डिजिटल गोल्ड पर कड़े नियम की तैयारी! निवेशकों के लिए बड़ा अपडेट, खरीदने से पहले जानें जरूरी बात

डिजिटल गोल्ड

डिजिटल गोल्ड खरीदने वालों के लिए नियम बदलने की तैयारी, जानें असर

निष्कर्ष भारत, संवाददाता (नई दिल्ली)। डिजिटल गोल्ड ने सोने की खरीदारी को बेहद आसान बना दिया है। अब निवेशक मोबाइल ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सिर्फ 10, 50 या 100 रुपये से भी सोना खरीद सकते हैं। लेकिन इसी तेजी से बढ़ते बाजार को लेकर अब सरकार नियामकीय व्यवस्था मजबूत करने पर विचार कर रही है।

डिजिटल गोल्ड को औपचारिक नियामकीय दायरे में लाने को लेकर वित्त मंत्रालय ने नियामकों, बैंकों और दूसरे संबंधित पक्षों से राय मांगी है। चर्चा में हर डिजिटल यूनिट के पीछे भौतिक सोने की उपलब्धता सुनिश्चित करने और RBI तथा SEBI की निगरानी जैसी संभावनाएं शामिल हैं। हालांकि, अभी अंतिम नियम लागू नहीं हुए हैं।

डिजिटल गोल्ड पर क्यों बढ़ी नियमन की चर्चा?

डिजिटल गोल्ड में ग्राहक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर एक निश्चित रकम का भुगतान करता है और उसके बदले सोने की डिजिटल मात्रा उसके खाते में दिखाई जाती है। प्लेटफॉर्म आमतौर पर इसके पीछे बराबर मात्रा में भौतिक सोना सुरक्षित रखने का दावा करते हैं। यही मॉडल छोटे निवेशकों के लिए इसे आसान बनाता है।

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लेकिन मौजूदा व्यवस्था में डिजिटल गोल्ड और SEBI द्वारा विनियमित गोल्ड ETF या अन्य स्वीकृत गोल्ड प्रोडक्ट एक जैसे नहीं हैं। SEBI ने नवंबर 2025 में स्पष्ट किया था कि डिजिटल गोल्ड उत्पाद उसके नियामकीय दायरे में नहीं आते और इनमें निवेश करने वालों को प्रतिभूति बाजार वाले निवेशक संरक्षण तंत्र उपलब्ध नहीं होते।

डिजिटल गोल्ड में क्या बदल सकता है?

सरकार जिन विकल्पों पर विचार कर रही है, उनमें डिजिटल गोल्ड को Securities Contracts (Regulation) Act, 1956 के तहत प्रतिभूति के रूप में मान्यता देने का प्रस्ताव भी शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, इस दिशा में व्यापक सहमति बनने की बात सामने आई है, लेकिन अंतिम फैसला और नियामकीय ढांचा अभी तय होना बाकी है।

अगर ऐसा ढांचा लागू होता है तो डिजिटल गोल्ड कंपनियों के लिए कारोबार, रिकॉर्ड, स्टोरेज, ऑडिट और ग्राहकों की संपत्ति से जुड़े नियम अधिक स्पष्ट हो सकते हैं। इससे कंपनियों पर अनुपालन की जिम्मेदारी भी बढ़ सकती है।

हर यूनिट के पीछे फिजिकल गोल्ड का प्रस्ताव

डिजिटल गोल्ड को लेकर चर्चा में सबसे अहम प्रस्ताव प्रत्येक डिजिटल यूनिट के पीछे भौतिक सोने की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इसका सीधा मतलब यह होगा कि किसी प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों के नाम जितना डिजिटल सोना दिखाया जा रहा है, उसके अनुरूप वास्तविक सोने की व्यवस्था भी हो।

ऐसी व्यवस्था लागू होने पर सोने की मात्रा, शुद्धता, स्टोरेज और रिकॉर्ड की जांच को अधिक व्यवस्थित किया जा सकता है। हालांकि, अभी यह प्रस्ताव चर्चा के स्तर पर है। अंतिम नियम आने के बाद ही पता चलेगा कि भौतिक सोने की बैकिंग और उसके सत्यापन के लिए क्या व्यवस्था तय की जाती है।

डिजिटल गोल्ड पर RBI और SEBI की निगरानी

मौजूदा चर्चा का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा RBI और SEBI की संभावित संयुक्त निगरानी है। सरकार डिजिटल गोल्ड के लिए ऐसी व्यवस्था पर विचार कर रही है जिसमें केंद्रीय बैंक और बाजार नियामक की भूमिकाएं तय की जा सकें।

हालांकि, RBI और SEBI की अंतिम जिम्मेदारियां अभी घोषित नहीं हुई हैं। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि डिजिटल गोल्ड पूरी तरह SEBI या RBI के अधीन आ चुका है। यह प्रस्तावित नियामकीय ढांचे का हिस्सा है।

आम ग्राहक के लिए क्या बदलेगा?

नए नियम लागू होने पर डिजिटल गोल्ड खरीदने वाले आम ग्राहकों के लिए सबसे बड़ा बदलाव पारदर्शिता से जुड़ा हो सकता है। कंपनियों को यह स्पष्ट करना पड़ सकता है कि ग्राहक के नाम कितना सोना रखा गया है, वह कहां सुरक्षित है और उसके रिकॉर्ड का सत्यापन किस तरह किया जाता है।

इसके अलावा ग्राहक के पैसे, सोने की डिलीवरी, बिक्री और स्टोरेज से जुड़े नियम भी अधिक स्पष्ट किए जा सकते हैं। यदि किसी प्लेटफॉर्म की संचालन व्यवस्था में समस्या आती है तो शिकायत और समाधान की प्रक्रिया को लेकर भी निर्धारित नियम बनाए जा सकते हैं।

कंपनियों पर बढ़ सकता है अनुपालन का बोझ

नियमन का असर केवल ग्राहकों तक सीमित नहीं रहेगा। डिजिटल गोल्ड कंपनियों को भी नए नियमों के अनुसार अपनी व्यवस्था बदलनी पड़ सकती है। स्टोरेज, ऑडिट, रिकॉर्ड रखने, ग्राहक पहचान और लेनदेन की निगरानी से जुड़े अनुपालन बढ़ सकते हैं।

इससे कंपनियों की परिचालन लागत में भी वृद्धि हो सकती है। अगर कारोबार की लागत बढ़ती है तो इसका असर प्लेटफॉर्म की फीस, खरीद-बिक्री के अंतर या अन्य शुल्कों पर पड़ सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव नियम लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

डिजिटल गोल्ड को लेकर SEBI पहले ही कर चुका है सावधान

नवंबर 2025 में SEBI ने डिजिटल गोल्ड को लेकर निवेशकों को औपचारिक चेतावनी दी थी। नियामक ने कहा था कि डिजिटल गोल्ड या ई-गोल्ड उत्पाद SEBI द्वारा विनियमित गोल्ड उत्पादों से अलग हैं। SEBI ने यह भी स्पष्ट किया था कि ऐसे उत्पाद न तो प्रतिभूति के रूप में अधिसूचित थे और न ही कमोडिटी डेरिवेटिव के तौर पर उसके दायरे में आते थे।

इसके विपरीत, Gold ETF, एक्सचेंज-ट्रेडेड गोल्ड डेरिवेटिव और Electronic Gold Receipts जैसे उत्पाद अलग नियामकीय ढांचे के तहत आते हैं। उदाहरण के लिए, EGR को सरकार ने 2021 में Securities Contracts (Regulation) Act के तहत प्रतिभूति के रूप में अधिसूचित किया था और इसके लिए SEBI का अलग ढांचा मौजूद है।

डिजिटल गोल्ड का बाजार कितना बड़ा है?

ताजा रिपोर्टों के मुताबिक भारत का डिजिटल गोल्ड बाजार तेजी से बढ़ रहा है। अगस्त 2026 की एक रिपोर्ट में उद्योग से जुड़े अनुमान के आधार पर बताया गया था कि वित्त वर्ष 2025-26 में डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए करीब 10 टन सोना जमा किया गया। डिजिटल गोल्ड की खासियत यह है कि ग्राहक छोटी रकम से भी 24 कैरेट सोना खरीद सकता है।

हाल की रिपोर्ट में डिजिटल गोल्ड क्षेत्र में करीब 3 अरब डॉलर के एसेट्स का अनुमान भी सामने आया है। बाजार के विस्तार के साथ नियामकीय स्पष्टता की मांग भी बढ़ी है।

क्या डिजिटल गोल्ड खरीदना बंद करना होगा?

फिलहाल ऐसा कोई अंतिम सरकारी नियम सामने नहीं आया है जिसके आधार पर कहा जाए कि ग्राहक डिजिटल गोल्ड खरीदना बंद कर दें। मौजूदा स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण बात यह समझना है कि डिजिटल गोल्ड और SEBI-regulated gold products अलग-अलग श्रेणियां हैं।

निवेश से पहले ग्राहक को प्लेटफॉर्म की शर्तें, खरीद और बिक्री की कीमत, GST, डिलीवरी शुल्क, स्टोरेज संबंधी शर्तें और भौतिक सोने की डिलीवरी के नियम समझने चाहिए। केवल यह देखकर फैसला नहीं करना चाहिए कि प्लेटफॉर्म पर सोना 10 रुपये से खरीदा जा सकता है।

नए नियम आए तो बाजार में बढ़ेगी स्पष्टता

डिजिटल गोल्ड के लिए औपचारिक नियामकीय ढांचा आने पर इस बाजार में कंपनियों की जिम्मेदारियां और ग्राहकों के अधिकार अधिक स्पष्ट हो सकते हैं। सरकार फिलहाल विभिन्न पक्षों से राय लेकर संभावित व्यवस्था पर विचार कर रही है।

इसका अर्थ यह है कि डिजिटल गोल्ड का भविष्य अब केवल छोटे निवेश की सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके स्टोरेज, बैकिंग, पारदर्शिता और ग्राहक सुरक्षा जैसे मुद्दे भी नियामकीय चर्चा के केंद्र में हैं।

फिलहाल अंतिम नियमों का इंतजार

सबसे अहम बात यह है कि अभी प्रस्तावित व्यवस्था अंतिम नियम नहीं है। वित्त मंत्रालय और संबंधित नियामकों की चर्चा के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि डिजिटल गोल्ड को किस कानून के तहत रखा जाएगा, RBI और SEBI की भूमिका क्या होगी और फिजिकल गोल्ड की बैकिंग को लेकर कौन से मानक तय होंगे।

इसलिए डिजिटल गोल्ड खरीदने वालों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी है कि वे इसके मौजूदा नियामकीय दर्जे को समझें और किसी भी निवेश से पहले प्लेटफॉर्म की शर्तों तथा जोखिमों की जानकारी लें। नए नियम लागू होने के बाद इस पूरे बाजार की व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

Nishkarsh Bharat

राजकुमार सिंह की रिपोर्ट

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