दूसरी पत्नी को पेंशन देने से इनकार पड़ा भारी, पटना हाईकोर्ट ने रद्द किया सरकारी आदेश
पटना हाईकोर्ट ने दिलाई पारिवारिक पेंशन
निष्कर्ष भारत संवाददाता- पटना: पारिवारिक पेंशन के लिए करीब डेढ़ दशक से संघर्ष कर रही एक विधवा को पटना हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के वर्ष 2019 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत मृत सरकारी कर्मचारी की दूसरी पत्नी को पारिवारिक पेंशन देने से इनकार किया गया था।
जस्टिस पूर्णेंदु सिंह की एकलपीठ ने कुसुम देवी की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला 25 अगस्त 2026 को सुनाया। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को मृत कर्मचारी की मृत्यु की तारीख यानी 17 अप्रैल 2009 से सभी लंबित पारिवारिक पेंशन लाभ उपलब्ध कराए जाएं।
इस फैसले के बाद करीब डेढ़ दशक से लंबित पेंशन लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
जल संसाधन विभाग के कर्मचारी जय लाल साह से जुड़ा है मामला
पूरा मामला बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग में ग्रेड-III क्लर्क के पद पर कार्यरत रहे जय लाल साह से जुड़ा है। जय लाल साह का निधन 17 अप्रैल 2009 को हो गया था।
उनकी दूसरी पत्नी कुसुम देवी ने पति की मृत्यु के बाद पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन किया था। हालांकि विभाग ने उन्हें पारिवारिक पेंशन का लाभ देने से इनकार कर दिया था।
इसके बाद कुसुम देवी अपने अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करती रहीं और अंततः मामला पटना हाईकोर्ट पहुंचा। अदालत में दायर रिट याचिका के माध्यम से उन्होंने विभाग के फैसले को चुनौती दी।
दूसरी पत्नी होने के कारण पेंशन देने से किया गया था इनकार
याचिका के अनुसार, कुसुम देवी मृत सरकारी कर्मचारी जय लाल साह की दूसरी पत्नी थीं। पति की मृत्यु के बाद उन्होंने परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियों को संभाला।
बताया गया कि कुसुम देवी ने पहली पत्नी के साथ मिलकर परिवार की देखभाल की और अपने वैवाहिक जीवन से जन्मे छह बच्चों का पालन-पोषण किया।
इसके बावजूद जल संसाधन विभाग की ओर से उन्हें पारिवारिक पेंशन का लाभ नहीं दिया गया। वर्ष 2019 में विभाग ने एक आदेश जारी कर उनकी पारिवारिक पेंशन की मांग को खारिज कर दिया था।
विभाग के इसी आदेश को कुसुम देवी ने पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी।
जस्टिस पूर्णेंदु सिंह की एकलपीठ ने सुनाया फैसला
मामले की सुनवाई जस्टिस पूर्णेंदु सिंह की एकलपीठ ने की। अदालत ने मामले से जुड़े कानूनी तथ्यों के साथ-साथ इसके मानवीय पहलू पर भी विचार किया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह तथ्य आया कि याचिकाकर्ता लंबे समय से अपने और अपने बच्चों के भरण-पोषण से जुड़े अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही थीं।
अदालत ने इस बात का न्यायिक संज्ञान लिया कि पारिवारिक पेंशन केवल एक प्रशासनिक लाभ का मामला नहीं है, बल्कि मृत कर्मचारी के आश्रित परिवार के जीवन और भरण-पोषण से भी जुड़ा हुआ विषय है।
कोर्ट ने माना कि केवल विभागीय आदेश के आधार पर याचिकाकर्ता को उसके वैध पेंशन लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
2019 का विभागीय आदेश रद्द
पटना हाईकोर्ट ने जल संसाधन विभाग द्वारा वर्ष 2019 में जारी उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके आधार पर कुसुम देवी को पारिवारिक पेंशन देने से इनकार किया गया था।
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि कुसुम देवी को उनके सभी लंबित पारिवारिक पेंशन लाभ उपलब्ध कराए जाएं।
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, पेंशन और उससे जुड़े बकाया लाभों का भुगतान 17 अप्रैल 2009 से प्रभावी माना जाएगा, जो जय लाल साह की मृत्यु की तारीख है।
इस आदेश के बाद कुसुम देवी को वर्षों से लंबित आर्थिक लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
करीब डेढ़ दशक के संघर्ष का अंत
कुसुम देवी का यह मामला लंबे कानूनी और प्रशासनिक संघर्ष के बाद हाईकोर्ट तक पहुंचा। पति की मृत्यु के बाद वर्ष 2009 से पारिवारिक पेंशन के लिए उनका संघर्ष जारी था।
विभाग की ओर से वर्ष 2019 में उनकी मांग को खारिज किए जाने के बाद उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद उन्हें न केवल आगे पारिवारिक पेंशन मिलने की उम्मीद है, बल्कि पिछले वर्षों के लंबित लाभ भी मिलने का रास्ता खुल गया है।
यह फैसला उन परिवारों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो लंबे समय से पारिवारिक पेंशन और सरकारी लाभों से जुड़े मामलों में कानूनी संघर्ष कर रहे हैं।
परिवार और बच्चों के भरण-पोषण के पहलू पर भी विचार
मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक यह रहा कि अदालत ने केवल तकनीकी और विभागीय आधार पर फैसला नहीं किया, बल्कि याचिकाकर्ता की पारिवारिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा।
कुसुम देवी ने अदालत को बताया था कि पति की मृत्यु के बाद परिवार और बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी उनके सामने थी। ऐसे में पारिवारिक पेंशन उनके और परिवार के आर्थिक सहारे से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा था।
अदालत के फैसले से यह स्पष्ट हुआ कि सरकारी विभागों के आदेशों की न्यायिक समीक्षा के दौरान अदालतें संबंधित व्यक्ति की परिस्थितियों और उसके अधिकारों के व्यापक प्रभाव को भी देख सकती हैं।
सरकार को अब करना होगा बकाया भुगतान
पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब राज्य सरकार और संबंधित विभाग को कुसुम देवी के लंबित पारिवारिक पेंशन लाभों के भुगतान की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
करीब 17 वर्षों से लंबित इस मामले में कोर्ट के फैसले ने याचिकाकर्ता को बड़ी राहत दी है। वर्ष 2009 से प्रभावी भुगतान का निर्देश मिलने के कारण लंबे समय से रुके हुए आर्थिक लाभों का मामला अब सुलझने की दिशा में बढ़ गया है।
पटना हाईकोर्ट का यह फैसला बिहार में पारिवारिक पेंशन से जुड़े मामलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने साफ किया कि किसी व्यक्ति को केवल विभागीय आदेश के आधार पर उसके वैध अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।
17 अप्रैल 2009 को पति की मृत्यु के बाद शुरू हुआ कुसुम देवी का लंबा संघर्ष आखिरकार 25 अगस्त 2026 के हाईकोर्ट के फैसले के साथ एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। अब राज्य सरकार को अदालत के निर्देश के अनुसार सभी लंबित पारिवारिक पेंशन लाभों का भुगतान करना होगा।
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पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
