थाई मांगुर मछली क्यों है खतरनाक? भारत में बैन होने के पीछे की पूरी कहानी
एक ऐसी मछली भी है, जिसे भारत सरकार ने पूरी तरह बैन कर दिया है। इस मछली का नाम है थाई मांगुर (Thai Mangur)।
तेजी से बढ़ने वाली मछली बनी स्वास्थ्य के लिए खतरा
मछली को हमेशा से सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। डॉक्टर और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट अक्सर सैल्मन, टूना और मैकेरल जैसी मछलियों को डाइट में शामिल करने की सलाह देते हैं, क्योंकि इनमें प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। लेकिन हर मछली शरीर के लिए फायदेमंद नहीं होती। एक ऐसी मछली भी है, जिसे भारत सरकार ने पूरी तरह बैन कर दिया है। इस मछली का नाम है थाई मांगुर (Thai Mangur)।
थाई मांगुर एक विदेशी प्रजाति की मछली है, जिसे मुख्य रूप से थाईलैंड और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में पाला जाता है। कुछ साल पहले भारत के कई राज्यों में भी इसका पालन बड़े पैमाने पर होने लगा था, क्योंकि यह बहुत तेजी से बढ़ती है और इसे पालने में लागत कम आती है। कम समय में ज्यादा मुनाफा होने के कारण मछली पालने वाले लोग इसकी ओर आकर्षित हुए। हालांकि बाद में इसके सेवन से जुड़े गंभीर स्वास्थ्य खतरे सामने आने लगे, जिसके बाद सरकार ने इस पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया।
थाई मांगुर में पाए जाते हैं जहरीले तत्व
यूपी के अलीगढ़ फिशरीज डिपार्टमेंट की असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. प्रियंका आर्या के अनुसार कई रिसर्च में यह सामने आया है कि थाई मांगुर मछली में ऐसे टॉक्सिन्स मौजूद हो सकते हैं, जो मानव शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मछली को अक्सर गंदे और प्रदूषित जल स्रोतों में पाला जाता है। ऐसे पानी में हैवी मेटल्स, केमिकल्स और जहरीले पदार्थ मौजूद रहते हैं, जो धीरे-धीरे मछली के शरीर में जमा हो जाते हैं।

जब लोग इस मछली का सेवन करते हैं तो ये विषैले तत्व उनके शरीर में पहुंच जाते हैं। लंबे समय तक इसका सेवन करने से शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं। कुछ शोधों में यह भी दावा किया गया है कि इसमें कैंसर पैदा करने वाले तत्व पाए जा सकते हैं।
कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का बढ़ सकता है खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि थाई मांगुर में मौजूद जहरीले तत्व शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ये टॉक्सिन DNA की संरचना पर भी असर डालते हैं, जिससे कोशिकाओं में असामान्य बदलाव शुरू हो सकते हैं। यही बदलाव आगे चलकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
इसके अलावा इस मछली का सेवन पाचन तंत्र पर भी बुरा असर डाल सकता है। कई लोगों में पेट दर्द, एसिडिटी, उल्टी और दस्त जैसी समस्याएं देखी गई हैं। लगातार सेवन करने पर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने का भी खतरा रहता है।
कम लागत और ज्यादा मुनाफे ने बढ़ाई लोकप्रियता
थाई मांगुर की सबसे बड़ी खासियत इसकी तेजी से बढ़ने की क्षमता है। यह कम समय में बड़े आकार की हो जाती है, जिससे मछली पालने वालों को ज्यादा मुनाफा मिलता है। यही वजह रही कि कुछ समय पहले भारत के कई राज्यों में इसका पालन तेजी से बढ़ने लगा था।

हालांकि एक्सपर्ट्स ने समय रहते इसके नुकसान को लेकर चेतावनी दी। जांच में पता चला कि यह मछली स्थानीय जलीय जीवों और पर्यावरण के लिए भी खतरा बन सकती है। इसकी वजह से देशी मछलियों की प्रजातियों पर भी असर पड़ने लगा था।
भारत में क्यों लगाया गया बैन?
थाई मांगुर के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को देखते हुए भारत सरकार ने इसके उत्पादन, पालन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया। कई राज्य सरकारों ने भी इसे लेकर सख्त कदम उठाए हैं।
सरकार का कहना है कि लोगों को सुरक्षित और स्वस्थ खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। इसी वजह से इस खतरनाक मछली को बाजार से हटाने का फैसला लिया गया। कई जगहों पर प्रशासन द्वारा अभियान चलाकर थाई मांगुर मछलियों को नष्ट भी किया गया।
अगर कोई व्यक्ति या व्यापारी इस मछली की बिक्री करता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। मछली बाजारों और तालाबों में समय-समय पर जांच अभियान चलाए जाते हैं ताकि प्रतिबंध का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
कैसे पहचानें थाई मांगुर मछली?
थाई मांगुर देखने में सामान्य कैटफिश जैसी लगती है, लेकिन इसका रंग गहरा होता है और शरीर चिकना दिखाई देता है। यह काफी आक्रामक प्रजाति मानी जाती है। हालांकि आम लोगों के लिए इसकी सही पहचान करना आसान नहीं होता, इसलिए बाजार से मछली खरीदते समय सावधानी बरतना जरूरी है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हमेशा विश्वसनीय दुकानों से ही मछली खरीदें और संदिग्ध मछलियों से बचें। अगर किसी बाजार में थाई मांगुर बिकने की सूचना मिले तो प्रशासन को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
सुरक्षित भोजन के लिए जागरूकता जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को खाने-पीने की चीजों को लेकर जागरूक होना बेहद जरूरी है। सिर्फ सस्ती या आसानी से उपलब्ध चीजें खरीदने के बजाय उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा पर भी ध्यान देना चाहिए।
मछली प्रोटीन का अच्छा स्रोत है, लेकिन सही और सुरक्षित प्रजाति का चुनाव करना जरूरी है। सरकार द्वारा थाई मांगुर पर लगाया गया प्रतिबंध लोगों की सेहत की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
थाई मांगुर मछली तेजी से बढ़ने और कम लागत में तैयार होने के कारण भले ही मछली पालकों के लिए फायदेमंद रही हो, लेकिन इसके स्वास्थ्य संबंधी खतरे बेहद गंभीर बताए जाते हैं। जहरीले तत्वों और संभावित कैंसरकारी प्रभावों के कारण भारत सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगाया है। ऐसे में लोगों को जागरूक रहकर सुरक्षित और गुणवत्ता वाली मछलियों का ही सेवन करना चाहिए, ताकि स्वास्थ्य पर किसी तरह का खतरा न हो।
पटना से भूमि आर्या की रिपोर्ट
