आरक्षण की लड़ाई पर बिहार में घमासान, तेजस्वी ने NDA नेताओं को घेरा
आरक्षण के मुद्दे पर तेजस्वी यादव ने NDA पर तीखा हमला बोला
निष्कर्ष भारत संवाददाता-पटना: बिहार की राजनीति में आरक्षण को लेकर जारी बहस के बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एनडीए के प्रमुख नेताओं पर तीखा हमला बोला है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बीच आरक्षण के मुद्दे पर चल रही बयानबाजी के बीच तेजस्वी यादव ने दोनों नेताओं को आरक्षित सीट छोड़कर सामान्य सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती दे दी।
रविवार को मीडिया से बातचीत करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि भारत में आरक्षण को खत्म करने वाला अभी तक कोई पैदा नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण के मुद्दे पर बयान देने वाले कई नेता खुद आरक्षित सीटों से चुनाव जीतकर राजनीति में आगे बढ़े हैं।
तेजस्वी यादव ने कहा कि उन्होंने स्वयं कभी आरक्षण का लाभ नहीं लिया, जबकि चिराग पासवान और जीतन राम मांझी लगातार आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ते रहे हैं। उन्होंने दोनों नेताओं की राजनीति और आरक्षण पर उनके बयानों को लेकर सवाल उठाए।
‘दम है तो आरक्षित सीट छोड़कर सामान्य सीट से चुनाव लड़ें’
तेजस्वी यादव ने चिराग पासवान और जीतन राम मांझी को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनमें दम है तो वे आरक्षित सीटों से इस्तीफा देकर सामान्य सीट से चुनाव लड़कर दिखाएं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ नेता आरक्षण का लाभ लेने के साथ-साथ इसी मुद्दे पर ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं, जिससे समाज में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। तेजस्वी ने कहा कि ऐसे नेताओं को समाज और विचारधारा से कोई वास्तविक सरोकार नहीं है और वे सत्ता में बने रहने के लिए अवसरवाद की राजनीति कर रहे हैं।
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि मंत्री पद, सुरक्षा और सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने के लिए कुछ नेता सत्ता के साथ जुड़े रहते हैं। उन्होंने कहा कि आरक्षण और सामाजिक न्याय जैसे गंभीर मुद्दों पर स्पष्ट रुख रखने की जरूरत है।
आरक्षण खत्म करने वाला कोई पैदा नहीं हुआ: तेजस्वी
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आरक्षण सामाजिक न्याय से जुड़ा मुद्दा है और इसे खत्म करने वाला कोई पैदा नहीं हुआ है। उन्होंने एनडीए और उसके सहयोगी दलों पर आरक्षण को लेकर स्पष्ट नीति नहीं रखने का आरोप लगाया।
तेजस्वी यादव ने कहा कि जो लोग कथित तौर पर आरक्षण खत्म करने की सोच रखते हैं, उनके साथ जीतन राम मांझी, चिराग पासवान, नीतीश कुमार की पार्टी और उपेंद्र कुशवाहा जैसे नेता राजनीतिक रूप से खड़े हैं।
उन्होंने सवाल किया कि एनडीए में शामिल अलग-अलग दलों और नेताओं की आरक्षण को लेकर वास्तविक विचारधारा क्या है। तेजस्वी के अनुसार, इन दलों को जनता के सामने अपना स्पष्ट रुख रखना चाहिए।
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65 प्रतिशत आरक्षण का मुद्दा फिर उठाया
तेजस्वी यादव ने बिहार में महागठबंधन सरकार के दौरान बढ़ाई गई 65 प्रतिशत आरक्षण सीमा का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि अगर एनडीए के सहयोगी दल वास्तव में आरक्षण के समर्थक हैं तो बिहार में बढ़ाई गई आरक्षण सीमा को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए पहल क्यों नहीं की जाती।
उन्होंने कहा कि बिहार में सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को अधिक प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से आरक्षण की सीमा बढ़ाई गई थी। अब एनडीए में शामिल नेताओं को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे इस मुद्दे पर क्या कदम उठाने के पक्ष में हैं।
तेजस्वी ने नीतीश कुमार, चिराग पासवान, जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टियों से आरक्षण के सवाल पर अपना स्पष्ट रुख बताने की मांग की।
X पर लिखा- ‘गुड़ खाये, गुलगुले से परहेज’
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी आरक्षण के मुद्दे को लेकर एनडीए नेताओं पर हमला बोला। उन्होंने लिखा, “गुड़ खाये, गुलगुले से परहेज!”

उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए के दो केंद्रीय मंत्री अलग-अलग तरह के बयान देकर आरक्षण समर्थक जनता की भावनाओं को समझने और मुद्दे को लेकर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
तेजस्वी ने भाजपा और आरएसएस पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि आरक्षण को लेकर उनकी राजनीति और विचारधारा पर सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने कहा कि आरक्षित सीटों से चुनाव जीतने वाले नेताओं को इस मुद्दे पर जनता के सामने स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
मोहन भागवत के पुराने बयान का किया जिक्र
तेजस्वी यादव ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के वर्ष 2015 के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें आरक्षण नीति की समीक्षा को लेकर चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि उस समय बिहार में हुए चुनाव के दौरान जनता ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी।
तेजस्वी ने कहा कि यदि भविष्य में आरक्षण व्यवस्था को लेकर किसी तरह का बदलाव करने या इसे कमजोर करने की कोशिश की गई तो बिहार की जनता इसका जवाब देगी।
उन्होंने आरक्षण के मुद्दे को सामाजिक न्याय और आगामी राजनीतिक संघर्ष से जोड़ते हुए कहा कि जनता इस विषय पर पूरी तरह जागरूक है।
बिहार में फिर गरमाई आरक्षण की राजनीति
चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बीच आरक्षण को लेकर जारी बयानबाजी के बाद तेजस्वी यादव के हमले से बिहार की राजनीति में यह मुद्दा और गर्म हो गया है। विपक्ष जहां एनडीए से आरक्षण पर स्पष्ट रुख मांग रहा है, वहीं आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
आरक्षण बिहार की राजनीति का हमेशा से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है और आगामी राजनीतिक समीकरणों में भी इसकी बड़ी भूमिका हो सकती है। तेजस्वी यादव के ताजा बयान के बाद अब सभी की नजर एनडीए नेताओं की प्रतिक्रिया पर है कि वे विपक्ष के आरोपों और सामान्य सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती का क्या जवाब देते हैं।
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पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
