तेजस्वी यादव के लोक भवन मार्च पर प्रशांत किशोर का समर्थन; BJP ने बताया ‘फ्लॉप शो” बिहार की सियासत में तेज हुई रोजगार बनाम राजनीति की बहस

तेजस्वी यादव

तेजस्वी के मार्च पर प्रशांत किशोर का समर्थन, BJP का पलटवार—बताया ‘फ्लॉप शो’!

निष्कर्ष भारत संवाददाता पटना। बिहार की राजनीति में 19 अगस्त का दिन सियासी टकराव और नए राजनीतिक समीकरणों के नाम रहा। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने छात्रों, युवाओं, कथित पेपर लीक, रोजगार और पुलिस कार्रवाई के मुद्दों को लेकर पटना में लोक भवन मार्च निकाला। मार्च के दौरान बैरिकेडिंग तोड़े जाने के बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और तेजस्वी यादव समेत कई नेताओं-कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच बांकीपुर विधायक और जन सुराज के नेता प्रशांत किशोर का बयान बिहार की सियासत में खास चर्चा का विषय बन गया है। जहां बीजेपी और एनडीए ने तेजस्वी के मार्च को राजनीतिक स्टंट और फ्लॉप शो करार दिया, वहीं प्रशांत किशोर ने नेता प्रतिपक्ष के सड़क पर उतरने को उनके संवैधानिक और राजनीतिक दायित्व का हिस्सा बताया।

प्रशांत किशोर ने किया तेजस्वी के मार्च का समर्थन

प्रशांत किशोर ने कहा कि तेजस्वी यादव बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं और सरकार के खिलाफ मुद्दे उठाना उनका काम है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि तेजस्वी यादव को ऐसे मार्च और विरोध प्रदर्शन और ज्यादा करने चाहिए

प्रशांत किशोर के इस बयान को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह खुद बिहार की राजनीति में रोजगार और युवाओं के मुद्दे को लगातार केंद्र में रखने की कोशिश कर रहे हैं। हाल के दिनों में बांकीपुर की राजनीति में भी रोजगार को लेकर उनकी सक्रियता चर्चा में रही है।

प्रशांत किशोर ने कहा कि यह अच्छी बात है कि बिहार की राजनीति में अब जाति और धर्म से आगे बढ़कर नौकरी और रोजगार जैसे मुद्दों की चर्चा हो रही है। उनके मुताबिक, अगर बिहार के लोग चुनावी राजनीति में रोजगार और शिक्षा को प्राथमिकता देने लगे हैं तो इससे बेहतर खबर और क्या हो सकती है।

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‘पांच किलो अनाज नहीं, रोजगार की बात हो’

प्रशांत किशोर ने बिहार की राजनीति के बदलते मुद्दों पर जोर देते हुए कहा कि जनता को जाति-धर्म की राजनीति और मुफ्त राशन से आगे बढ़कर नौकरी और रोजगार की बात करनी चाहिए।

उनका यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बिहार में लंबे समय से चुनावी राजनीति जातीय समीकरण, सामाजिक गठजोड़ और कल्याणकारी योजनाओं के इर्द-गिर्द घूमती रही है। अब बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितता, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में दिखाई दे रहे हैं।

19 अगस्त के मार्च में भी छात्रों और युवाओं से जुड़े इन्हीं मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। तेजस्वी यादव लगातार परीक्षा व्यवस्था, कथित पेपर लीक और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार को घेर रहे हैं।

बांकीपुर की जीत का भी किया जिक्र

प्रशांत किशोर ने बांकीपुर में जन सुराज की जीत को बिहार की राजनीति में बदलाव का संकेत बताया। उन्होंने दावा किया कि इस राजनीतिक बदलाव का असर अब सत्ता की भाषा पर भी दिखाई दे रहा है।

उनके मुताबिक, पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की तरफ से एनकाउंटर जैसे मुद्दों की चर्चा होती थी, लेकिन अब सरकार शिक्षा सुधार की बात कर रही है। प्रशांत किशोर के इस बयान को बिहार में राजनीतिक एजेंडे के बदलाव के उनके दावे से जोड़कर देखा जा रहा है।

दरअसल, बिहार में युवाओं और रोजगार को लेकर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार तेज हो रही है। प्रशांत किशोर भी रोजगार को अपनी राजनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल कर चुके हैं। ऐसे में तेजस्वी यादव के रोजगार और छात्र मुद्दों पर सड़क पर उतरने को उनका समर्थन राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

BJP ने मार्च को बताया ‘फ्लॉप शो’

दूसरी ओर, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने तेजस्वी यादव के मार्च पर जमकर हमला बोला। बीजेपी की तरफ से इसे जनसमर्थन का प्रदर्शन नहीं, बल्कि तेजस्वी यादव की राजनीति को बचाने की कोशिश बताया गया।

संजय सरावगी के मुताबिक, राजद ने मार्च के जरिए अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने का प्रयास किया, लेकिन जमीन पर अपेक्षित जनसमर्थन नजर नहीं आया। उन्होंने दावा किया कि कार्यकर्ताओं में भी वह उत्साह नहीं दिखाई दिया, जिसकी उम्मीद राजद को थी।

बीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव की राजनीति अब वास्तविक जनसमस्याओं से कटती जा रही है और उनका विरोध प्रदर्शन केवल आरोप लगाने तथा कैमरे के सामने प्रदर्शन करने तक सीमित हो गया है।

यानी एक ही मार्च को लेकर बिहार की राजनीति में दो बिल्कुल अलग तस्वीरें सामने आ रही हैं। प्रशांत किशोर इसे विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी मान रहे हैं, जबकि बीजेपी इसे राजनीतिक रूप से कमजोर पड़ रही राजद की कोशिश बता रही है।

मार्च बना नई सियासी बहस का केंद्र

तेजस्वी यादव के लोक भवन मार्च ने सिर्फ सरकार और विपक्ष के बीच टकराव को ही नहीं बढ़ाया, बल्कि बिहार की राजनीति में बदलते मुद्दों पर भी बहस छेड़ दी है।

एक तरफ तेजस्वी यादव छात्रों, परीक्षा व्यवस्था, रोजगार और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी तरफ बीजेपी इस आंदोलन की राजनीतिक जमीन और जनसमर्थन पर सवाल उठा रही है। वहीं प्रशांत किशोर का तेजस्वी के आंदोलन को समर्थन देना इस पूरे घटनाक्रम को और दिलचस्प बना देता है।

जनता के सामने अब बड़ा सवाल यही है कि क्या बिहार की राजनीति वास्तव में जाति और धर्म के पुराने समीकरणों से आगे निकलकर नौकरी, रोजगार, शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर टिकेगी?

अगर ऐसा होता है तो आने वाले समय में बिहार की राजनीतिक लड़ाई सिर्फ सत्ता बनाम विपक्ष की नहीं होगी, बल्कि यह सवाल भी अहम होगा कि युवाओं के मुद्दों पर कौन राजनीतिक दल ज्यादा प्रभावी और भरोसेमंद आवाज बन पाता है।

फिलहाल, तेजस्वी यादव का लोक भवन मार्च राजनीतिक रूप से कई संदेश छोड़ गया है। प्रशांत किशोर के समर्थन ने विपक्षी राजनीति के लिए एक नया कोण पैदा किया है, जबकि बीजेपी के ‘फ्लॉप शो’ वाले हमले ने यह संकेत दिया है कि इस आंदोलन का राजनीतिक मूल्यांकन आने वाले दिनों में और तेज होगा।

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पटना से कीमती कुमारी का रिपोर्ट

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