सामने आए विरोध और सवालों के बीच कांग्रेस नेताओं ने छात्रों और जनता के पक्ष में आवाज उठाई। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने स्कूलों की स्थिति को लेकर उठ रहे सवालों और विरोध के अधिकार का समर्थन किया।

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दिल्ली जंतर मंतर प्रोटेस्ट क्या 2029 का बदल देगा राजनीतिक?

जंतर-मंतर का आंदोलन कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों के लिए एक बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा सकता है। युवाओं की समस्याओं को नजरअंदाज करना अब किसी भी पार्टी के लिए आसान नहीं होगा।

हालांकि केवल आंदोलनों में समर्थन देना या छात्रों के बीच पहुंचना पर्याप्त नहीं होगा। युवाओं को रोजगार, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था, समय पर भर्ती और बेहतर शिक्षा व्यवस्था जैसे ठोस परिणाम चाहिए।

कांग्रेस ने युवाओं के बीच अपनी रणनीति बदलने का संकेत जरूर दिया है, लेकिन असली परीक्षा अब जमीन पर होगी। क्या पार्टी छात्रों के मुद्दों को लगातार उठाकर उन्हें राजनीतिक आंदोलन में बदल पाएगी, या फिर यह रणनीति केवल चुनावी तैयारी तक सीमित रह जाएगी—आने वाला समय इसका जवाब देगा।

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पटना से कीमती कुमारी का रिपोर्ट

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